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Bombay Begums Review: जोया बनने की कोशिश में खुद को भूलीं अलंकृता, घिसी पिटी सी ‘बॉम्बे बेगम्स’

Tue, 09 Mar 2021 12:19 PM IST
Pankaj Shukla पंकज शुक्ल
Updated Tue, 09 Mar 2021 12:19 PM IST
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Bombay Begums Review by Pankaj Shukla Alankrita Shrivastava Netflix india puja bhatt amruta subhash
बॉम्बे बेगम्स - फोटो : अमर उजाला

डिजिटल रिव्यू: बॉम्बे बेगम्स (वेब सीरीज)


लेखक, निर्देशक: अलंकृता श्रीवास्तव, बोरनिला चटर्जी
कलाकार: पूजा भट्ट, शहाना गोस्वामी, अमृता सुभाष, प्लाबिता बोरठाकुर, आध्या आनंद, दानिश हुसैन, राहुल बोस और मनीष चौधरी आदि।
ओटीटी: नेटफ्लिक्स
रेटिंग: **

यूपी में कहीं एक नई फिल्म ‘चार यार’ की शूटिंग शुरू हुई है। चार का चक्कर मुंबई में इधर कुछ ज्यादा ही हो रहा है। ‘फोर मोर शॉट्स प्लीज’ और ‘मेड इन हैवेन’ की कहानियों की बखिया अगर उधेड़ें तो सबके भीतर एक जैसी ही भराई निकलती है। पुरानी रजाइयों की गांठें पड़ चुकी रूई को कितना भी धुनको, नए जैसा एहसास आता नहीं है। नेटफ्लिक्स को अपनी पिछली फिल्म ‘डॉली किट्टी और वो चमकते सितारे’ टिकाने के बाद अलंकृता ने इसी ओटीटी को अपनी छह एपीसोड की नई वेब सीरीज ‘बॉम्बे बेगम्स’ भी टिका दी है। जैसा कि नाम से जाहिर है ये सीरीज आज के मुंबइया जीवन सी कम और फिल्मों में दिखने वाले बंबइया स्टाइल जैसी ज्यादा है। ताश के 52 पत्तों जैसी सोसाइटी की चार बेगमों की ये कहानी है। जो सबसे अमीर है, उसका नाम रानी है। हां, राजा उसका प्यादे जैसा ही दिखता है।

Bombay Begums Review by Pankaj Shukla Alankrita Shrivastava Netflix india puja bhatt amruta subhash
बॉम्बे बेगम्स - फोटो : अमर उजाला, मुंबई

वेब सीरीज ‘बॉम्बे बेगम्स’ को महिला दिवस पर रिलीज करने का सबब मार्केटिंग के किसी बंदे की अधकचरी सलाह से ज्यादा कुछ नहीं है। सीरीज काइयां लोगों की कहानी है और कम से कम महिला दिवस पर सामाजिक उत्थान के लिए ऐसा कोई किरदार लोग कम ही अपने आसपास देखना चाहेंगे। नौकरी खो चुकी किराए पर रहने वाली एक लड़की अपनी मकान मालकिन से शराब और सिगरेट के लिए भिड़ जाए, ये आधी आबादी की आजादी की कल्पना महिला दिवस पर तो ठीक नहीं ही है और न ही ये कि किराए की कोख को सिर्फ ‘कोख’ समझने की बात सीरीज की ही मुख्य किरदार कहे। प्रगतिशील कहानियां कहने वाली एक लेखक निर्देशक जिसने ‘लिपस्टिक अंडर बुर्का’ बनाकर आने वाले कल में बेहतर कहानियों की उम्मीद जगाई हो, वह करियर के पहले ही राउंड में बाजार के दबाव में यूं हाफ जाएगी, अच्छा संकेत नहीं है।

Bombay Begums Review by Pankaj Shukla Alankrita Shrivastava Netflix india puja bhatt amruta subhash
बॉम्बे बेगम्स - फोटो : अमर उजाला, मुंबई

