फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें

Tumbbad: दर-दर भटके अनुराग, नवाज ने शुरू कर दी थी तैयारी, तुम्बाड़ के निर्देशक ने साझा किया 15 साल का संघर्ष

Sun, 15 Sep 2024 08:31 AM IST
मोहम्मद फायक अंसारी एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला
एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला Published by: मोहम्मद फायक अंसारी Updated Sun, 15 Sep 2024 08:31 AM IST
विज्ञापन
Tumbbad director Rahi Anil Barve shared the painful struggle of 15 years of making the film on social media
तुम्बाड़, राही अनिल बर्वे - फोटो : इंस्टाग्राम- राही अनिल बर्वे

तुम्बाड़ को हाल ही में फिर से रिलीज किया गया है। इस फिल्म को दर्शकों का भरपूर प्यार मिल रहा है। इस फिल्म का निर्देशन राही अनिल बर्वे ने किया है। हाल ही में उन्होंने इस फिल्म के बनाने में लगे 15 साल के संघर्ष की कहानी लोगों के साथ साझा की है। उन्होंने इंस्टाग्राम पोस्ट के जरिए 2011 और 2012 की दो डायरी प्रविष्टियां साझा की हैं, जिसमें उन्होंने लगभग 4,000 शब्दों में तुम्बाड फिल्म को बनाने में आई चुनौतियों का विवरण साझा किया है।

Tumbbad director Rahi Anil Barve shared the painful struggle of 15 years of making the film on social media
राही अनिल बर्वे - फोटो : इंस्टाग्राम- राही अनिल बर्वे

निर्देशक ने पहली प्रविष्टि 25 अक्टूबर, 2011 की, जबकि दूसरी चार महीने बाद 2 फरवरी, 2012 की साझा की है। राही ने इसे लोगों के सामने रखने के पीछे की वजह भी बताई है। उनके मुताबिक युवा निर्देशकों को अपनी फिल्म बनाने में इससे मदद मिल सकेगी। डायरी की पहली प्रविष्टि राही के नारायण धरप की एक डरावनी कहानी सुनने से शुरू होती है, जो उन्हें उनके मित्र ने 1993 में नागजीरा के जंगल में डेरा डालने के दौरान सुनाई थी। फिल्म निर्माता ने कहा कि उन्हें ठीक से याद नहीं है कि इस पर फिल्म बनाने का उनका मिशन कब शुरू हुआ, लेकिन उनका पहला ड्राफ्ट-कम-स्टोरीबोर्ड 1996-97 के आसपास आया था।

Tumbbad director Rahi Anil Barve shared the painful struggle of 15 years of making the film on social media
राही अनिल बर्वे - फोटो : इंस्टाग्राम- राही अनिल बर्वे

उन्होंने लिखा, "मैंने 10वीं कक्षा में फेल होने के बाद पढ़ाई छोड़ दी और कई छोटी-मोटी नौकरियां कीं। धीरे-धीरे मैं 20 साल की उम्र तक पूरी तरह से स्थिर हो गया।" इस उम्र में राही ने 50,000 रुपये कमाना शुरू कर दिया और अपना खुद का एनीमेशन स्टूडियो शुरू करने के अपने सपने की ओर बढ़ने लगे। हालांकि, कमाने और सफल होने के बावजूद भी वह बेचैन महसूस करते थे। वह अपनी खुद की फिल्म बनाना चाहते थे। उन्होंने 2005 में अपनी उच्च वेतन वाली नौकरी से इस्तीफा दे दिया और मांझा नामक एक लघु फिल्म बनाई, जिसे उन्होंने दिसंबर 2006 में श्रेयस नाम के एक निर्माता के 60,000 रुपये के बजट पर निर्माण के आठ दिनों के भीतर फिल्माया । यह तब तुम्बाड़ बनाने के लिए एक बेहतरीन मौका था, लेकिन फिल्म महत्वाकांक्षा के बोझ तले दब रही थी, इस विजन का समर्थन करने वाला कोई निर्माता नहीं था।

