'ऐ मालिक तेरे बंदे हम'...क्या ‘दो आंखें बारह हाथ’ फिल्म का यह गाना आपको याद है। 1957 में आई शांताराम राजाराम वनकुद्रे यानी वी शांताराम द्वारा निर्देशित इस फिल्म के गाने को आज भी लोग सुनना और गाना पसंद करते हैं। वी शांताराम एक संपूर्ण फिल्मकार थे, जिन्हें सिनेमा जगत के 'पितामह' के नाम से जाना जाता था। निर्माता और निर्देशक वी शांताराम ने अपने साथ सिनेमा को भी आगे बढ़ाया और हमेशा अपने उसूलों और अनुशासन पर कायम रहे। अपने करियर में वी शांताराम ने 90 से ज्यादा फिल्मों को बनाया, जिसमें से 55 का निर्देशन उन्होंने किया था। 1985 में उन्हें भारत सरकार की तरफ से दिए जाने वाले सिनेमा के सबसे बड़े सम्मान दादासाहेब फाल्के पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया था। वहीं, आज वी शांताराम के जन्मदिवस के मौके पर हम आपको उनके जीवन से जुड़ी कुछ बातें बताने जा रहे हैं।
V. Shantaram: सिनेमा जगत के ‘पितामह’ कहलाते थे वी शांताराम, नई फिल्म रिलीज होने पर थिएटर से हटती थी पिछली मूवी
V. Shantaram: सिनेमा जगत के ‘पितामह’ कहलाते थे वी शांताराम, नई फिल्म रिलीज होने पर थिएटर से हटती थी पिछली मूवी
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वी शांताराम का जन्म 18 नवंबर 1901 को एक मराठी परिवार में हुआ था। वी शांताराम ने बेहद मामूली शिक्षा हासिल की थी और वह रेलवे में दिहाड़ी मजदूरी किया करते हैं। वहीं, कुछ अरसे के लिए उन्होंने गंधर्व नाटक कंपनी नामक एक मराठी थिएटर ग्रुप में कर्टेन पुलर (पर्दा उठाने गिराने वाले) का काम भी किया था। बचपन से ही उन्हें सिनेमा का शौक था और ऐसे में उन्होंने 16 साल की उम्र में एक टिन के नीचे चलने वाले सिनेमाघर में नौकरी करनी शुरू कर दी थी। इसके बाद 1920 में उन्होंने बतौर अभिनेता अपने करियर की शुरुआत की थी। उन्होंने महाराष्ट्र फिल्म कंपनी में लंबे अरसे तक फिल्ममेकिंग सीखी और फिर अपने बेटे प्रभात के नाम पर प्रभात फिल्म कंपनी बनाई। लेकिन अपने उसूलों के चलते उन्होंने इस कंपनी को छोड़ा और राजकमल स्टूडियो की स्थापना की।
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वी शांताराम ने गीत गाया पत्थरों से जिंतेद्र के साथ अपनी बेटी राजश्री को लॉन्च किया। यह फिल्म हिट हुई और जितेंद्र स्टार बन गए। इसके बाद वी शांताराम ने एक बार फिर जितेंद्र के साथ फिल्म 'बूंद जो बन गई मोती' में अपनी बेटी राजश्री को कास्ट किया। लेकिन पहले ही दिन राजश्री लेट हो गईं। वी शातांराम उसूलों के पक्के थे और ऐसे में उन्होंने अपनी बेटी को फिल्म से बाहर निकालकर मुमताज के साथ फिल्म करने का मन बना लिया। वी शांताराम के इस फैसले से जितेंद्र खुश नहीं थे और ऐसे में उन्होंने मुमताज के साथ काम करने के लिए मना कर दिया, लेकिन जितेंद्र जानते थे कि वह जब अपनी बेटी को फिल्म से निकाल सकते हैं तो इनके साथ भी कुछ हो सकता है। ऐसे में जितेंद्र मुमताज के साथ फिल्म करने के लिए मान गए और बाद में अभिनेत्री बहुत बड़ी स्टार बन गईं।
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