वेब सीरीज ‘बॉम्बे बेगम्स’ देखने के आकर्षण कई हैं। पहला तो पखवाड़ा भर पहले ही 49 साल की हुईं पूजा भट्ट ही हैं। पूजा भट्ट सिनेमा में ताजगी बनकर आईं थीं और इन दिनों अपने तीस साल के करियर के सबसे निम्न बिंदु पर हैं। बतौर अदाकारा उनको एक साजिशें करने वाली महिला के तौर पर देखना उनके अभिनय के लिए भले चुनौती हो पर उन पर ये किरदार किसी भी तरह से जंचता नहीं है। ये बात और है कि समय के साथ उनके भावों में बिना अभिनय किए ही एक तरह का कसैलापन नजर आता है, पर ये उनका जिंदगी से हुए दो दो हाथ का स्कोर कार्ड भी हो सकता है जो उनके चेहरे का स्थायी भाव बन चुका हो। सीरीज की कास्टिंग में अगर किरदार बदलकर रानी के किरदार में शहाना गोस्वामी, फातिमा के किरदार में अमृता सुभाष और लिली के किरदार में पूजा भट्ट को रखा गया होता तो पूरे कथानक का असर ही कुछ और होता, लेकिन शायद सीरीज पूजा भट्ट को ही ध्यान में रखकर अलंकृता ने लिखी हो।

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Bombay Begums Review by Pankaj Shukla Alankrita Shrivastava Netflix india puja bhatt amruta subhash
बॉम्बे बेगम्स - फोटो : अमर उजाला, मुंबई

किरदारों के कलेवर और कास्टिंग के बुझे तेवरों के अलावा वेब सीरीज ‘बॉम्बे बेगम्स’ का तीसरा कमजोर पहलू है इसका तकनीकी पक्ष। अगर किसी कहानी के नाम में ही शहर जुड़ा है तो फिर शहर उस कहानी में चलता फिरता दिखना जरूर चाहिए। फर्जी से लॉन्ग शॉट्स इंटरकट्स में डालकर बॉम्बे नहीं समझाया जा सकता। ऐसे में तो ये कहानी बैंगलोर बेगम्स या चेन्नई बेगम्स भी हो, किसी को क्या फर्क पड़ता है। लिली कहां रहती है किसी को फर्क नहीं पड़ता। रानी जहां रहती है, वहां आसपास क्या होता है, इसे जानने से फर्क जरूर पड़ता है। अलंकृता को या कम से कम नेटफ्लिक्स की टीम की क्रिएटिव टीम को भारत दर्शन जरूर करना चाहिए। कानपुर की लड़की बनना परदे पर प्लाबिता बोरठाकुर के हिस्से आना कास्टिंग की एक और बड़ी चूक है। पूरी कहानी को आध्या आनंद के किरदार के नजरिए से दिखाने में भी थोड़ी अति हो गई है। इतना सब वॉयस ओवर में ही बताना हो तो फिर वेब सीरीज की बजाय पॉडकास्ट क्यूं बेहतर नहीं है?

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Bombay Begums Review by Pankaj Shukla Alankrita Shrivastava Netflix india puja bhatt amruta subhash
बॉम्बे बेगम्स - फोटो : अमर उजाला, मुंबई

बागी होना और बदतमीज होना दो अलग अलग बातें हैं। मुंबई के तमाम लेखकों को अब भी इन दोनों का फर्क समझ नहीं आया है। हो सकता है वह ये सब अपने आसपास में ही जीता हुए पाते हों लेकिन इन सबके चक्कर में परिवार, समाज और देश के कुछ बेहद अहम मसले इन कहानियों में बेहद हल्के तरीके से जाया हो रहे हैं। अलंकृता अगर जोया अख्तर बनने की कोशिश नहीं करेंगी तो इसमें उनका अपना और सिनेमा दोनों का फायदा है। उनकी ओरीजनल मेकिंग बहुत उम्दा रही है, उस पर दूसरों का मुलम्मा लगाने की जरूरत है नहीं। उम्मीद की जानी चाहिए कि लगातार दो गलतियों को वह सबक की तरह लेंगी, और इसे अपनी आदत नहीं बना लेंगी।

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