19 मार्च 1943 को लखनऊ में जन्मे गीतकार योगेश गौर ने आज (29 मई 2020) को अपनी आंखें हमेशा के लिए बंद कर ली हैं। योगेश के निधन पर सिनेमा के कई दिग्गज सितारे उन्हें सोशल मीडिया पर याद कर रहे हैं। क्या आप जानते हैं कि सिनेमा को कई बेहतरीन गीत देने वाले योगेश मुंबई गीतकार बनने का सपना लेकर नहीं बल्कि कोई साधारण काम की तलाश में आए थे? आइए आपको बताते हैं योगेश के लखनऊ से मुंबई के सफर के बारे में।
काम की तलाश में लखनऊ से मुंबई आए थे योगेश, इस फिल्म से शुरू किया था फिल्मी सफर
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योगेश का जन्म 19 मार्च 1943 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में हुआ था। वह जब बेरोजगार थे तब उन्होंने काम की तलाश में मुंबई आना ही उचित समझा। यहां उनके चचेरे भाई एक स्क्रीनप्ले निदेशक हुआ करते थे। उन्हीं के साथ योगेश ने भी काम करना शुरू कर दिया। लिखना शुरू करने के साथ ही योगेश ने कई बेहतरीन गीत लिखे जिन्हें सिनेमा के बेहतरीन गायकों ने अपनी आवाज दी।
योगेश सिर्फ गीतों तक ही सीमित नहीं थे। उन्होंने फिल्मों के अलावा कई टीवी धारावाहिकों की कहानी भी लिखी। योगेश के सिनेमा का सफर फिल्म रॉबिन से शुरू हुआ था। इस फिल्म के लिए योगेश ने छह गीत लिखे थे। वहीं योगेश के सुपरहिट गीतों की लिस्ट में 'कहीं दूर जब दिन ढल जाए', 'जिंदगी कैसी है पहेली', 'रिमझिम गिरे सावन', 'कई बार यूं ही देखा है', 'ना बोले तुम ना मैंने कुछ कहा' शुमार हैं।
इसके साथ ही योगेश के सुपरहिट गानों की लिस्ट में, बेवफा सनम, जीना यहां, एक रात, मिली, आनंद, छोटी सी बात, मंजिल, आनंद महल, बातों-बातों में, रजनीगंधा, आजा मेरी जान, मंजिलें और भी हैं, प्रियतमा, मजाक, दिल्लगी, अपने पराए, किराएदार, हनीमून, चोर और चांद, लाखों की बात जैसी फिल्मों के गीत शामिल हैं। गौरतलब है कि योगेश की आखिरी बड़ी रिलीज फिल्म किशन कुमार स्टारर बेवफा सनम थी।
गौरतलब है कि 60 और 70 के दशक में हिंदी संगीत की दुनिया के जाने-माने गीतकारों में से एक रहे योगेश गौड़ ने शुक्रवार की सुबह दुनिया को अलविदा कह दिया। योगेश का दाना मनोरंजन जगत के लिए बड़ी क्षति है। उनके निधन से उनके साथी कलाकार भी शोक में हैं।
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