हिंदी सिनेमा में आज के दौर में लगातार रीमेक फिल्में बन रही हैं। सलमान खान से लेकर अक्षय कुमार और शाहिद कपूर जैसे कलाकार ऐसी तमाम हिट रीमेक फिल्में दे चुके हैं। लेकिन आपको बता दें यह चलन आज का नहीं बल्कि बहुत पुराना है। शुरुआत से ही साउथ इंडस्ट्री की बेहतरीन फिल्मों के हिंदी रीमेक बनते आ रहे हैं। इसमें तमिल फिल्मों की भी एक लंबी फेरिस्त है जिनमें फिल्मकार के. भाग्यराज एक बड़ा नाम है। उनकी ढेरों फिल्मों की रीमेक को हिंदी भाषी दर्शकों ने सकारात्मक प्रतिक्रिया दी है। आज हम आपको ऐसी ही कुल 10 सुपरहिट हिंदी फिल्मों से रुबरू करवाने जा रहे हैं जो के. भाग्यराज निर्देशित और लिखित फिल्मों पर आधारित रहीं।
हिंदी सिनेमा की ये 10 सुपरहिट फिल्में दरअसल हैं रीमेक, देखिए कहां से आया असली आइडिया
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एक ही भूल (1981)
फिल्म एक ही भूल साल 1981 में रिलीज हुई थी। लक्ष्मी प्रोडक्शन के बैनर तले बनी इस फिल्म का निर्माण ए.पूर्णचंद्र राव ने किया। वहीं फिल्म का निर्देशन तातिनेनी राम राव ने किया। फिल्म में जितेन्द्र, रेखा मुख्य भूमिका में दिखे वहीं इसका संगीत लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल ने दिया। दशहरा और बकरीद के मौके पर रिलीज हुई यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर सुपरहिट साबित हुई थी। इस फिल्म के बलबूते ही जितेन्द्र को एक पारिवारिक हीरो की छवि प्राप्त हुई थी। यह फिल्म तमिल फिल्म मौना गीतंगल की हिंदी रीमेक थी। के. भाग्यराज के निर्देशन में बनी इस फिल्म का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि हिंदी के अलावा इसे तेलुगू, मलयालम और कन्नड में भी बनाया गया था।
वो 7 दिन (1983)
अनिल कपूर, पद्मिनी कोल्हापुरी और नसीरुद्दीन शाह अभिनीत फिल्म वो 7 दिन का निर्देशन बापू ने किया था। यह के. भाग्यराज के निर्देशन में बनी तमिल फिल्म अन्था एजहु नाटकल की हिंदी रीमेक है। वो 7 दिन का स्क्रीनप्ले के. भाग्यराज ने ही लिखा था। वहीं फिल्म का निर्माण सुरिंदर कपूर और बोनी कपूर ने किया था। यह फिल्म लोगों ने खूब पसंद की थी। हालांकि इस फिल्म के पीछे कपूर परिवार को खूब पापड़ बेलने पड़े थे। दरअसल भाग्यराज से इस फिल्म के अधिकार खरीदने के लिए अनिल कपूर और बोनी कपूर चेन्नई गए थे लेकिन उनके पास पैसे कम पड़ गए थे। इसके बाद उन्हें संजीव कपूर से कुछ लाख रुपये लेने पड़े थे जो उस वक्त चेन्नई में ही मौजूद थे वहीं दोनों ने शबाना आजमी से भी कुछ पैसे उधार लिए थे। यह फिल्म साल 1983 में रिलीज हुई थी। लेकिन साल 1982 में फिल्म प्रेम रोग के हिट हो जाने के बाद पद्मिनी कोल्हापुरी काफी व्यस्त हो गई थीं और उनके डेट्स आसानी से नहीं मिल रहे थे। इसके बाद अनिल कपूर ने काफी कोशिशों के बाद शूटिंग के लिए पद्मिनी के डेट्स हासिल किए थे। वहीं पहले यह फिल्म मिथुन को ऑफर की गई थी लेकिन डिस्को डांसर की सफलता के बाद उन्होंने अपने फीस में बढ़ोतरी कर दी थी। बोनी ने जब यह फिल्म अनिल को लेकर बनाने की घोषणा की थी तब दो फाइनेंसर्स और तीन डिस्ट्रीब्यूटर्स पीछे हट गए थे। दरअसल तब तक अनिल कपूर को शोहरत नसीब नहीं हुई थी। खुद नसीरुद्दीन शाह भी अनिल कपूर के साथ सह कलाकार के तौर पर नजर नहीं आना चाहते थे लेकिन डिस्ट्रीब्यूटर्स को फिल्म आसानी से बेचने के लिए बोनी कपूर किसी भी कीमत पर नसीरुद्दीन शाह को फिल्म में चाहते थे जिसके लिए उन्होंने उनकी फीस में भी बढ़ोतरी की थी।
मास्टरजी (1985)
यह एक हिंदी कॉमेडी फिल्म है जिसका निर्देशन कोवेलामुदी राघवेन्द्र राव ने किया था। वहीं के. भाग्यराज ने फिल्म का लेखन किया था। राजेश खन्ना और श्रीदेवी जैसे सितारो से सजी यह फिल्म के भाग्यराज की ही फिल्म मुधानाई मुदिछु की हिंदी रीमेक थी। यह फिल्म उस जमाने में 7.77 करोड़ रुपये की कमाई के साथ सफल साबित हुई थी। मास्टरजी में पहले अमिताभ बच्चन मुख्य अभिनेता के तौर पर नजर आने वाले थे और के. भाग्यराज फिल्म का निर्देशन करने जा रहे थे। लेकिन अमिताभ बच्चन के फिल्म से हटने के बाद के. भाग्यराज ने भी फिल्म से किनारा कर लिया। भाग्यराज सिर्फ अमिताभ बच्चन के साथ ही इस फिल्म का हिस्सा बनना चाहते थे। इस फिल्म के लिए अनिल कपूर भी काफी उत्साहित थे लेकिन निर्माताओं के अनुसार वह इस किरदार के लिए काफी युवा थे। संजीव कुमार ने भी मूल फिल्म को देखने के बाद उसे करने की इच्छा प्रकट की थी लेकिन खराब स्वास्थ्य के चलते वह फिल्म में काम नहीं कर पाए। जितेन्द्र फिल्म मुधानाई मुदिछु के अधिकार खरीदना चाहते थे लेकिन अधिक पैसे की मांग के बाद उन्हें पीछे हटना पड़ा।
आखिरी रास्ता (1986)
तमिल फिल्म ए प्रिजनर्स डायरी की हिंदी रीमेक आखिरी रास्ता का निर्देशन के. भाग्यराज ने किया था। वहीं भाग्यराज ने ही मूल फिल्म की पठकथा लिखी थी। फिल्म में अमिताभ बच्चन, जया प्रदा और श्रीदेवी मुख्य किरदारों में नजर आए थे। फिल्म में अमिताभ बच्चन ने पिता और पुत्र के रूप में डबल रोल किया था। अदालत, देश प्रेमी और महान जैसी फिल्मों के बाद यह चौथी दफा था जब उन्होंने पिता-पुत्र का डबल रोल किया था। इस फिल्म के बाद से अमिताभ बच्चन ने अपने राजनीतिक करियर के लिए ब्रेक लिया था। और साल 1988 में फिल्म शहंशाह से वापसी की थी। इस फिल्म में अमिताभ बच्चन और अनुपम खेर ने पहली बार एक साथ काम किया था।