डिज्नी का हिस्सा बनने के बाद से फिर से पुनर्जीवित हुई हॉलीवुड की फिल्म फ्रेंचाइजी ‘प्लैनेट ऑफ द एप्स’ की नई फिल्म ‘किंगडम ऑफ द प्लैनेट ऑफ द एप्स’ इस शुक्रवार दुनिया भर में धमाल मचाने जा रही है। फिल्म को लेकर इस फ्रेंचाइजी के प्रशंसकों का उत्साह अभी से देखने को मिल रहा है। सिनेमाघरों में हिंदी सिनेमा के एक बाद एक फ्लॉप होने के चलते हाल के महीनों में हॉलीवुड फिल्में भारत में अच्छा कारोबार कर रही हैं। फिल्म ट्रेड को उम्मीद है कि ये नई फिल्म ‘किंगडम ऑफ द प्लैनेट ऑफ द एप्स’ बॉक्स ऑफिस पर बढ़िया ओपनिंग लेगी और भारत में कम से कम सौ करोड़ रुपये का कारोबार करने में सफल रहेगी। आइए आपको दिखाते हैं इस फ्रेंचाइजी के पांच बेहद रोमांचक पल और इनकी तस्वीरें...
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The Planet Of The Apes: फ्रेंचाइजी के वे पांच पल, जिन्होंने बना दिया बंदरों की दुनिया का सबसे बड़ा साम्राज्य
Wed, 08 May 2024 01:45 PM IST
दीक्षा पाठक
अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
Published by: दीक्षा पाठक
Updated Wed, 08 May 2024 01:45 PM IST
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किंगडम ऑफ द प्लैनेट ऑफ द एप्स
- फोटो : सोशल मीडिया
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प्लैनेट ऑफ द एप्स
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
ओरिजिनल फिल्म का अंतिम खुलासा (1968)
‘प्लैनेट ऑफ द एप्स’ का वह शानदार फ्रेम लोगों को अब भी याद है जब फिल्म के नायक टेलर ने रेत में दबी हुई स्टैच्यू ऑफ लिबर्टी की खोज की थी। जिससे पता चला कि वह पूरे समय धरती पर रहा है। इस दृश्य ने साइंस फिक्शन में कहानी को एक बेहतरीन मोड़ के साथ समाप्त करने के मामले में एक बेंचमार्क बनाया।
‘प्लैनेट ऑफ द एप्स’ का वह शानदार फ्रेम लोगों को अब भी याद है जब फिल्म के नायक टेलर ने रेत में दबी हुई स्टैच्यू ऑफ लिबर्टी की खोज की थी। जिससे पता चला कि वह पूरे समय धरती पर रहा है। इस दृश्य ने साइंस फिक्शन में कहानी को एक बेहतरीन मोड़ के साथ समाप्त करने के मामले में एक बेंचमार्क बनाया।
सीजर का मोशन कैप्चर परफॉर्मेंस
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
सीजर का मोशन कैप्चर परफॉर्मेंस (2011-2017)
‘प्लैनैट ऑफ द एप्स’ की रीबूट ट्रिलॉजी, जो 2011 से 2017 तक चली, में एंडी सर्किस ने मोशन कैप्चर तकनीक का उपयोग करके जिस तरह से सीजर के किरदार को पर्दे पर उतारा, उसने गैर-इंसानी किरदारों को बिल्कुल असली पात्र की तरह दिखाने और उनके जज्बातों की बारीकियों को सामने लाने के मामले में जो संभव था, उसके मायने को ही बदल दिया।
‘प्लैनैट ऑफ द एप्स’ की रीबूट ट्रिलॉजी, जो 2011 से 2017 तक चली, में एंडी सर्किस ने मोशन कैप्चर तकनीक का उपयोग करके जिस तरह से सीजर के किरदार को पर्दे पर उतारा, उसने गैर-इंसानी किरदारों को बिल्कुल असली पात्र की तरह दिखाने और उनके जज्बातों की बारीकियों को सामने लाने के मामले में जो संभव था, उसके मायने को ही बदल दिया।
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‘डान ऑफ द प्लैनेट ऑफ द एप्स’ (2014) में बने गांव
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
‘डान ऑफ द प्लैनेट ऑफ द एप्स’ (2014) में बने गांव
बड़ी बारीकी से डिजाइन किए गए एप विलेज ने सीजीआई टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में हुई प्रगति को दिखाया, जिसकी मदद से बेहद समझदार वानरों की जोश से भरी एक कम्युनिटी तैयार की गई और दर्शकों को लगा कि ऐसा सचमुच मुमकिन है।
बड़ी बारीकी से डिजाइन किए गए एप विलेज ने सीजीआई टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में हुई प्रगति को दिखाया, जिसकी मदद से बेहद समझदार वानरों की जोश से भरी एक कम्युनिटी तैयार की गई और दर्शकों को लगा कि ऐसा सचमुच मुमकिन है।
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राइज ऑफ द प्लैनेट ऑफ़ द एप्स (2011) में गोल्डन गेट ब्रिज पर लड़ाई
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
राइज ऑफ द प्लैनेट ऑफ़ द एप्स (2011) में गोल्डन गेट ब्रिज पर लड़ाई
एक्शन से भरपूर इस सीक्वेंस में लाइव-एक्शन फुटेज के साथ सीजीआई एप्स का बड़ा सहज तालमेल दिखाई दिया, जिससे आधुनिक ब्लॉकबस्टर फिल्म निर्माण में विजुअल इफैक्ट्स का मानक और ऊंचा हो गया।
एक्शन से भरपूर इस सीक्वेंस में लाइव-एक्शन फुटेज के साथ सीजीआई एप्स का बड़ा सहज तालमेल दिखाई दिया, जिससे आधुनिक ब्लॉकबस्टर फिल्म निर्माण में विजुअल इफैक्ट्स का मानक और ऊंचा हो गया।