अभिनेता सनी देओल की फिल्म ‘अर्जुन’ का बाइस्कोप अगर आपने पढ़ा है तो आपको ये भी याद होगा कि कैसे उस फिल्म की हीरोइन डिंपल कपाड़िया बनीं। फिल्म ‘अर्जुन’ से पहले सनी देओल की अमृता सिंह के साथ एक फिल्म बन रही थी ‘बेटे’। ये फिल्म बंद ही इसलिए हुई की अमृता सिंह और सनी देओल की ट्यूनिंग नहीं हो पा रही थी। सनी देओल और डिंपल कपाड़िया पहली बार फिल्म ‘मंज़िल मंज़िल’ में साथ आए थे। फिल्म ‘अर्जुन’ में डिंपल कपाड़िया से पहले पद्मिनी कोल्हापुरे को भी लेने की बात चली थी लेकिन सनी देओल का वीटो डिंपल के नाम पर ही रहा। और, एक वीटो सनी देओल ने फिल्म ‘सोहनी महिवाल’ में भी डिंपल के नाम पर लगाने की कोशिश की थी, लेकिन तब तक डिंपल ही रफ्तार पकड़ चुकी थी। जो डेट्स सनी फिल्म ‘सोहनी महिवाल’ के लिए डिंपल से चाह रहे थे, वे तारीखें डिंपल फिल्म ‘सागर’ के लिए दे चुकी थीं। आज का बाइस्कोप फिल्म ‘सोहनी महिवाल’ पर है जिसके गानों ने अनु मलिक को हिंदी सिनेमा का बड़ा संगीतकार बना दिया था।
Bioscope S2: जब चाहकर भी सनी की हीरोइन नहीं बन पाईं डिंपल, ऐसे हुई जीनत की लाइफ में मजहर की एंट्री
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फिल्म ‘सोहनी महिवाल’ का एक सुपरहिट गाना है, सोनी चनाब दे किनारे…। आनंद बक्षी ने यूं लगता है कि जैसे अपना दिल उड़ेल दिया हो इस गाने में। अनु मलिक ने भी ये गाना इसकी पूरी पंजाबियत के साथ कंपोज करके अपने पिता सरदार मलिक का नाम रोशन किया। गाने की धुन तैयार होने के बाद आशा भोसले को जब मौका मिला तो वह आईं गाना रिकॉर्ड करने। गाने का मूड समझाने के लिए उन्हें इसका स्क्रैच सुनाया गया, इसे सुनकर ही आशा भोसले को ये गाना डब करना था। आशा ने जैसे ही गाने का मुखड़ा सुना, उन्होंने आंखें मूंद ली। पूरा गाना सुनने तक वह यूं ही बैठी रहीं। अनु मलिक परेशान। कहीं गलती तो नहीं हो गई। लेकिन, स्क्रैच सुनने के बाद आशा भोसले ने जो कहा उसकी मिसाल अभी और कई पीढ़ियों तक दी जाती रहेगी। उन्होंने कहा कि इस स्क्रैच को ही फिल्म के साउंडट्रैक में फाइनल सॉन्ग समझकर शामिल कर लो। इस गायिकी से बेहतर गाना बहुत मुश्किल है। स्क्रैच वाला गाना ही फिल्म में इस्तेमाल हुआ और इसी गाने के लिए उभरती गायिका अनुपमा देशपांडे को मिला उनके करियर का पहले बेस्ट फीमेल सिंगर फिल्मफेयर अवार्ड।
और, सिर्फ अनुपमा देशपांडे ही क्यों ये फिल्म तो इसके हीरो, हीरोइन और यहां तक कि इसकी सीनियर हीरोइन तक के लिए किस्मत का ऐसा ही खेल रही। आज के बाइस्कोप की फिल्म ‘सोहनी महिवाल’ पर बात करने से पहले आपको थोड़ा और पहले की एक और इसी नाम की फिल्म के बारे में बता देते हैं। ये फिल्म बननी थी उस समय के सुपरस्टार राजेश खन्ना के साथ। बी आर चोपड़ा उन दिनों पंजाब पहुंचे हुए थे अपनी फिल्म ‘कर्म’ की शूटिंग करने। वहीं उनको ‘सोहनी महिवाल’ पर पंजाबी में