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विद्या बालन के ये हैं 10 करिश्माई किरदार, नई सदी में अपने दम पर फिल्म हिट कराने वाली पहली अभिनेत्री
Wed, 01 Jan 2020 03:14 PM IST
भावना शर्मा
अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
Published by: भावना शर्मा
Updated Wed, 01 Jan 2020 03:14 PM IST
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Vidya Balan holi
- फोटो : social media
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क्रांतिकारी अभिनेत्री विद्या बालन को हिंदी सिनेमा में महिला प्रधान फिल्मों में अपनी भूमिकाओं के साथ महिलाओं के चित्रण में बदलाव लाने के लिए जाना जाता है। उन्होंने अपने अभिनय से न केवल दर्शकों का बल्कि फिल्म निर्माताओं का भी नजरिया बदला। उन्होंने समाज में बदलाव लाने वाली कहानी, पा, तुम्हारी सुलू जैसी कई फिल्मों में काम किया। अपनी अदाकारी के दम पर विद्या ने अब तक एक नेशनल अवार्ड और छह फिल्मफेयर अवार्ड जीते हैं। उनके जन्मदिन पर हम आपको उनके कुछ दमदार किरदारों के बारे में बताते हैं।
vidya balan
- फोटो : amar ujala
किरदार: ललिता
फिल्म: परिणीता (2005)
यह विद्या बालन की पहली हिंदी फिल्म है। इस फिल्म में ललिता और शेखर बचपन के दोस्त हैं। धीरे धीरे उनकी दोस्ती प्यार में बदल जाती है। दोनों शादी भी कर लेते हैं। ललिता एक ऐसी स्त्री है जो अपने पति शेखर (सैफ अली खान) से बहुत प्यार करती है। बाद में कुछ गलतफहमियों की वजह से दोनों अलग हो जाते हैं। शेखर उसे मारता है, पीटता है, जलील करता है लेकिन ललिता उससे प्यार करना नहीं छोड़ती। ललिता के जीवन में फिर गिरीश शर्मा (संजय दत्त) की एंट्री होती है, जो उसका पूरी तरह से सहयोग करता है। इसी फिल्म से विद्या ने समीक्षकों का ध्यान अपनी ओर आकर्षित कर लिया था। उन्हें खूब सराहना मिली थी। इस फिल्म के लिए उन्हें बेस्ट डेब्यू एक्टर का फिल्मफेयर अवार्ड मिला।
फिल्म: परिणीता (2005)
यह विद्या बालन की पहली हिंदी फिल्म है। इस फिल्म में ललिता और शेखर बचपन के दोस्त हैं। धीरे धीरे उनकी दोस्ती प्यार में बदल जाती है। दोनों शादी भी कर लेते हैं। ललिता एक ऐसी स्त्री है जो अपने पति शेखर (सैफ अली खान) से बहुत प्यार करती है। बाद में कुछ गलतफहमियों की वजह से दोनों अलग हो जाते हैं। शेखर उसे मारता है, पीटता है, जलील करता है लेकिन ललिता उससे प्यार करना नहीं छोड़ती। ललिता के जीवन में फिर गिरीश शर्मा (संजय दत्त) की एंट्री होती है, जो उसका पूरी तरह से सहयोग करता है। इसी फिल्म से विद्या ने समीक्षकों का ध्यान अपनी ओर आकर्षित कर लिया था। उन्हें खूब सराहना मिली थी। इस फिल्म के लिए उन्हें बेस्ट डेब्यू एक्टर का फिल्मफेयर अवार्ड मिला।
vidya balan
- फोटो : amar ujala
किरदार: जान्हवी
फिल्म: लगे रहो मुन्ना भाई (2006)
एक रेडियो जॉकी जान्हवी की भूमिका में विद्या इस फिल्म में मुंबई में ताजगी भरने का काम करती हैं। रेडियो पर सुबह के शो के साथ वह 'गुड मॉर्निंग मुंबई' बोलकर सबका दिन बना देती हैं। उनकी इस अदा पर मुंबई का भाई मुन्ना (संजय दत्त) फिदा हो जाता है और प्यार करने लगता है। मुन्ना आदमी बुरा नहीं था तो जान्हवी भी उससे प्यार करने लगती है। मुन्ना के काम करने के तरीके अलग थे तो जान्हवी उसको सही रास्ता दिखाने के लिए अपने रेडियो पर जगह देती है। जान्हवी की मदद से ही मुंबई मुन्ना की अच्छाइयों को समझ पाती है। विद्या का अभिनय इस फिल्म में बहुत चुस्ती-फुर्ती भरा है। ज्यादातर काम वह अपने मस्तमौला अंदाज में ही करना पसंद करती हैं। शायद यह उनके एक चुलबुले रेडियो जॉकी के किरदार की पहचान है।
फिल्म: लगे रहो मुन्ना भाई (2006)
एक रेडियो जॉकी जान्हवी की भूमिका में विद्या इस फिल्म में मुंबई में ताजगी भरने का काम करती हैं। रेडियो पर सुबह के शो के साथ वह 'गुड मॉर्निंग मुंबई' बोलकर सबका दिन बना देती हैं। उनकी इस अदा पर मुंबई का भाई मुन्ना (संजय दत्त) फिदा हो जाता है और प्यार करने लगता है। मुन्ना आदमी बुरा नहीं था तो जान्हवी भी उससे प्यार करने लगती है। मुन्ना के काम करने के तरीके अलग थे तो जान्हवी उसको सही रास्ता दिखाने के लिए अपने रेडियो पर जगह देती है। जान्हवी की मदद से ही मुंबई मुन्ना की अच्छाइयों को समझ पाती है। विद्या का अभिनय इस फिल्म में बहुत चुस्ती-फुर्ती भरा है। ज्यादातर काम वह अपने मस्तमौला अंदाज में ही करना पसंद करती हैं। शायद यह उनके एक चुलबुले रेडियो जॉकी के किरदार की पहचान है।
