चर्चित निर्माता निर्देशक विनोद पांडे कैसे ब्रिटेन में अपनी सरकारी नौकरी छोड़ फिल्ममेकर बने, इसका दिलचस्प किस्सा उनके इस लंबे इंटरव्यू की पहली कड़ी में पिछले इतवार आप पढ़ चुके हैं। इंटरव्यू की दूसरी कड़ी में विनोद ने अपनी दूसरी फिल्म ‘स्टार’ और ट्रेंडसेटर फिल्म ‘ये नजदीकियां’ के किस्से सुनाए। अगर आप इस इंटरव्यू की पहली कड़ी पहले पढ़ना चाहते हैं तो यहां नीचे दिए लिंक पर क्लिक करें और इसे पढ़ चुके हैं तो चलते हैं उससे आगे...
Vinod Pande Long Interview 02: “शशि कपूर ने इसलिए शबाना आजमी के साथ काम करने से कर दिया था इनकार”
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विनोदजी, आपकी पहली फिल्म ‘एक बार फिर’ के चर्चे दुनिया जहान में होने के बाद बंबई फिल्म इंडस्ट्री में आपकी पूछ कितनी बढ़ी?
ये उन दिनों की बात है जब पॉप सिंगर बिद्दू बहुत बड़ा स्टार हो गया था। एक गाना उसका बहुत बड़ा हिट हो गया था, आप जैसा कोई मेरी जिंदगी में आए। फिर उसकी ‘डिस्को दीवाने’ एलबम आई थी, वह भी बहुत बड़ी हिट हो गई थी। बिद्दू फिल्म बनाना चाहता था और कुमार गौरव उसके जैसा दिखता था। सिर्फ यही एक कारण था जिसकी वजह से वह राजेन्द्र कुमार से मिलने गया। राजेन्द्र कुमार ने बिद्दू से पूछा कि निर्देशन किससे कराओगे तो बिद्दू को कोई आईडिया नहीं था। तब राजेंद्र कुमार ने कहा कि मेरे पास तुम्हारे लिए एकदम सही निर्देशक है। मेरे पास इंग्लैंड का एक निर्देशक है।
फिर गड़बड़ी कहा हुई? फिल्म ‘स्टार’ से तो सबको बहुत उम्मीदें थीं?
हमारे चाहने वाले उस फिल्म में कुछ गलत बंदों के हाथों ठगे गए। रति अग्निहोत्री गलत थीं। बंटी (कुमार गौरव) गलत थे और मैं भी गलत था। हम तीनों बहुत ही कामयाब फिल्मों के साथ आगे बढ़ रहे थे। बंटी की ‘लव स्टोरी’ बहुत बड़ी हिट थी। रति अग्निहोत्री की ‘एक दूजे के लिए’ ब्लॉकबस्टर थी। मेरी फिल्म के भी हर तरफ चर्चे थे। फिल्म ‘स्टार’ बनाने का आइडिया बिद्दू का था, और उसने ये आइडिया कभी खुलकर किसी को बताया नहीं। मैंने तो फिल्म करने से मना कर दिया था। लेकिन, उस समय साउंड में बड़ा नाम हुआ करता था अनिल सूद का। उन्होंने मुझे बहुत मनाया था इस फिल्म के लिए। लेकिन, दिक्कत वही थी। बिद्दू के अलावा किसी को पता नहीं होता था कि फिल्म का अगला सीन क्या होगा?
और, फिर इसके बाद आपने बनाई हिंदी सिनेमा की ट्रेंडसेटर फिल्म ‘ये नजदीकियां’ शबाना आजमी, परवीन बॉबी और मार्क जुबैर के साथ, शुरुआत शबाना से करते हैं?
'ये नजदीकियां' का मूल विचार मुझे शबाना ने ही दिया। उन्होंने मुझे एक बार स्टूडियो में बुलाया। वह शायद रंजीत स्टूडियो था। मेकअप रूम में उन्होंने मुझे एक फ्रेंच फिल्म का एक लाइन का नैरेशन दिया। मैंने शबाना से इतना ही कहा कि अब इसके ऊपर मैं अपनी पटकथा लिखूंगा और हम कभी अब इस फिल्म का जिक्र भी आपसी बातचीत में नहीं करेंगे। मैंने फिल्म देखी भी नहीं। उसके बाद मैं लंदन चला गया वापस। शबाना को पता चला तो उसे लगा कि अब लंदन जाकर भला क्यों कोई डायरेक्टर लौटेगा। उन्होंने उम्मीद छोड़ दी थी इस कहानी की। लेकिन, मैं कुछ महीनों बाद लौटा तो सीधे उन्हें जाकर एक मोटी सी फाइल थमा दी, जो फिल्म की स्क्रिप्ट थी। एक महीने बाद मुझे बुलावा आया। मैं गया तो बड़ी संजीदगी के साथ शबाना जी मुझे देखती हैं, और कहती हैं, 'मिस्टर पांडे मैं आपकी फिल्म एक ही शर्त पर करूंगी कि आपकी फिल्म के तीनों किरदार मैं ही करूंगी।’ इतनी पसंद आई उन्हें ये फिल्म।
फिर परवीन बाबी की कास्टिंग कैसे हुई?
परवीन बाबी की कहानी बहुत इंटरेस्टिंग है। उनको फिल्म के किरदार के लिए कास्ट करना आसान नहीं था। मुझे एक नया चेहरा चाहिए था। लेकिन कुछ हो ही नहीं पा रहा था। किस-किस से नहीं मिला मैं? किरण जुनेजा से मिला। वह हमारी दोस्त बन गई थी। हालांकि मैं उनको किरदार नहीं दे पाया। मेरा विचार किसी स्टार पर जाता ही नहीं था। हम कई दिन तक इस कास्टिंग पर विचार करते रहे। फिर हमने परवीन बाबी से मिलने का फैसला किया। मेरी एक खास लाइन होती थी उन दिनों किसी हीरोइन से बात करने की कि आपको मैं अपनी फिल्म में लेना तो चाहता हूं लेकिन आपकी मार्केट फीस देने के लिए मेरे पास पैसे नहीं हैं। लेकिन, परवीन ने कहानी सुनी और हां कर दी।