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स्पाइस इन डिसगाइज के डिजाइनर से EXCLUSIVE बातचीत, बोले- मौका मिला तो बनाऊंगा भारतीय किरदार पर फिल्म

Thu, 26 Dec 2019 12:22 PM IST
Mishra Mishra पंकज शुक्ल, मुंबई
पंकज शुक्ल, मुंबई Published by: Mishra Mishra Updated Thu, 26 Dec 2019 12:22 PM IST
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spies in disguise designer Sandeep Menon exclusive interview with amar ujala
Sandeep Menon' - फोटो : amar ujala, mumbai

दो साल पहले पिजन: इम्पॉसिबल नाम की शॉर्ट फिल्म को बड़े परदे की बड़ी फिल्म बनाने की शुरू हुई मेहनत अब पूरे रंग रोगन के साथ सिनेमाघरों तक पहुंच चुकी है। इस एनिमेशन फिल्म को बनाने में अहम योगदान रहा भारतीय मूल के डिजाइनर संदीप मेनन का। अमर उजाला ने उनसे की ये एक्सक्लूसिव बातचीत।



विल स्मिथ और टॉम हॉलैंड जैसे हॉलीवुड सुपरस्टार्स की आवाजों से सजी फिल्म स्पाइस इन डिसगाइज का मुख्य किरदार एक कबूतर है, शांति का प्रतीक समझे जाने वाले एक पक्षी को जासूस के रूप में सोचना कितना चुनौती भरा रहा होगा?
एक डिजाइनर के तौर पर मेरा काम होता है कहानी के लेखक और फिल्म के निर्देशक की कल्पनाओं को आकार देना और उनमें ऐसे रंग भरना जो दर्शकों को आकर्षित कर सकें। किरदारों को सोचना उनका काम है। लेकिन, इसके बावजूद अगर हम इतिहास में झांके तो हम पाएंगे कि जब दूरसंचार की तकनीक आज जैसी उन्नत नहीं थी तो कबूतर ही थे जो संदेश लेकर जाते थे। जासूसी में भी सरहद के इस पार से उस पार तक उनका खूब इस्तेमाल हुआ है।

spies in disguise designer Sandeep Menon exclusive interview with amar ujala
Spies in Disguise - फोटो : amar ujala, mumbai

एनिमेशन फिल्मों में किरदारों के आसपास का वातावरण दिलचस्प बनाने पर इन दिनों काफी जोर है, फिर चाहे वो द लॉयन किंग हो, फ्रोजेन 2 हो या फिर स्पाइस इन डिसगाइज, वजह?
मेरा जोर वातावरण को किसी किरदार की तरह ही सजाने पर रहता है। अगर हम किसी किरदार को जंगल में दिखा रहे हैं तो आसपास के पेड़-पौधे, पहाड़, चट्टाने, वहां का माहौल या फिर किसी रेस्तरां का दृश्य है तो वहां की आंतरिक सजावट बहुत मायने रखती है।

दो तीन दशक पहले की एनिमेशन फिल्में देखें तो ऐसा नहीं होता था, पूरा जोर सिर्फ मुख्य किरदारों पर ही रहता था, तकनीक ने इसमें कितनी मदद की है?
टॉम एंड जेरी या ही मैन जैसे कॉमिक सीरीज, उस समय पेटिंग बनाने का सारा काम डिजाइनर हाथ से करते थे, अब हम कंप्यूटर एनीमेशन की मदद लेते हैं। कंप्यूटर पर एनीमेशन बनाने के बाद हमें उसे अलग अलग कोणों से देखने में काफी मदद मिलती है। तकनीक ने एनीमेशन को एक नई ऊंचाई पर पहुंचा दिया है।

spies in disguise designer Sandeep Menon exclusive interview with amar ujala
Spies in Disguise - फोटो : amar ujala, mumbai

आपने अपने ब्लॉग पर रामायण के काफी दृश्य भी डिजाइन किए हैं और मुंबई को भविष्य के शहर की तरह दिखाने की आपकी कल्पनाएं भी रोचक रही हैं, बतौर निर्देशक किसी भारतीय किरदार पर एनीमेशन फिल्म बनाने की कोई योजना?
रामायण मेरा स्कूल प्रोजेक्ट था। ये रामायण को देखे का मेरा अपना तरीका है जो काफी स्टाइलिश है, बहुत ग्राफिकल है और बहुत करिश्माई भी। मैं खाली समय में अपनी कल्पनाओं की डिजाइन बनाता रहता हूं। जैसा कि आपने हाथियों को भविष्य की उड़ती हुई टैक्सियों के रूप में देखा तो ये सब मैं अपने खाली समय के उपयोग के लिए करता रहता हूं। किसी भारतीय किरदार पर पूरी एनीमेशन फिल्म बनाने का ख्याल ही मुझे रोमांच से भर देता है। देखते हैं आगे क्या होता है।

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