विज्ञापन
विज्ञापन
Tumbbad director Rahi Anil Barve shared the painful struggle of 15 years of making the film on social media
राही अनिल बर्वे - फोटो : इंस्टाग्राम- राही अनिल बर्वे

उन्होंने आगे लिखा, "श्रेयस सर के तेज-तर्रार मैनेजर को यह मानना पड़ा कि छह रेकी और दो महीने की माथापच्ची के बाद तुम्बाड़ का बजट साढ़े तीन करोड़ से कम नहीं होगा। श्रेयस सर ने पैसों का इंतजाम करने के लिए काफी दौड़-धूप भी की। मैंने छह महीने के भीतर ही तुम्बाड़ के लिए खुद को तैयार कर लिया। बीस लोगों की हमारी मुख्य टीम ने 150 अन्य लोगों को शामिल किया और हर जगह काम किया। आखिरकार जुलाई 2008 तक हम इतने बुरे दौर से गुज़रे कि पहली बार इस फिल्म का ठप हो गया।  उन्होंने आगे लिखा, "मैं बहुत धैर्य के साथ गुस्साई टीमों का सामना कर रहा था। नवाजुद्दीन सिद्दीकी मूल रूप से विनायक के रूप में चुने गए थे, जो केवल मेरे कहने पर बिना एक पैसा लिए दो महीने की रिहर्सल में लगे थे। सासवड़ में हमारी शूटिंग से ठीक एक दिन पहले सारी कोशिशें बेकार हो गईं। उस दिन मेरे अविश्वसनीय आत्मविश्वास को छोड़कर सब कुछ खत्म हो गया था।"

विज्ञापन
Tumbbad director Rahi Anil Barve shared the painful struggle of 15 years of making the film on social media
राही अनिल बर्वे - फोटो : इंस्टाग्राम- राही अनिल बर्वे

यह वह समय था जब उन्होंने फिल्म निर्माता अनुराग कश्यप के बारे में सुना था, जो अपने अंतहीन संघर्षों के बावजूद अपने दम पर सफल होने के लिए काफी दृढ़ थे। उन्हें पता था कि उन्हें कश्यप से मदद मांगनी होगी, क्योंकि उनकी मदद करने वाला कोई और नहीं था। जब राही की लघु फिल्म उनके पास पहुंची, तो अनुराग ने कहा, "मेरे पास एक पैसा भी नहीं है, लेकिन मैं तुम्बाड़ का निर्माण करूंगा, बस यह तय करना है कि कैसे। राही ने याद किया कि कैसे वह फिर से स्टूडियो की तलाश में निकल पड़े थे। निर्देशक ने आगे लिखा, "दिन में दो बार 90 मिनट लंबे तुम्बाड़ की कहानी सुनाने से मेरा गला खराब हो गया था। स्टूडियो के अधिकारी इसे सुनते थे, लेकिन बाद में कहते थे कि दिलचस्प विषय है, लेकिन भारतीय दर्शकों के लिए यह फिल्म काम नहीं कर सकती। महीनों तक चली अंतहीन बैठकों के बाद सभी स्टूडियो तुम्बाड़ को मना कर रहे थे और कुछ प्रोडक्शन हाउस के लगभग साथ आने के बावजूद, तुम्बाड़ दूसरी बार एक बार फिर से रुक गई।

अगली फोटो गैलरी देखें
विज्ञापन
सबसे विश्वसनीय Hindi News वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें मनोरंजन समाचार से जुड़ी ब्रेकिंग अपडेट। मनोरंजन जगत की अन्य खबरें जैसे बॉलीवुड न्यूज़, लाइव टीवी न्यूज़, लेटेस्ट हॉलीवुड न्यूज़ और मूवी रिव्यु आदि से संबंधित ब्रेकिंग न्यूज़
 
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें अमर उजाला हिंदी न्यूज़ APP अपने मोबाइल पर।
Amar Ujala Android Hindi News APP Amar Ujala iOS Hindi News APP
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed