कोई भी फिल्म रिलीज होती है तो सितारे, निर्माता और निर्देशकों की नजर इसकी कमाई पर रहती है। जाहिर सी बात है कि फिल्म बनाने वाला इसे हिट होते हुए भी देखना चाहेगा और इसके लिए एड़ी चोटी का जोर लगा देते हैं। मगर, हद तब होती है, जब कई बार बॉक्स ऑफिस के आंकड़े प्रायोजित तरीके से बढ़ाए जाते हैं और इसके लिए सहारा लिया जाता है कॉरपोरेट बुकिंग का। इसका चलन दिन पर दिन बढ़ रहा है। हाल ही में निर्देशक कबीर खान ने इस चलन पर चिंता जताते हुए कहा कि वे इसे सही नहीं मानते हैं।
Kabir Khan: कबीर खान ने कॉरपोरेट बुकिंग के बढ़ते चलन पर जताई चिंता, बोले- बॉक्स ऑफिस कमाई अब खेल बन गई है
कोई भी फिल्म रिलीज होती है तो सितारे, निर्माता और निर्देशकों की नजर इसकी कमाई पर रहती है। जाहिर सी बात है कि फिल्म बनाने वाला इसे हिट होते हुए भी देखना चाहेगा। कई बार बॉक्स ऑफिस के आंकड़े प्रायोजित तरीके से बढ़ाए जाते हैं।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
क्या है कॉरपोरेट बुकिंग?
कॉरपोरेट बुकिंग एक टर्म है, जिसमें किसी सितारे की फिल्म के बड़ी संख्या में टिकट वे सारे ब्रांड्स खरीदते हैं, जिनके लिए एक्टर एड करता है। मसलन कोई स्टार अगर 15 ब्रांड्स का अंबेसडर हैं। ऐसे में उसकी फिल्म रिलीज होने पर हरेक ब्रांड उसकी फिल्म के एक-एक करोड़ रुपये के टिकट खरीद लेता है और इसके कोड्स अपने ग्राहकों, डीलर्स आदि में फ्री में बांट देता है। इस तरह की जाने वाली टिकट बुकिंग को 'कॉरपोरेट बुकिंग' कहा जाता है।
कबीर खान इन दिनों फिल्म 'चंदू चैंपियन' के कारण चर्चा में बने हुए हैं। हाल ही में कबीर खान से कॉरपोरेट बुकिंग पर पूछा गया कि क्या उन्हें लगता है कि कमाई बढ़ाने का यह तरीका अविश्वास पैदा कर सकता है? जवाब में उन्होंने कहा कि पूरी फिल्म इंडस्ट्री आंकड़ों के इर्द-गिर्द घूमने लगी है, जिसे वो सही नहीं मानते हैं। कबीर ने पुराने समय को याद करते हुए कहा कि जब वो बड़े हो रहे थे तो उन्हें फिल्मों की पहले दिन की कमाई के बारे में कुछ भी पता नहीं होता था। कबीर ने कहा कि उन्हें नहीं मालूम कि 'दीवार' या फिर 'शोले' फिल्म ने कितने पैसे कमाए थे।
कबीर खान का कहना है कि फिल्म निर्माताओं और वितरकों को लगता है कि इससे उनके व्यापार में मदद होगी। ऐसा करके निर्माता या वितरक किसी को लूट भी नहीं रहे हैं, इसलिए इस मुद्दे पर उनकी खुद की कोई नैतिक स्थिति नहीं हैं। कबीर ने कहा, 'बॉक्स ऑफिस पर होने वाली कमाई अब एक खेल सा बन गया है, जिसे खेलने के लिए लोग आएंगे ही। उन्होंने कहा कि इन दिनों हर कोई कमाई के आंकड़ों की बात कर रहा है। इस मामले में उनका मानना है कि 90% लोग जानते ही नहीं है कि इसका असल में क्या मतलब है। उन्होंने कहा कि कमाई को लेकर तरह-तरह के आंकड़े पेश किए जाते हैं और इस चक्कर में कॉरपोरेट और बल्क बुकिंग के जरिए कमाई के बड़े आंकड़े हासिल करने की कोशिश की जाती है।
Anant-Radhika Wedding: अनंत-राधिका के संगीत में परफॉर्म करने पहुंचे जस्टिन बीबर, पॉप सिंगर के साथ सजेगी शाम
राजेश खन्ना के समय से शुरू हुआ ट्रेंड
आपको बता दें कि कॉरपोरेट बुकिंग का चलन आज शुरू नहीं हुआ है। कहा जाता है कि राजेश खन्ना के दौर से कॉरपोरेट बुकिंग की शुरुआत हुई। फिर गोविंदा ने भी खूब एडवांस बुकिंग में टिकटें खरीदीं। पहले ये चलन फिल्म के सितारों के बीच था। मगर, हाल के दिनों में फिल्म को चलवाने के लिए अब निर्माता भी इसमें कूद पड़े हैं। कबीर खान से पहले 'गदर' के निर्देशक अनिल शर्मा भी अप्रत्यक्ष रूप से कॉरपोरेट बुकिंग पर पर बोल चुके हैं। बीते वर्ष 'गदर 2' के समय भी 'ऑर्गेनिक कलेक्शन' और 'कॉरपोरेट बुकिंग' जैसे टर्म खूब चर्चा में आए।
Salaar 2: प्रभास की बहुप्रतीक्षित फिल्म 'सलार 2' को लेकर आया बड़ा अपडेट, इस दिन शुरू होगी फिल्म की शूटिंग