आठ जून को प्रकाशित फिल्म ‘मिस्टर नटवरलाल’ के बाइस्कोप में इसके निर्देशक राकेश कुमार की फिल्म ‘याराना’ का भी जिक्र आया था और तब मैंने वादा किया था कि फिल्म ‘याराना’ की मेकिंग के किस्से भी मौका आने पर मैं बताऊंगा। याराना ने 23 अक्तूबर 2020 को अपनी रिलीज के 39 साल पूरे किए। यह बाइस्कोप फिल्म ‘याराना’ पर ही है। ये फिल्म हिंदी सिनेमा में फिल्म मेकिंग का एक ऐसा प्रयोग है जिसे दोहराने की हिम्मत इसके बाद से आज तक कोई नहीं कर पाया। ये वह समय था जब अमिताभ बच्चन अपने नाम के मुताबिक शोहरत के आसमान पर सूरज की तरह चमक रहे थे। उनके दफ्तर में निर्माताओं की लाइन लगी रहती थी किसी तरह उनको अपनी फिल्म में ले लेने के लिए। अमिताभ बच्चन के सुपरस्टार बनने का सफरनामा उनके तकरीबन हर चाहने वाले को पता है, ये भी पता है कि इस सफर में उनके कई दोस्तों को उनसे तमाम शिकायतें भी रही हैं। वैसे, कामयाबी की तरफ बढ़ते इंसान के अगर दुश्मन न हुए तो भला क्या खाक तरक्की की है उसने! लेकिन, अमिताभ बच्चन की दरियादिली के किस्से भी बहुत सारे हैं। इनमें से एक किस्सा फिल्म ‘याराना’ का भी है।
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ठुकरा दिया निर्देशन का पहला ऑफर
फिल्म ‘मिस्टर नटवरलाल’ के बाइस्कोप में मैंने आपको बताया था कि कैसे निर्माता निर्देशक प्रकाश मेहरा ने अपने सहायक निर्देशक राकेश कुमार को मौका दिया फिल्म ‘खून पसीना’ में निर्देशक बनने का। राकेश ने अमिताभ बच्चन के साथ इसके अलावा ‘मिस्टर नटवरलाल’, ‘दो और दो पांच’ और ‘याराना’ जैसी चर्चित फिल्में बनाईं। राकेश कुमार का फिल्मी करियर के बी लाल और चांद श्रीवास्तव जैसे निर्देशकों के सहायक के रूप में शुरू हुआ। चांद श्रीवास्तव अपने जमाने के बी और सी ग्रेड फिल्मों के बड़े निर्देशक हुआ करते थे। इसी दौरान बोहरा ब्रदर्स ने राकेश कुमार को एक फिल्म ऑफर कर दी, जिसका निर्देशन करने को उनसे कहा गया। राकेश ने यहां जो समझदारी दिखाई, वही उनके करियर का टर्निंग प्वाइंट बनने में आगे चलकर मददगार हुई। बोहरा ब्रदर्स का ऑफर कोई दूसरा असिस्टेंट होता तो लपककर स्वीकार कर लेता लेकिन, राकेश ने अपने उस्ताद के साथ ये बात साझा की तो चांद श्रीवास्तव ने भी अपने शागिर्द को सौ टके की सलाह मुफ्त में दे डाली। उन्होंने राकेश को समझाया कि अगर अभी वह निर्देशक बन गए तो जीवन भर इन स्टंट फिल्मों के ही निर्देशक बने रह जाएंगे। राकेश को सलाह भा गई। उन्होंने चांद श्रीवास्तव की ये सलाह भी मान ली कि फिल्म निर्देशन में उतरने के लिए उन्हें थोड़ा इंतजार और करना चाहिए।
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प्रकाश मेहरा के शागिर्द के कारनामे
ये उन दिनों की बात है जब हिंदी सिनेमा में बिजनौर, उत्तर प्रदेश से पहुंचे 29 साल के एक लड़के ने हंगामा मचा रखा था। इसकी पहली ही फिल्म थी शशि कपूर, अमीता और जॉनी वॉकर के साथ बनी ‘हसीना मान जाएगी’। दूसरी फिल्म संजय खान और मुमताज के साथ ‘मेला’ भी सुपरहिट रही और तीसरी फिल्म ‘समाधि’ में धर्मेंद्र, आशा पारेख और जया भादुड़ी को लेकर प्रकाश मेहरा नाम के इस युवा निर्देशक ने कामयाबी की हैट्रिक बना दी। ‘समाधि’ के बाद प्रकाश मेहरा ने सुनील दत्त और राखी को लेकर जो फिल्म ‘आन बान’ बनाई, उसमें राकेश कुमार का काम बतौर सहायक चर्चा में आया। बाद में राकेश ने प्रकाश मेहरा की तमाम फिल्मों में उनके सहायक निर्देशक के तौर पर काम किया और यश चोपड़ा से पहले प्रकाश मेहरा ही ऐसे निर्देशक रहे जिन्होंने अपने तमाम सहायकों को स्वतंत्र फिल्म निर्देशक बनने में उनकी पूरी मदद की। राकेश कुमार की दोस्ती इसी दौरान अमिताभ बच्चन से काफी अच्छी हो गई। ‘याराना’ से पहले दोनों तीन फिल्में साथ में कर चुके थे और जब ‘याराना’ बनाने के लिए इसके निर्माता एम ए नाडियाडवाला ने उनसे संपर्क किया तो राकेश के जहन में पहला नाम अमिताभ बच्चन का ही आया। अमिताभ बच्चन की तब तक ‘शोले’ समेत तमाम फिल्मों में अमजद खान बहुत ही क्रूर और खूंखार विलेन का रोल कर चुके थे। राकेश कुमार ने ‘याराना’ में अमजद खान को पहली बार एक दोस्त के रूप में और भले इंसान के रूप में पेश करने का फैसला किया। बाद में अमिताभ बच्चन और अमजद खान के रिश्ते भले खराब हो गए हों, लेकिन इस फिल्म का आइडिया अमिताभ बच्चन को तब बहुत पसंद आया था। पर अमिताभ बच्चन चाहकर भी इस फिल्म के लिए राकेश कुमार को तारीखें नहीं दे सकते थे।
