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A Suitable Boy Review: ध्रुवीकरण के बीच पर्दों के पीछे पनपते रिश्तों की बेबाक कहानी, इतने मिले स्टार

Fri, 23 Oct 2020 01:09 PM IST
Pankaj Shukla पंकज शुक्ल
Updated Fri, 23 Oct 2020 01:09 PM IST
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A Suitable Boy Review by Pankaj Shukla ishaan khatter Tabu Tanya Maniktala Mira Nair Netflix India
ए सूटेबल ब्वॉय - फोटो : अमर उजाला

Web Series Review: ए सूटेबल ब्वॉय


कलाकार: ईशान खट्टर, तब्बू, तान्या मानिकताला, माहिरा कक्कड़, रसिका दुग्गल, विजय वर्मा, दानिश रजवी, नमित दास, राम कपूर, रणदीप हुड्डा आदि।
निर्देशक: मीरा नायर
ओटीटी: नेटफ्लिक्स
रेटिंग: ***1/2


मीरा नायर से कुछ दिन पहले बात हुई तो उन्होंने ही बताया था कि विक्रम सेठ के उपन्यास ‘ए सूटेबल ब्वॉय’ पर सीरीज बनने के दौरान वह बीच में न कूदतीं तो ये किसी ‘गोरे’ के निर्देशन में बन रही होती। उपन्यास पर छह एपिसोड की वेब सीरीज लिखी भी ‘गोरे’ ने ही है। एंड्रयू डैविएस इसके पहले चर्चित उपन्यासों ‘वार एंड पीस’ और ‘लेस मिसरेबल्स’ पर पटकथाएं लिख चुके हैं, यहां भी उनका लेखन वैसा ही है। वेब सीरीज ‘ए सूटेबल ब्वॉय’ इतिहास का दस्तावेज तो नहीं है लेकिन नया संविधान लागू होने के ठीक बाद के समय में एक मस्जिद के सामने किसी धन्नासेठ का सिर्फ इसलिए मंदिर बनवा देना कि नमाज के वक्त वो काबा की तरफ रुख करें तो उन्हें सामने शिवलिंग नजर आए, इस सीरीज की अंतर्धारा है।

A Suitable Boy Review by Pankaj Shukla ishaan khatter Tabu Tanya Maniktala Mira Nair Netflix India
ए सूटेबल ब्वॉय - फोटो : अमर उजाला, मुंबई

ये सीरीज देखते समय ये ध्यान रखना चाहिए कि विक्रम सेठ का उपन्यास ‘ए सूटेबल ब्वॉय’ 1993 में रिलीज हुआ और बात ये आजादी के ठीक बाद के समय की करता है। वैसे ही जैसे भीष्म साहनी ने अपना उपन्यास ‘तमस’ सन् 70 के आसपास लिखा और बात ये बंटवारे के वक्त की करता है। गोविंद निहलानी की टीवी सीरीज पांच घंटे की है, मीरा नायर की सीरीज छह घंटे की है। दोनों सीरीज में तुलना न भी की जाए तो एक उपन्यास को पर्दे पर चलते फिरती सूरतों के साथ बनाने की चुनौतियां दोनों में एक जैसी हैं। मीरा नायर को पहले से लिखी एक पटकथा पर सीरीज बनानी थी, उन्होंने अपना पूरा दम खम लगाकर ये बनाई भी। सीरीज देखते समय ध्यान ये रखना है कि ये सीरीज मूलत: अंग्रेजी में बनी है। हिंदी में इसे बाद में डब किया गया है और लगता ये भी है कि सबटाइटल्स लिखने वाले को उर्दू की शेरो शायरी समझ नहीं आती।

A Suitable Boy Review by Pankaj Shukla ishaan khatter Tabu Tanya Maniktala Mira Nair Netflix India
ए सूटेबल ब्वॉय - फोटो : अमर उजाला, मुंबई

