विश्व फोटोग्राफी दिवस पर सोनी बीबीसी अर्थ के प्रतिष्ठित भारतीय वाइल्डलाइफ फोटोग्राफर्स से अमर उजाला ने बातचीत की और उनसे हासिल कीं कुछ बेहतरीन तस्वीरें, जो उनके कैमरे के जरिए प्रकृति की सबसे रहस्यमयी कहानियां बयां करतीं हैं। इसकी दूसरी कड़ी में बात अमोघवर्षा जे एस और सुधीर शिवराम से। अमोघवर्षा जे एस और सुधीर शिवराम दोनों बेंगलुरू से हैं और देश के प्रतिष्ठित वाइल्ड लाइफ फोटोग्राफर्स में उनकी गिनती होती है।
विश्व फोटोग्राफी दिवस 2020: अमोघवर्षा और सुधीर से सुनिए दिलचस्प किस्से और देखिए उनकी रोचक तस्वीरें
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अमोघवर्षा, आप बताएं कि आपका ‘सबसे बेहतरीन फोटोग्राफी क्षण’ और उसके पीछे की कहानी क्या है?
प्रकृति में ऐसे कई क्षण होते हैं जहां अचानक चमत्कार होता है। ऐसी ही एक घटना उत्तरी कैलिफॉर्निया में हुई, जब मैं प्वॉइंट रेयेज नेशनल पार्क में सूर्यास्त देखने के लिए गया था। अचानक कैलिफोर्निया ट्यूल इल्क्स (एक प्रकार के बारहसिंगे की प्रजाति) का एक झुंड सामने आ गया। और उनमें से एक समुद्र के किनारे टीले पर चलने लगा। इस प्रकार समुद्र, आकाश और सूर्यास्त, सभी केवल नारंगी रंग के इस अकेले इल्क की छाया-आकृति के साथ। मेरे लिए आज भी यह सबसे खास तस्वीर है, जब प्रकृति का आश्चर्य आपके सामने अचानक प्रकट हो जाता है।
आपकी यात्रा के दौरान, क्या कभी ऐसा अनुभव आया कि आपकी जान खतरे में पड़ गई हो या जंगली जानवरों की शूटिंग करते वक्त एक ‘परफेक्ट शॉट' हासिल करने के लिए आपको किसी चुनौती का सामना करना पड़ा?
निश्चित रुप से कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा, लेकिन अब तक जान को खतरे वाली कोई चुनौती नहीं थी। एक दशक से ज्यादा समय पहले मैं पश्चिमी घाटों में ब्लू आईड बुश फ्रॉग यानी नीली आंखों वाले मेंढक की प्रजाति की तस्वीर लेना चाहता था। उस समय इस मेंढक के बारे में काफी कम जानकारी उपलब्ध थी। ये मेंढक केवल मानसून के दौरान वर्षा वनों में पाए जाते हैं वो भी रात में।
हम लोग हर रात घने वर्षा वनों में भारी मात्रा में मौजूद जोंक के बीच मूसलाधार बारिश में पैदल चल कर इसके टर्राने की आवाज का पीछा करते। हमें इसे ढूंढ़ने में और इसकी तस्वीरें लेने में पूरा एक सप्ताह लग गया। मेरे शुरुआती दिनों में निश्चित रूप से यह बेहद मुश्किल फोटोग्राफी शॉट में से एक था और इसने मुझे वाइल्ड लाइफ फोटोग्राफी के बारे में काफी कुछ सिखाया, खास तौर पर जब आप एक दुर्लभ विषय पर काम कर रहे हों।
सुधीर शिवराम क्या आप अपने ‘सबसे बेहतरीन फोटोग्राफी क्षण’ और उसके पीछे की कहानी के बारे में कुछ बता सकते हैं?
एक क्षण जिसे मैं हमेशा याद रखूंगा, वह है जंगल में मेरे द्वारा देखा गया बाघ का पहला दृश्य। मैं 1996 से वाइल्ड लाइफ फोटोग्राफी में हूं और 10 सालों में मैंने जंगल में बाघ को कभी नहीं देखा। भले ही मैं दक्षिण भारत के जंगलों में करीब करीब हर महीने और हर दूसरे सप्ताह के अंत में जाता हूं लेकिन फिर भी बाघ मेरी पहुंच से दूर ही रहे। बेशक, मैं पक्षियों की फोटोग्राफी करता था और कभी भी जगलों में बाघ की खोज में नहीं गया। उस वक्त की महंगी फ्लाइट्स और सीमित कनेक्टिविटी के कारण मैं कभी कर्नाटक राज्य के बाहर जंगलों में नहीं गया।
फिर आपके जीवन का वह अनमोल क्षण कब आया?
अक्टूबर 2006 में मैं वन्यजीव अभयारण्य में गया, उस समय मुझे पहली बार बाघ के दृश्य देखने और उसकी फोटोग्राफी करने का मौका मिला। उस वक्त एक चीतल का दिखना भी काफी मुश्किल था क्योंकि गांव वासियों को जंगलों के भीतर मुख्य भाग से निकालकर नई जगह बसाया जा रहा था और काफी कुछ गडबड़ियां चल रही थीं। सुबह की सफारी के दौरान मैंने दूर कुछ भारतीय गौर (बाइसन) को सड़क पार करते हुए देखा और ड्राइवर को जीप रोकने के लिए कहा। मैं अपने लंबे टेलीलेंस के साथ फोटो लेने लगा, जो 500 एमएम+ 1.4X कन्वर्टर वाला था। संकरे विजन के कारण मैं केवल गौर पर ध्यान केंद्रित कर शूट कर पा रहा था। ड्राइवर ने मेरे लेंस की दिशा देखी और पूछा मैं क्या शूट कर रहा हूं। मैंने कहा गौर का झुंड। उसने मुझे गौर को भूलकर हमारे सामने सफारी ट्रैक पर बैठे दो बाघों को शूट करने के लिए कहा। मैं पूरी तरह बाघों के दृश्य को मिस कर रहा था। यह एक ऐसा दृश्य था जिसें मैं कभी भूल नहीं सकता। वाइल्ड लाइफ से जुड़ा वो मेरा अब तक का सबसे बेहतरीन क्षण रहा है।