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अमिताभ की तारीखों का ऐसे लगा जुगाड़
फिल्म ‘याराना’ की राइटिंग टीम अपना काम शुरू कर चुकी थी। राजेश खन्ना की फिल्म ‘आविष्कार’ से शुरू करके अनिल कपूर की फिल्म ‘बेटा’ तक करीब 20 फिल्में लिखने वाले राइटर ज्ञानदेव अग्निहोत्री ने फिल्म ‘याराना’ की कहानी लिखी। अभिनेता अपूर्व अग्निहोत्री इनके ही बेटे हैं। राकेश कुमार की बतौर निर्देशक पहली फिल्म ‘खून पसीना’ में उनके मुख्य सहायक रहे विजय कौल तब तक प्रकाश मेहरा की हिट फिल्मों ‘हेराफेरी’ और ‘मुकद्दर का सिकंदर’ की पटकथा लिख चुके थे। राकेश ने अपने इस दोस्त को फिल्म ‘याराना’ में फिर साथ लिया। सबने मिलकर एक ठीक ठाक सी कहानी और पटकथा लिख ली। कादर खान भी तब तक अमिताभ बच्चन को अमित कहकर ही बुलाते थे और अमिताभ बच्चन की फिल्मों में संवाद लेखक के तौर पर नियमित काम करते रहते थे। फिल्म ‘याराना’ में एक खास किरदार निभाने के साथ साथ कादर खान ने ‘याराना’ के संवाद भी लिखे। अब जब कहानी वगैरह सब तैयार हो गई और हीरोइन के तौर पर नीतू सिंह भी आ गईं तो मामला अमिताभ बच्चन की तारीखों पर अटक गया। राकेश कुमार की अमिताभ बच्चन से दोस्ती इतनी गहरी थी कि वह उनकी तमाम निजी चीजें भी देख लिया करते थे। ऐसे में ही एक दिन राकेश कुमार उनके दफ्तर में बैठे बैठे डेट डायरी देखने लगे। उन्होंने नोट किया अमिताभ शिफ्ट में काम कर रहे हैं और लगातार काम कर रहे हैं। फिल्मों की शूटिंग की पहली शिफ्ट तब भी और अब भी हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में सुबह सात बजे शुरू होती है। तो राकेश कुमार ने अमिताभ से रिक्वेस्ट की कि अगर वह अपनी फिल्मों की शूटिंग के लिए तैयार होकर निकलने के बाद अपनी लोकेशन पर पहुंचने से पहले एक एक घंटा भी रोज उनको देते रहें तो वह फिल्म बना सकते हैं। बीच में जो ब्रेक अमिताभ को मिलते थे, उनका इस्तेमाल भी फिल्म याराना को बनाने में किया गया। तारीखों के बीच तारीख निकालने का ये प्रयोग हिंदी सिनेमा में अपनी तरह का बिरले काम है।
ऋषि कपूर को यादकर रो पड़ीं नीतू सिंह
फिल्म ‘याराना’ की हीरोइन नीतू सिंह का किस्सा भी इस फिल्म का कम अजीब नहीं है। फिल्म ‘याराना’ का मुहूर्त एक जुलाई 1977 को हुआ और फिल्म रिलीज हुई 23 अक्तूबर 1981 को। ये उन दिनों की बात है जब ऋषि कपूर और नीतू सिंह का रोमांस अपनी बुलंदियों पर था और दोनों खुल्लम खुल्ला प्यार भी कर रहे थे। फिल्म ‘याराना’ की शूटिंग के दौरान नीतू सिंह को फिल्म के एक गाने की शूटिंग के लिए कलकत्ता (अब कोलकाता) जाना पड़ा। वहां के नेताजी सुभाष इंडोर स्टेडियम में फिल्म के गाने की शूटिंग थी और नीतू सिंह को ऋषि कपूर की बहुत याद आ रही थी। फोन मिल नहीं रहा था और उनका काम में मन नहीं लग रहा था। अमिताभ बच्चन ने ये देखा तो उन्होंने नीतू के रोने की वजह पूछी और मामला पता चलने पर उन्होंने तुरंत नीतू को अगली ही फ्लाइट से बंबई (अब मुंबई) भेजने का इंतजाम कर दिया और कहा कि वह बिना हीरोइन के ही ये गाना मैनेज कर लेंगे। लेकिन, ये तो कुछ भी नहीं। अमिताभ बच्चन और नीतू सिंह को कलकत्ता में देखने जुटी हजारों की भीड़ ने इनके साथ क्या किया, ये जानने से पहले देख लेते हैं, फिल्म ‘याराना’ का ये बेहतरीन गाना..., आवाज किशोर कुमार की। गीत अनजान का और संगीत दिया है राजेश रोशन ने।