सात साल की उम्र में बनाई थी पहली शॉर्ट फिल्म...जानिए कौन हैं ये डायरेक्टर
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
जब दुनिया में मंडराता है संकट तो आता है...बैटमैन
जब दुनिया खत्म करने के लिए कुछ शैतान साजिश रचते हैं तो दुनिया को बचाने के लिए कुछ मसीहा इनसे लोहा लेते हैं। 'बैटमैन' ऐसा ही मसीहा है जो मानवता के दुश्मनों से टक्कर लेता है। नोलन की डार्क नाइट ट्रियोलजी इसी लॉजिक का परिणाम है कि गोथम शहर को वहां के नागरिक नहीं, वहां की लाचार हो चुकी कानून व्यवस्था नहीं बल्कि ‘बैटमैन’ आकर बचाएगा।
दीमागी गलियारे की भूलभुलैया
नोलन की कहानियों का नायक इंसानी मस्तिष्क की गलियों की भूल भुलैय्या में भटकता दिखाई पड़ता है। फिल्म ‘इंसेप्शन’ का नायक यादों को किसी और के अचेतन मन में डालकर ख्वाबों की एक दुनिया बनाता है। ‘डार्क नाइट ट्रियोलजी’ के नायक को अपने माता-पिता की हत्या से जुड़ी यादें तड़पाती हैं। मेमेंटो मूरी का नायक शार्ट टर्म मेमोरी से जूझता हुआ अपने पूरे शरीर में अपनी पत्नी के कातिलों का नाम गुदवा लेता है।
क्रिस्टोफर ने पहली फिल्म बनाई ‘फॉलोइंग’ बनाई। नोलन पर उस वक्त तक कोई प्रोड्यूशर पैसा लगाने को तैयार नहीं था। शूटिंग साल भर के शेड्यूल में केवल वीकेंड्स पर होती थी। इस फिल्म में नोलन के दोस्तों ने ही काम किया। यहां तक कि फिल्म के कास्च्यूम रोजाना पहने वाले कपड़े ही थे। खाने में मां के हाथ के सैंडविच ही मिलते थे। ‘फॉलोइंग’ एक बेरोजगार नवयुवक लेखक की कहानी कहती है जो अपनी किताब के लिए अपराध की दुनिया में जाने को मजबूर होना पड़ता है। ये फिल्म बनीं और नोलन ने फिर कभी पीछे मुढ़कर नहीं देखा।
क्रिस्टोफर अपना पर्सनल ई-मेल और मोबाइल नहीं रखते हैं। उन्हें लगता है ये ध्यान भटकाने वाली चीजें हैं। उनका मानना है कि कुछ कलात्मक सोचने के लिए जरूरी है कि आप दीमाग और वक्त की फिजूलखर्ची न करें।