इस साल साउथ से लेकर बॉलीवुड तक कई फिल्में रिलीज हुईं। एक्शन से लेकर हॉरर कॉमेडी फिल्मों की रिलीज के साथ-साथ पुरानी फिल्मों को भी सिनेमाघरों में उतारा गया। दिलचस्प बात ये है कि पुरानी फिल्मों ने माहौल भी खूब बनाया। इस साल एक या दो फिल्मों को दोबारा रिलीज नहीं किया गया, बल्कि ढेर सारी फिल्में हुई हैं। कुछ ने तो री-रिलीज के दौरान कमाई भी मूल रिलीज के वक्त से अधिक कर डाली। वहीं, कुछ को देखने के बाद दर्शक पुरानी यादों में डूब गए। आइए जानते हैं...
Year Ender 2024: इस साल नई से ज्यादा पुरानी फिल्मों ने बनाया माहौल, री-रिलीज के बाद भी खूब बटोरे दर्शक
Movies Re-Releases In 2024: साल 2024 में कई नई फिल्में रिलीज हुईं, लेकिन पुरानी फिल्मों ने उनसे ज्यादा माहौल बनाकर रखा। ऐसा क्यों हुआ? चलिए करते हैं पड़ताल
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क्यों पसंद आईं पुरानी फिल्में?
इस साल आर माधवन और दीया मिर्जा की फिल्म 'रहना है तेरे दिल में' से लेकर 'कल हो ना हो', 'वीर जारा; और 'खोसला का घोसला' जैसी कल्ट क्लासिक्स रिलीज हुईं। इनके अलावा रॉकस्टार, करण अर्जुन भी आईं। फिर 'लैला मजनू' और 'तुम्बाड' जैसी फिल्में भी लगीं, जिन्हें अपनी मूल रिलीज के वक्त बहुत अच्छी प्रतिक्रिया नहीं मिली थी, लेकिन दोबारा रिलीज हुईं तो जमकर कमाई की। इन्हें नए दर्शक मिले। यह चमत्कार कैसे हुआ कि नई फिल्मों के बीच भी पुरानी फिल्मों को दर्शक मिले? इसकी वजह हो सकती है कि हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में इस साल ज्यादातर बड़े सितारों की फिल्में फ्लॉप रहीं या बड़ी फिल्में रिलीज ही कम हुईं। ऐसे में पुरानी सुपरहिट फिल्मों को या फिर उन फिल्मों को जिन्हें बाद में ज्यादा पसंद किया गया, उन्हें री-रिलीज किया गया। बॉलीवुड में यह प्रयोग अब तक काफी सफल रहा। साथ ही, लोग पुराने जमाने का अनुभव प्राप्त करने के लिए भी इस तरह की फिल्में देखने पहुंचे।
'लैला मजनू' को मिला जबर्दस्त रेस्पॉन्स'
'लैला मजनू' जब पहली बार रिलीज हुई थी तो इसे ठंडी प्रतिक्रिया दर्शकों से मिली थी। लेकिन, इस साल जब इसे दोबारा रिलीज किया गया तो इसने सफलता की नई ऊंचाई छू डाली। इसमें तृप्ति डिमरी और अविनाश तिवारी ने मुख्य भूमिकाएं निभाईं। 2018 में आई इस फिल्म को इस साल जब दोबारा रिलीज किया गया तो इसने पांच करोड़ 80 लाख रुपये की धांसू कमाई की। इस फिल्म के निर्देशक साजिद अली ने एक बातचीत में कहा, 'फिल्म को दोबारा रिलीज करना हमारा निर्णय नहीं था। यह तो लोगों का ही एक बढ़ता हुआ वर्ग था, जिसके बारे में हमें बाद में समझ आया। वह दर्शक वर्ग फिल्म के बारे में बात कर रहे थे और उनमें से कई कह रहे थे कि काश वे इस फिल्म को सिनेमाघरों में देख पाते'।
अच्छा सिनेमा चलता ही है
साजिद अली के मुताबिक, 'लोगों की प्रतिक्रिया देखकर फिर मैंने पढ़ना और सुनना शुरू किया कि इस फिल्म की री-रिलीज की काफी मांग थी'। साजिद अली ने बताया कि श्रीनगर में इसे फिर से रिलीज करने पर जबर्दस्त प्रतिक्रिया मिली, जिसने इसे पीवीआर को देश में 50 और स्क्रीन पर रिलीज करने को मजबूर कर दिया और फिर देखते-देखते शुक्रवार की रात खत्म होने तक फिल्म 650 स्क्रीन पर थी'। साजिद अली का कहना है, 'हर फिल्म फास्ट फूड की तरह नहीं होगी। कुछ फिल्में लंबे समय तक चलेंगी और आपको अलग-अलग रूपों में पारिश्रमिक देंगी। हो सकता है कि कुछ लंबे समय तक चलें। कुछ फिल्में धीमी गति से चलने वाली होंगी, जिन्हें एक और मौका मिलेगा तो और बेहतर साबित होंगी।
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इस साल फिल्म 'तुम्बाड' को भी फिर से सिनेमाघरों में उतारा गया और इस बार फिल्म ने पहले से तीन गुना ज्यादा कमाई की। पहले यह फिल्म साल 2018 में रिलीज हुई थी। इसे लोगों से तारीफें तो खूब मिलीं लेकिन दर्शक बड़ी संख्या में इसे देखने नहीं आए। दोबारा रिलीज होने पर फिल्म को मिली अच्छी प्रतिक्रिया पर इसके अभिनेता और निर्माता ने कहा, 'मुझे लगता था कि यह फिल्म उन दर्शकों तक नहीं पहुंच पाई, जो इसके हकदार थे। इसलिए एक मजबूत मार्केटिंग पुश के साथ फिर से रिलीज किया और इसे मूल रिलीज की तरह ही माना। आखिर फिल्म ने मूल रिलीज से तीन गुना ज्याद कमाई की। बता दें कि यह फिल्म री-रिलीज हुई, तो इसने 30.4 करोड़ रुपये की शानदार कमाई की। सोहम शाह का कहना है, 'तुम्बाड की रि-रिलीज पर हुई कमाई ने मेरा यकीन बढ़ा दिया कि अच्छे सिनेमा में लोगों का विश्वास है। अच्छी फिल्में अपनी जगह तलाश लेती हैं, फिर चाहें वक्त क्यों न लगे'।
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