हिंदी सिनेमा में यशराज फिल्म्स को सबसे बड़ा प्रोडक्शन हाउस माना जाता है। जैसे लक्स साबुन हर दौर के सबसे बड़े सितारों के साथ अपना नाम जोड़कर ही चैन लेता है, वैसे ही ये सितारे भी जब तक यशराज फिल्म्स की एक फिल्म न कर लें, उन्हें लगता ही नहीं कि वह बड़े सितारे बने भी हैं। सिनेमा में अव्वल नंबर का ठप्पा पक्का वाला उसी की पीठ पर लगता है, जिसकी पीठ यशराज फिल्म्स की किसी फिल्म में पब्लिक ने ठोकी है। वक्त के साथ बदलती पब्लिक की पल्स समझने वाले इस सिनेमाघर के 50 साल पूरे होने के जश्न की शुरूआत हो रही है। तो चलिए आपको ले चलते हैं इस कंपनी की पहली फिल्म की तरफ और सुनाते हैं इसके बनने की कहानी। साथ में तीन और फिल्में सिलसिला, काला पत्थर और चांदनी के किस्से बोनस में हैं।
Yash Chopra Birthday: ऐसे पड़ी देश के सबसे बड़े प्रोडक्शन हाउस YRF की नींव, समझिए बुनावट डीएनए की
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यशराज फिल्म्स की पहली फिल्म
बात सन 1970 की है कि बंबई के हर दूसरे प्रोडक्शन हाउस में एक ही बात की चर्चा चलती रहती थी और वो ये कि बलदेव राज चोपड़ा यानी बी आर चोपड़ा के छोटे भाई ने अपनी अलग फिल्म कंपनी खोल ली है। यशराज चोपड़ा को अपनी नई कंपनी खोलने का ख्याल भी आया तो राजेश खन्ना की वजह से ही। आखिरकार, राजेश खन्ना का करियर डूबने से यश चोपड़ा ने ही तो बचाया था। यश चोपड़ा तब बीआर फिल्म्स के लिए काम किया करते थे और राजेश खन्ना की शुरू की पांचों फिल्में फ्लॉप हो चुकी थीं। यश चोपड़ा उन दिनों फिल्म ‘आदमी और इंसान’ की शूटिंग कर रहे थे जब सायरा बानो के बीमार पड़ते ही शूटिंग रुक गई। सायरा बानो ठीक होकर लौटीं कोई महीने भर बाद और इस बीच सिर्फ 28 दिन के शूट में यश चोपड़ा ने बना डाली फिल्म ‘इत्तेफाक’ जो राजेश खन्ना के करियर की पहली हिट फिल्म बनी।
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अमिताभ और यश चोपड़ा का ‘सिलसिला’
बात दोस्ती की ही चल रही है तो लगे हाथ इसी एहसास का दूसरा पहलू भी समझ ही लेते हैं और फिर आगे बढ़ते हैं। हिंदी सिनेमा के शौकीन ये तो जानते ही हैं कि यश चोपड़ा और अमिताभ बच्चन का बहुत गहरा दोस्ताना फिल्मों में रहा है। राजेश खन्ना के साथ ‘इत्तेफाक’ और ‘दाग’ बनाने के बाद यश चोपड़ा ने देव आनंद के साथ ‘जोशीला’ बनाई थी। और, उसके बाद उन्होंने जो फिल्म ‘दीवार’ बनाई, उसने अमिताभ बच्चन को फिल्म ‘जंजीर’ में मिले एंग्री यंगमैन के तमगे पर सुनहरा वर्क चढ़ा दिया। सन 75 से शुरू हुआ ये सिलसिला फिल्म ‘कभी कभी’, ‘त्रिशूल’, ‘काला पत्थर’ से होता हुआ ‘सिलसिला’ पर आकर ही टूटा। यश चोपड़ा और अमिताभ बच्चन का नाम इसके बाद एक साथ फिल्म ‘मोहब्बतें’ में परदे पर दिखा, जिसके कि यश चोपड़ा निर्माता थे। और, दिखा फिल्म ‘वीर जारा’ में जहां यश चोपड़ा ने उनको शाहरुख खान के सामने हाशिये पर लाकर खड़ा कर दिया। तो आखिर ऐसा क्या हुआ ‘सिलसिला’ की मेकिंग के दौरान कि यश चोपड़ा और अमिताभ बच्चन में मनभेद हो गए और इसके बावजूद कि दोनों इस फिल्म में पार्टनर भी थे। आइए समझते हैं।