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vidya balan
- फोटो : amar ujala
किरदार: अवनी चतुर्वेदी / मंजुलिका
फिल्म: भूल भुलैया (2007)
इस सस्पेंस थ्रिलर फिल्म में विद्या ने मंजुलिका के किरदार में अपने अभिनय से दर्शकों को डरा ही दिया था। इस फिल्म में वह दोहरे किरदार में दिखती हैं और इन दोनों किरदारों को विद्या बालन ने बखूबी अंजाम दिया। चंद कहानियों को सुनकर उन कहानियों के किरदार को अपने अंदर महसूस करना और उन्हें दूसरों को भी महसूस करवाना विद्या के इस किरदार की खासियत है। एक किरदार हंसमुख और प्यारी अवनी चतुर्वेदी का है जो अपने पति सिद्धार्थ (शाइनी आहूजा) से बहुत प्यार करती है, और दूसरी तरफ मंजुलिका है जो अपने उसी पति को अपना सबसे बड़ा दुश्मन समझती है। मंजुलिका के किरदार को दर्शकों और समीक्षकों से खूब सराहना मिली थी। इसके लिए उन्हें सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री की श्रेणी में फिल्मफेयर अवार्ड के लिए नामित किया गया।
फिल्म: भूल भुलैया (2007)
इस सस्पेंस थ्रिलर फिल्म में विद्या ने मंजुलिका के किरदार में अपने अभिनय से दर्शकों को डरा ही दिया था। इस फिल्म में वह दोहरे किरदार में दिखती हैं और इन दोनों किरदारों को विद्या बालन ने बखूबी अंजाम दिया। चंद कहानियों को सुनकर उन कहानियों के किरदार को अपने अंदर महसूस करना और उन्हें दूसरों को भी महसूस करवाना विद्या के इस किरदार की खासियत है। एक किरदार हंसमुख और प्यारी अवनी चतुर्वेदी का है जो अपने पति सिद्धार्थ (शाइनी आहूजा) से बहुत प्यार करती है, और दूसरी तरफ मंजुलिका है जो अपने उसी पति को अपना सबसे बड़ा दुश्मन समझती है। मंजुलिका के किरदार को दर्शकों और समीक्षकों से खूब सराहना मिली थी। इसके लिए उन्हें सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री की श्रेणी में फिल्मफेयर अवार्ड के लिए नामित किया गया।
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vidya balan
- फोटो : amar ujala
किरदार: विद्या
फिल्म: पा (2009)
इस फिल्म में विद्या का किरदार बहुत साहसी और समाज को मात देने वाला है। उसे अपनी पढ़ाई पूरी करनी है, अपने सपने पूरे करने है, डॉक्टर बनना है। लेकिन अमोल (अभिषेक बच्चन) के संपर्क में आने से वह गर्भवती हो जाती है। उसकी शादी नहीं हुई है, फिर भी वह समाज में झेलने वाली प्रताड़ना को ताक पर रखकर अपने बच्चे को जन्म देती है। एक बिनब्याही मां के लिए सिर उठाकर चलना भारत में तो बिल्कुल आसान नहीं है। वह अपनी पढ़ाई जारी रखती है और डॉक्टर भी बनती है। उसका बेटा ऑरो (अमिताभ बच्चन) एक अजीब बीमारी से ग्रसित होता है। वह उसकी देखभाल भी करती है। विद्या का ये किरदार बहुत चुनौतीपूर्ण था। इसके लिए विद्या बालन को सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री के फिल्मफेयर पुरस्कार से सम्मानित किया गया।
फिल्म: पा (2009)
इस फिल्म में विद्या का किरदार बहुत साहसी और समाज को मात देने वाला है। उसे अपनी पढ़ाई पूरी करनी है, अपने सपने पूरे करने है, डॉक्टर बनना है। लेकिन अमोल (अभिषेक बच्चन) के संपर्क में आने से वह गर्भवती हो जाती है। उसकी शादी नहीं हुई है, फिर भी वह समाज में झेलने वाली प्रताड़ना को ताक पर रखकर अपने बच्चे को जन्म देती है। एक बिनब्याही मां के लिए सिर उठाकर चलना भारत में तो बिल्कुल आसान नहीं है। वह अपनी पढ़ाई जारी रखती है और डॉक्टर भी बनती है। उसका बेटा ऑरो (अमिताभ बच्चन) एक अजीब बीमारी से ग्रसित होता है। वह उसकी देखभाल भी करती है। विद्या का ये किरदार बहुत चुनौतीपूर्ण था। इसके लिए विद्या बालन को सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री के फिल्मफेयर पुरस्कार से सम्मानित किया गया।