हिंदी सिनेमा में अनुपम खेर का नाम चुनौती भरे किरदारों के लिए जाना जाता है। ऐसा ही एक किरदार है पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह का जो अनुपम ने अगले हफ्ते रिलीज हो रही फिल्म 'द एक्सीडेंटल प्राइम मिनिस्टर' में किया है। अमर उजाला ने अनुपम खेर से इसी किरदार को लेकर की ये बातचीत।
अनुपम खेर बोले- 'द एक्सीडेंटल प्राइम मिनिस्टर' देख मेरी मां भी मुझे नहीं पहचान पाईं थीं
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
-एक अभिनेता के पास दो ही हथियार होते हैं, पहला शरीर और दूसरा वाणी। अगर ये दोनों ही किसी किरदार में कम रह जाएं तो उसमें और कुछ चैलेंजिंग रहा ही नहीं। किसी किरदार की नकल करना और किसी किरदार को परदे पर जीना यानी कैरीकेचर और रियलिज्म में बहुत ही बारीक फर्क होता है। थोड़ा सा भी इधर-उधर हो जाए तो गड़बड़ हो सकता है। आठ महीने लगे मुझे इस किरदार पर काम करने में। इसके लिए मुझे ईनाम भी मिलेगा क्योंकि बचपन से सिखाया जाता है, अच्छा काम करोगे तो ईनाम भी मिलता है।
आपने कहा कि आपको चुनौती भरे रोल लेने की आदत है, इसकी प्रेरणा क्या है? द एक्सीडेंटल प्राइम मिनिस्टर के अलावा दूसरा मोस्ट चैलेंजिंग रोल किसे मानते हैं आप?
- अपने अंदर के अभिनेता को परखने के लिए ऐसे मुश्किल रोल लेने ही होते हैं जो आपको अपनी क्षमता का एहसास कराएं। मैं कह सकता हूं कि मेरे करियर का सबसे मुश्किल रोल यही है। खोसला का घोसला, मैंने गांधी को नहीं मारा जैसी फिल्मों के रोल भी चुनौती भरे थे, लेकिन मेरे हिसाब से इन किरदारों में बात करना अभी जल्दबाजी होगी। हां, 30 साल बाद जब मैं व्हीलचेयर पर होऊंगा तब बात करूंगा कि मेरे करियर के सबसे चुनौती भरे किरदार क्या था। अभी तो शुरूआत हुई है।
-मनमोहन सिंह हमारे आज के समय के नेता है। ऐसा नहीं है कि ये गांधी जी का रोल या चर्चिल का रोल या फिर नेहरू जी का रोल है, जिनके बारे में हमने सिर्फ किसी डॉक्यूमेंट्री में देखा है या सुना है। मनमोहन सिंह हर रोज टीवी पर होते हैं। हर इंसान उनसे वाकिफ है तो हर इंसान फिल्म देखने के बाद मुझे जज करेगा, कहेगा कि हां बिल्कुल ऐसे ही हैं मनमोहन सिंह। मेरी जो तस्वीरें वायरल हो रही है, वे इसलिए कि लोगों को इसमें काफी साम्यता दिखती है। तो कहीं ना कहीं वह एक तरह से मेरी तारीफ ही कर रहे हैं।
आप बीजेपी के समर्थक रहे हैं और कुछ लोगों का कहना है कि ये बीजेपी की प्रोपगैंडा फिल्म है। इस पर आपका क्या कहना है?
- मेरी बीवी बीजेपी से सांसद है तो बड़ा जायज है उनका बोलना लेकिन वह जज नहीं हैं इस फिल्म के। इस फिल्म के जज दर्शक हैं। अगर एक अकेला आदमी भी हॉल में बैठकर ताली मारेगा तो वह भी मेरे लिए बहुत बड़ा ईनाम है। पहला बड़ा ईनाम तो मुझे उसी दिन मिल गया था जिस दिन मां को मैंने अपनी एक क्लिप दिखाई और उन्होंने कहा कि मुझे मनमोहन सिंह की वीडियो क्यों दिखा रहा है।