अपने जमाने के दिग्गज फिल्म निर्माता ताहिर हुसैन के घर पैदा हुए मोहम्मद आमिर हुसैन खान उर्फ आमिर खान को सिनेमा घुट्टी में पिलाया गया। बचपन से ही कैमरे उनकी पहली माशूक बना और जवानी आते आते वह समझ गए कि सिनेमा कुछ नहीं बल्कि करोड़ों लोगों को भरमाने का एक जरिया भर है। अंधेरे में बैठे सैकड़ों लोगों को बस कुछ घंटे एक तिलिस्मी दुनिया में पहुंचा देना भर ही सिनेमा है। जब वह बड़े हो रहे थे तो सिनेमा इतना भर ही समझा जाता था। और, फिर आमिर खान को एक दिन सुर्खियों में रहना आ गया। उनके आसपास कुछ ऐसे लोग जमा होने लगे थे जो उन्हें सुर्खियों में रहना सिखाते थे। अपनी बतौर हीरो पहली फिल्म ‘कयामत से कयामत तक’ के लिए ऑटो रिक्शा पर स्टिकर चिपकाने से लेकर अपनी पिछली फिल्म ‘ठग्स ऑफ हिंदोस्तान’ तक न जाने वह क्या क्या इन्हीं सुर्खियों के लिए कर चुके हैं। लेकिन, 26 मई 2006 को रिलीज हुई यशराज फिल्म्स की फिल्म ‘फना’ की रिलीज से पहले जो उन्होंने किया, वह उन पर ऐसा उल्टा पड़ा कि वह आज तक उसके असर से बाहर नहीं आ सके हैं।
Bioscope S2: जब हेडलाइन के लिए आमिर ने अपने पैरों पर मार ली कुल्हाड़ी, गुजरात में रिलीज नहीं हुई ‘फना’
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जोश चंद्रशेखर आजाद का!
आमिर के करियर की पहली सौ करोड़ी फिल्म ‘फना’ का निर्देशन कुणाल कोहली ने किया है। वही कुणाल कोहली जिनकी बनाई पिछली फिल्म सीरीज ‘रामयुग’ एमएक्स प्लेयर पर हाल ही में वेब सीरीज बन कर रिलीज हुई है। इससे पहले आमिर खान की फिल्म ‘रंग दे बसंती’ उसी साल गणतंत्र दिवस पर रिलीज हो चुकी थी। ‘रंग दे बसंती’ पूरी देशभक्ति टाइप फील वाली फिल्म थी। आमिर बने भी उसमें चंद्रशेखर आजाद थे। उससे पहले वह मंगल पांडे भी बन ही चुके थे। तो उनके भीतर एक अलग टाइप का जोश भरा हुआ था कि जल, जंगल, जमीन के लिए कुछ तो करना है, कुछ तो बड़ी हेडलाइन बनानी है। और, हेडलाइंस बनाने का यही जोश आमिर खान को लेकर चला गया गुजरात। वह गुजरात जिसके मुख्यमंत्री तब नरेंद्र मोदी हुआ करते थे।
ऐसे आए बीजेपी के निशाने पर
गुजरात जाकर आमिर खान ‘नर्मदा बचाओ आंदोलन’ में शामिल हुए। बांध से विस्थापित लोगों के बारे में भी उन्होंने बयान दिए और बस आमिर खान आ गए सीधे राज्य बीजेपी के निशाने पर। फिल्म ‘फना’ वैसे ही संवेदनशील विषय पर बनी फिल्म थी। फिल्म में आमिर का किरदार आतंकवादी का और मामला इतना गर्म हुआ कि पूछो मत। पूरे गुजरात में आमिर खान के पुतले जलाए गए। फिल्म ‘फना’ के पोस्टर फाड़े गए। बैनर जला दिए गए। राज्य के सिनेमाघर मालिकों ने हाथ जोड़ लिए कि ये फिल्म हम अपने यहां नहीं लगा सकते।
आदि की अदालत से गुहार
फिल्म के निर्माता आदित्य चोपड़ा भी तब अलग धुनकी में हुआ करते थे। आदित्य को शुरू से इस बात का अहं रहा है कि हिंदी सिनेमा के वह सबसे बड़े ट्रेंडसेटर हैं। आदित्य चोपड़ा ने बतौर निर्माता तो दर्जनों फिल्मे बनाई हैं लेकिन बतौर निर्देशक उनके खाते में पिछले 26 साल में सिर्फ चार फिल्में हैं। उनकी बतौर निर्देशक पिछली फिल्म ‘बेफिक्रे’ 2016 में रिलीज हुई थी और पहले ही दिन ही फ्लॉप घोषित हो गई थी। फिल्म ‘फना’ रिलीज हुई तो गुजरात में उसकी रिलीज को लेकर बवाल मचा तो वह सुप्रीम कोर्ट चले गए कि वह उनकी फिल्म को गुजरात में रिलीज कराने की सहूलियत दी जाए।
गुजरात में जानलेवा विरोध
फिल्म ‘फना’ का मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा तो उसने साफ कह दिया कि अदालत का काम किसी फिल्म को रिलीज कराने का नहीं है, आदित्य चोपड़ा को दिक्कत हो तो वह राज्य की पुलिस से कहें। जिन सिनेमाघरों को सुरक्षा की जरूरत होगी, वह उन्हें मिल जाएगी। लेकिन, फिल्म ‘फना’ गुजरात में रिलीज नहीं हुई। कुणाल कोहली ने प्रेस कांफ्रेंस भी की। पर बात बनी नहीं। एक सिंगल स्क्रीन थिएटर वाले को जोश चढ़ा और उसने अपने यहां फिल्म रिलीज कर दी। वहां एक दर्शक मिट्टी का तेल लेकर पहुंचा और फिल्म के इंटरवल में बाथरूम में जाकर खुद को आग लगा ली। मामला फिर पूरे देश में फैल गया। इस सिंगल स्क्रीन से भी फिल्म हटानी ही पड़ी।