तो बिस्मिल्लाह करते हैं कहानी का जिसमें चार परिवारों की चारपाई पॉलिटिक्स साथ साथ चल रही है। शहर में तनाव है। सरकार के मंत्री आपस में एक दूसरे की सुन नहीं रहे। पाकिस्तान बना तो मुसलमानों को वहां ही जाना चाहिए, कहने वाले मंत्री हिंदू राष्ट्र की मांग कर रहे हैं। धर्म की राजनीति के तनाव से खिंचे इस कैनवास पर दो जवां दिल अपने होने का मकसद जिंदगी के रंगों संग चलती कूंची में तलाश रहे हैं। सुरमई आंखों वाले मान को सईदा से नाम मिलता है दाग साब का। और, दाग साब की ये सईदा इतने हिस्सों में बंटी है जितने में कि इस देश को बांटने की कोशिशें शुरू से चलती रही हैं। दूसरी जवानी की कहानी लता की है। उसकी मां उसकी शादी के लिए परेशान है। इस देश में एक लड़की के जीवन की सारी सार्थकता शादी कर लेने में ही क्यों रही है, इस यक्ष प्रश्न का सवाल शायद ही किसी को अब भी मिल पाया हो। उसे एक ‘सूटेबल ब्वॉय’ तलाशना है। इस तलाश में उसे कबीर दुर्रानी मिलता है, लेकिन वह मुसलमान है तो घर वाले इसकी इजाजत नहीं देते। फिर हरेश खन्ना मिलता है जो फर्स्ट डेट पर उसे अपनी टैनरी में लेकर जाता है। और तीसरा है अमित चटर्जी।

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A Suitable Boy Review by Pankaj Shukla ishaan khatter Tabu Tanya Maniktala Mira Nair Netflix India
ए सूटेबल ब्वॉय - फोटो : अमर उजाला, मुंबई

वेब सीरीज ‘ए सूटेबल ब्वॉय’ के छह एपीसोड में कोई सौ से ऊपर किरदार आपको देखने को मिलेंगे। मीरा नायर ने नए पुराने चेहरों की यहां पूरी कतार खड़ी कर दी है। मेहरा, कपूर, चटर्जी और खान परिवारों के ये किरदार कभी भी कहीं से कहानी में आ जुड़ते हैं। किसी को किसी के साथ सिर्फ हमबिस्तर होने का रोल मिला है तो कोई कुछ ज्यादा करने की कोशिश भी करता है तो सीरीज की पटकथा और इसका विस्तार इसकी इजाजत नहीं देता। बतौर निर्देशक मीरा नायर ने भारत की एक ऐसी झांकी पर्दे पर पेश की है जिसे वह पहले भी अपनी फिल्मों ‘कामसूत्र’ और ‘नेमसेक’ आदि में दिखाती रही हैं। ये वह भारत है जिसे विदेशी देखना चाहते हैं। पुरानी हवेलियां, डिजाइनर कपड़े, पर्दे के पीछे पनपते जिस्मानी रिश्ते, घर में चलने वाली कूटनीतियां वगैरह वगैरह। अपने इस उद्देश्य में मीरा नायर कामयाब भी हैं।

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ए सूटेबल ब्वॉय - फोटो : अमर उजाला, मुंबई

अभिनय के लिहाज से ‘ए सूटेबल ब्वॉय’ तीन कलाकारों के करियरनामे का हीरा है। पहली तब्बू, जिन्हें सईदा के किरदार में देखने के बाद किसी दूसरे कलाकार का नाम यहां सोच पाना मुश्किल है। एक उम्रदराज तवायफ के किरदार में तब्बू ने अपने से आधी उम्र के लड़के संग रूहानी और जिस्मानी रिश्ते बनाए हैं। उनका अभिनय उनकी आंखों से बोलता है और आंखों से ही सब कुछ कह जाने के मामले में दाद के लायक काम किया है ईशान खट्टर ने। मीरा नायर का ये मान सिनेमा के शौकीनों को बरसों तक याद रहने वाला है। मान की कहानी में नवाब के बेटे से उसकी दोस्ती को समलैंगिक इशारा देने की कोशिश भी पटकथा लेखक ने की है, लेकिन इसका विस्तार बाद में गायब मिला। तान्या मानिकताला ने लता के रूप में सीरीज को एक अलग तेवर और साथ ही साथ एक जरूरी सौम्यता भी प्रदान की है। उनका किरदार स्त्री विमर्श का अपने आप में एक दुरूह विषय है। और, इस जटिल चरित्र को तान्या जिस सहजता से पर्दे पर जी जाती हैं, उसके लिए वह ओटीटी सीरीज के कलाकारों को मिलने वाले इनाम की हकदार हैं।

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