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राजा-रानियों के यौन संबंधों पर बात करने लगी हैं फ़िल्में, एक तो आस्कर अवार्ड की रेस में शामिल
Thu, 07 Feb 2019 06:46 AM IST
भावना शर्मा
बीबीसी
बीबीसी
Published by: भावना शर्मा
Updated Thu, 07 Feb 2019 06:46 AM IST
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हॉलीवु़ड फ़िल्म 'द फेवरेट' साल 2018 की सबसे चर्चित फ़िल्म कही जा रही है. 'द फ़ेवरेट' इस बार कई अवार्ड की रेस में शामिल की गई है । इस फ़िल्म को दस कैटेगरी में ऑस्कर के लिए नामांकित किया गया है । वहीं बाफ़्टा अवार्ड की 12 कैटेगरी के लिए 'द फ़ेवरेट' को नामांकन मिले हैं । गोल्डेन ग्लोब अवार्ड तो इस फ़िल्म ने जीत ही लिए हैं । 'द फ़ेवरेट' फ़िल्म में अपने रोल के लिए गोल्डेन ग्लोब पुरस्कार विजेता और ऑस्कर अवार्ड के लिए नामांकित अभिनेत्री ओलिविया कोलमैन ने बीबीसी को बताया कि, " 'द फ़ेवरेट' ने ऐतिहासिक फिल्मों को नई ज़िंदगी दी है ।
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इस फ़िल्म को देखते हुए आप उस दौर में जीने का एहसास कर सकते हैं ।" ओलिविया कोलमैन ने 'द फ़ेवरेट' फ़िल्म में ब्रितानी महारानी एन का किरदार निभाया है । इस फ़िल्म में महारानी एन और डचेज़ ऑफ़ मार्लबोरो सारा के बीच मोहब्बत के रिश्ते को दिखाया गया है । मज़े की बात ये है कि 2018 में ऐसी कई फ़िल्में बड़े पर्दे पर आईं, जो ऐतिहासिक किरदारों और कहानियों पर आधारित थीं । इन सब में 'द फ़ेवरेट' ने बाज़ी मार ली । ऐतिहासिक फ़िल्में बनाना बहुत मुश्किल होता है । इन में दिखाए जाने वाले महलों के सेट, सेनाओं की तादाद और पोशाकों पर बहुत रक़म ख़र्च होती है ।
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हॉलीवुड फ़िल्मों के हालिया इतिहास पर नज़र डालें, तो ब्रेवहार्ट (1995) और ग्लैडिएटर (2000) फ़िल्मों का ही बजट 10 करोड़ डॉलर से ज़्यादा का था । इन्होंने ऑस्कर अवार्ड भी जीते । पर, ऐतिहासिक फ़िल्मों को ऐसी कामयाबियां कम ही मिलती हैं । ऐतिहासिक फ़िल्मों के हिस्से अक्सर रनर अप का दर्जा ही आता रहा है. जैसे कि एलिज़ाबेथ (1998), द लॉयन इन विंटर (1968), और 1963 में आई फ़िल्म क्लियोपैट्रा । क्लियोपैट्रा तो उस वक़्त तक बनी सबसे महंगी फ़िल्म थी ।
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लेकिन, ग्लैडिएटर जैसी बेहद कामयाब फ़िल्म बनाने वाले निर्देशक रिडले स्कॉट को ऐतिहासिक फ़िल्मों के दुधारी तलवार होने का एहसास तब हुआ, जब उनकी यूरोप के धर्म युद्धों पर बनी फ़िल्म किंगडम ऑफ़ हीवेन (2005) बुरी तरह नाकाम रही थी । उसने एक निर्देशक के तौर पर स्कॉट की इज़्ज़त पर दाग़ लगा दिया था । लेकिन, इस साल की बात करें तो 'द फ़ेवरेट' फ़िल्म के मुक़ाबले में है एक और ऐतिहासिक पृष्ठभूमि पर बनी फ़िल्म 'मैरी क्वीन ऑफ़ स्कॉट्स' । इसी तरह नेटफ़्लिक्स ने 12 करोड़ डॉलर की रक़म ख़र्च कर के स्कॉटलैंड के मशहूर राजा रॉबर्ट द ब्रूस पर फ़िल्म बनाई है- 'द आउटलॉ किंग' ।
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वहीं माइक ले 1819 में ब्रिटेन में हुए राजनैतिक हत्याकांड पर 'पीटरलू' नाम से 150 मिनट लंबी फ़िल्म बनाई है । तो, फ्रांस पियर शोएलर ने 'उन पीपल एट सोन रोई' नाम से फ्रांस की क्रांति के दौर पर फ़िल्म बनाई है । ये फ़िल्म 1789 में बस्तील जेल पर हमले से लेकर 1792 में महाराजा लुई को मौत के घाट उतारने के दौर तक की कहानी कहती है । ब्रिटेन के मेट्रो अख़बार में फ़िल्मों कि समीक्षक लरुश्का इवान-ज़देह कहती हैं कि, "ऐतिहासिक फ़िल्मों में अक्सर गोरे लोगों को मसीहा के तौर पर दिखाय जाता रहा है लेकिन, अब ऐतिहासिक फ़िल्मों को लेकर बड़ा बदलाव आया है । अब ऐतिहासिक फ़िल्में नए नज़रिए से बनाई जा रही हैं ।"