राज्यसभा में समाजवादी पार्टी की सांसद के तौर पर जया बच्चन के दिए गए बयानों को अब मुंबई में कांग्रेस नेता और अभिनेत्री उर्मिला मातोंडकर का भी समर्थन मिला है। उन्होंने कंगना रणौत पर निशाना साधते हुए कहा कि ड्रग्स को लेकर अगर उन्हें इतनी चिंता है तो उन्हें इसके विरोध में अपने गृह राज्य हिमाचल प्रदेश से अभियान शुरू करना चाहिए, जहां देश दुनिया के लोग सिर्फ इसी काम के लिए पहुंचते हैं।
उर्मिला मातोंडकर भी उतरीं मैदान में, बोलीं- 'मुंबई की बेटी हूं शहर के खिलाफ टिप्पणी बर्दाश्त नहीं'
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उर्मिला मातोंडकर ने बुधवार को एक मराठी टीवी न्यूज चैनल से बात करते हुए कहा कि पूरा देश इन दिनों ड्रग्स की परेशानी का सामना कर रहा है। उन्होंने कहा कि क्या उन्हें (कंगना को) पता है कि हिमाचल प्रदेश से ही ये सारे ड्रग्स निकलते हैं। उन्हें ये काम अपने राज्य से शुरू करना चाहिए। टैक्सदाताओं के पैसे से वाई सिक्योरिटी हासिल करने वाली इस महिला को अगर ड्रग्स का पता था तो उन्होंने इसके बारे में पुलिस को कभी कुछ क्यों नहीं बताया?
उर्मिला ने कहा कि कंगना ने ऐसी बातों के बारे में अरुचिपूर्ण टिप्पणियां की हैं, जो उनके दिल के काफी करीब हैं, ये हैं, मुंबई और बॉलीवुड। इसमें किसी को दो राय नहीं होनी चाहिए कि मुंबई सबका शहर है। जिसने भी इससे प्यार किया, उसने शहर को बदले में कुछ दिया है। ये उनका शहर है। इस शहर की बेटी होने के नाते मैं कभी इसके खिलाफ कोई टिप्पणी बर्दाश्त नहीं करूगीं। शहर के बारे में ऐसी टिप्पणियां सिर्फ शहर की ही नहीं बल्कि पूरे राज्य की बेइज्जती है।
लगातार हो रही बयानबाजी के बारे में उर्मिला ने कहा कि अगर कोई शख्स लगातार चिल्लाता रहता है तो इसका मतलब ये नहीं कि वह सच ही कह रहा है। कुछ हमेशा भिनभिनाते रहते हैं और विक्टिम कार्ड खेलते रहते हैं और जब ये भी फेल हो जाता है तो अपने महिला होने का फायदा लेने लगते हैं। जया बच्चन के लिए कंगना ने जो कुछ कहा, उसका विरोध करते हुए उर्मिला ने कहा कि एक संस्कारी परिवार का व्यक्ति कभी जया बच्चन जैसी महिला के लिए ऐसी बातें कभी नहीं करेगा। हालांकि, उर्मिला ने कंगना के दफ्तर में की गई तोड़फोड़ की कार्रवाई से सहमति नहीं जताई।
ये पूछे जाने पर कि इस पूरे मुद्दे पर हिंदी सिनेमा चुप क्यों है, उर्मिला ने कहा कि इन दिनों माहौल ही ऐसा बना दिया गया है। किसी को हिम्मत ही नहीं है कि वह कुछ कह सके। लोगों को लगता है कि अगर उन्होंने कुछ कह दिया तो उन्हें समस्या हो सकती है। अगर लोग लगातार डर में जीते रहते हैं तो वे सवाल करना बंद कर देते हैं। सुशांत सिंह राजपूत की आत्महत्या पर राजनीति के बारे में पूछे जाने पर उर्मिला ने सवाल किया कि ये सवाल तब क्यों नहीं उठे जब डॉ. पायल तडवी ने जातिवाद से तंग आकर आत्महत्या कर ली थी?