एक फिल्म बनाने का आइडिया आया। राजेश खन्ना से उन्होंने जिक्र किया तो वह भी चहक उठे। रूमानियत के राजकुमार को ऐसी ही एक कहानी बेसब्री से इंतजार भी था। फिर फोन गया नीतू सिंह के पास तो वह भी झट से तैयार हो गईं। बी आर चोपड़ा ने वहीं आनन फानन अगले दो तीन दिन में फिल्म ‘सोहनी महिवाल’ बनाने का एलान कर दिया। फिल्म का मुहूर्त शॉट भी उन्होंने पंजाब के तब के मुख्यमंत्री ज्ञानी जैल सिंह को मुख्य अतिथि बनाकर शूट कर लिया। फिर चोपड़ा साब बंबई लौटे। अपनी फिल्म ‘कर्म’ की रिलीज में लग गए। फिल्म जैसी वह सोच रहे थे, वैसी चली नहीं। इसी के बाद बी आर चोपड़ा ने राजेश खन्ना के साथ बनने वाली ‘सोहनी महिवाल’ का किस्सा भी वहीं खत्म कर दिया।
राजेश खन्ना की ‘सोहनी महिवाल’ का किस्सा खत्म भले हो गया हो, पर हमारे आज के बाइस्कोप की फिल्म ‘सोहनी महिवाल’ का किस्सा अभी जारी है। पहले बात कर लेते हैं महिवाल की। फिल्म की कहानी परदेस से सोहनी की बस्ती में आए महिवाल की कहानी है जो वहीं बस जाता है। दोनों में प्रेम होता है। दोनों करीब आते हैं। और, जमाना नाराज होता है। सोहनी की शादी कहीं और कर दी जाती है, लेकिन दोनों का प्रेम इसके बाद भी कम नहीं होता। बंदिशें पाकर प्यार और जवां होता है, ये कहावत है। फिल्म में दोनों इसे साकार करते नजर आते हैं। फिल्म ‘सोहनी महिवाल’ भारत और रूस के बीच सिनेमा को लेकर हुए समझौते के तहत बनने वाली दूसरी फिल्म थी। निर्देशक उमेश मेहरा ने इस फिल्म को हिंदी में निर्देशित किया और रूसी भाषा में इसे निर्देशित करने का जिम्मा संभाला था लतीफ फैजीयेव ने।
फिल्म में महिवाल का किरदार पहले पहल कुमार गौरव को ऑफर हुआ। कुमार गौरव की ‘लव स्टोरी’ रिलीज हो चुकी थी और उनके करियर की कमान उन दिनों उनके पिता और जुबली कुमार के नाम से मशहूर रहे राजेंद्र कुमार के हाथों में थी। इंडो रशियन प्रोजेक्ट देख राजेंद्र कुमार ने उमेश मेहरा से खासी मोटी रकम मांग ली। और, कुमार गौरव के हाथ से फिल्म निकल गई। इसके बाद उमेश मेहरा ने राज कपूर के बेटे राजीव कपूर को फिल्म में लेने का मन बनाया लेकिन वह ‘राम तेरी गंगा मैली’ के लिए अपनी तमाम तारीखें दे चुके थे। फिल्म का जिक्र इसके बाद धर्मेंद्र के सामने हुआ तो उन्होंने महिवाल के किरदार के लिए सनी देओल को लेने के बात कही। सनी देओल को महिवाल का किरदार पसंद आया और उन्होंने हां भी कर दी। लेकिन सोहनी के किरदार में पूनम ढिल्लों से हां करना इतना आसान नहीं रहा फिल्म के निर्देशक के लिए। उमेश मेहरा ने दरअसल जब फिल्म की कहानी पूनम को सुनाई तो नरेशन में वह कुछ सीन सुनाना भूल गए। पूनम को लगा कि ये फिल्म तो पूरी तरह महिवाल के किरदार पर है, सोहनी का तो कुछ है ही नहीं। तो उमेश मेहरा ने उन्हें फिर से समझाया, मनाया और तैयार किया इस किरदार के लिए। फिल्म का बड़ा हिस्सा रूस में शूट हुआ है।