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कुदरती हादसे पर बनी पहली फिल्म
देश में जब भी कोई खदान हादसा होता है, ‘काला पत्थर’ का जिक्र जरूर आता है फिल्म ‘काला पत्थर’ धनबाद की चासनाला कोयला खदानों में 1975 में हुई दुर्घटना पर आधारित है जिसमें 350 से ज्यादा मजदूरों की मौत हो गई थी। लेकिन, फिल्म ‘काला पत्थर’ की आत्मा जोसेफ कोनराड के उपन्यास ‘लॉर्ड जिम’ के ज्यादा करीब है। हां, फिल्म का ट्रिगर प्वाइंट जरूर चासनाला खदान हादसा माना जा सकता है। फिल्म को हकीकत के करीब रखने के लिए यश चोपड़ा अपनी पूरी यूनिट के साथ झारखंड (तब बिहार) की गिद्दी खदानों मे शूटिंग करने पहुंचे थे। फिल्म की शूटिंग गिद्दी वॉशरी (कोयले की धुलाई वाली जगह) में हुई और फिल्म की यूनिट के मुख्य लोग यहीं के रेस्ट हाउस में रुके। बॉक्स ऑफिस पर अमिताभ बच्चन के हंगामे के बीच शत्रुघ्न सिन्हा भी तब तक ‘कालीचरण’, ‘विश्वनाथ’, ‘जानी दुश्मन’ और ‘हीरा मोती’ जैसी फिल्मों से सुपरस्टार बन चुके थे। अमिताभ बच्चन के सुपरस्टार बनने के बाद शत्रुघ्न सिन्हा के साथ उनकी ये पहली फिल्म थी और दोनों के बीच पूरी फिल्म में कभी ट्यूनिंग नहीं बन पाई। हालांकि, दोनों इससे पहले फिल्म ‘परवाना’ में काम कर चुके थे।
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‘मैंने इस दिल पे लिख दिया, तेरा नाम....चांदनी!’
हिंदी सिनेमा के सबसे प्रतिष्ठित प्रोडक्शन हाउस यशराज फिल्म्स के संस्थापक यश चोपड़ा की जयंती भी रविवार को है और ये साल इस कंपनी के 50 साल पूरे होने का साल भी है। इस दिन यश चोपड़ा के बेटे आदित्य चोपड़ा कंपनी के साल भर देश विदेश में चलने वाले जश्न की जानकारी देने की योजना बनाए बैठे थे। वह यह बताने वाले थे कि उनकी दीपिका पादुकोण, अनुष्का शर्मा, कैटरीना कैफ, वाणी कपूर, मानुषी छिल्लर, शरवरी और शालिनी पांडे जैसी नायिकाओं के साथ कौन सी फिल्में बनने वाली हैं। 1973 में रिलीज हुई पहली फिल्म ‘दाग’ से लेकर पिछले साल रिलीज हुई फिल्म ‘वॉर’ तक यशराज फिल्म्स कुल 76 फिल्में बना चुकी है और इसकी पांच नई फिल्में फ्लोर पर हैं। इन 81 फिल्मों में अगर किसी महिला किरदार के नाम पर बनी फिल्मों की बात करें तो ऐसी फिल्में सिर्फ दो हैं, ‘नूरी’ और ‘चांदनी’। जिन फिल्मों में कहानी के दोनों लीड किरदारों के नाम आए वे फिल्में रहीं, ‘वीर जारा’ और ‘नील एंड निक्की’। महिला विषय प्रधान दो फिल्में ‘मर्दानी’ और ‘मर्दानी 2’ भी यशराज फिल्म्स के बैनर तले बन चुकी हैं। लेकिन, इन सबमें भी चांदनी तो बस ‘चांदनी’ ही है।
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