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Raya and the Last Dragon Review: संगठन में शक्ति समझाती बेहतरीन एनीमेशन फिल्म, बच्चों को जरूर दिखाएं

Fri, 05 Mar 2021 03:45 PM IST
Pankaj Shukla पंकज शुक्ल
Updated Fri, 05 Mar 2021 03:45 PM IST
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Raya and the Last Dragon movie review: by Pankaj Shukla Walt Disney Don hall Kelly Marie Tran Awkwafina
राया एंड द लास्ट ड्रैगन - फोटो : अमर उजाला

Movie Review: राया एंड द लास्ट ड्रैगन


निर्देशक: डॉन हाल, कार्लोस लोपेज एस्त्रादा
आवाजें: केली मैरी ट्रान, ऑक्वाफिना, जेमा चैन, डैनियल डे किम, सैंड्रा ओ, बेनेडिक्ट वॉन्ग
लेखक: क्वी ग्यूयेन, एडेल लिम
निर्माता: वॉल्ट डिजनी पिक्चर्स, वॉल्ट डिजनी एनीमेशन स्टूडियोज
रेटिंग: ****

साल भर होने को आया, जब लोग सिनेमाघरों में बुक्का फाड़कर हंसे होंगे, रोए होंगे या फिर पड़ोस में बैठे साथी के कंधे पर सिर रखकर सो गए होंगे। हाथों में पॉपकॉर्न और दिल में सिनेमा का जुनून धीरे धीरे फिर जाग रहा है। साथ ही जाग रहा है सिनेमा की कहानियों का एक नया संसार, जहां नायक और खलनायक अब शायद कोई नहीं होगा। सब इंसान होंगे। सब कुछ बड़ा करना चाहेंगे। सब साथ मिलकर इसे पाना चाहेंगे। सबकी अपनी अपनी कमजोरियां होंगी और सबकी अपनी अपनी ताकतें होंगी। और, सब चाहेंगे कि दूर दूर रहने की बजाय जितना संभव हो सके, सब साथ रहें। साथ साथ आगे बढ़ें और साथ साथ विकास करें। पढ़ने में भले आपको ये भारतीय सनातन दर्शन लगे लेकिन डिजनी की नई फिल्म ‘राया एंड द लास्ट ड्रैगन’ की कहानी यही है।

Raya and the Last Dragon movie review: by Pankaj Shukla Walt Disney Don hall Kelly Marie Tran Awkwafina
राया एंड द लास्ट ड्रैगन - फोटो : अमर उजाला, मुंबई

फिल्म ‘राया एंड द लास्ट ड्रैगन’ की कहानी एक काल्पनिक क्षेत्र कुमांड्रा की कहानी है। कुमांड्रा के लोग कभी ड्रैगनों के साथ खुशहाल थे। फिर इस इलाके में फैले एक रोग ने सब कुछ बदल दिया। ड्रैगनों ने अपनी कुर्बानी देकर इंसानों को बचाया। पर इंसानों को फिर भी उनकी कुर्बानी का सम्मान करना नहीं आया। अब सब अलग अलग रहते हैं। लेकिन उम्मीद की एक किरण अभी बाकी है और राया का हौसला भी। भरोसा करने और दूसरों का भरोसा अपने ऊपर कायम होने देने की अंतर्धारा के साथ आगे बढ़ती फिल्म में राया की पलटन आखिरकार अंसभव को संभव को कर ही दिखाती है। फिल्म ‘राया एंड द लास्ट ड्रैगन’ की कहानी ही इसकी असल हीरो हैं और इसके लिए इसके लेखकों ने पूरे नंबर हासिल किए हैं।

Raya and the Last Dragon movie review: by Pankaj Shukla Walt Disney Don hall Kelly Marie Tran Awkwafina
राया एंड द लास्ट ड्रैगन - फोटो : अमर उजाला, मुंबई

फिल्म ‘राया एंड द लास्ट ड्रैगन’ देखने का उत्साह सिर्फ बच्चों में ही नहीं रहा है। बड़ों ने भी इसके ट्रेलर के समय से ही इसकी राह तकनी शुरू कर दी थी। ये और बात है कि इस बार डिजनी की इस नई फिल्म का वैसा हल्ला नहीं मचा, जैसा आमतौर पर हाल के बरसों में मचता रहा है। फिल्म शानदार है और पूरे परिवार के साथ थिएटर में जाकर देखने लायक फिल्म है। दक्षिण एशियाई कहानियों को हॉलीवुड में मिलती तवज्जो, इस क्षेत्र के कलाकारों और तकनीशियनों पर हॉलीवुड स्टूडियोज की लगातार पैनी होती नजर का कमाल है ये फिल्म।

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Raya and the Last Dragon movie review: by Pankaj Shukla Walt Disney Don hall Kelly Marie Tran Awkwafina
राया एंड द लास्ट ड्रैगन - फोटो : अमर उजाला, मुंबई

एनीमेशन फिल्म का असली आनंद इसके किरदारों को मिलने वाली आवाजों में होता है। फिल्म के अंग्रेजी संस्करण की आवाजें इस फिल्म का ग्राफ ऊंचा करती हैं। केली मेरी ट्रान की वापसी भले आवाज के साथ हुई हो लेकिन डिजनी कैंप में उन्हें फिर से देखना संकेत देता है कि आने वाले दिनों में कुछ नई चौंकाने वाली जानकारी भी उन्हें लेकर सामने आ सकती है। राया के किरदार के लिए उनकी आवाज बिल्कुल फिट है। ड्रैगन सिसु की आत्मा को मिले शरीर को संबल ऑक्वाफिना की आवाज से मिलता है और टुक टुक की कल्पना एलेन टुडिक की आवाज के बिना करना भी मुश्किल लगता है। इन सारी आवाजों ने मिलकर फिल्म ‘राया एंड द लास्ट ड्रैगन’ देखने का आनंद दोगुना किया है।

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Raya and the Last Dragon movie review: by Pankaj Shukla Walt Disney Don hall Kelly Marie Tran Awkwafina
राया एंड द लास्ट ड्रैगन - फोटो : अमर उजाला, मुंबई

फिल्म ‘राया एंड द लास्ट ड्रैगन’ तकनीकी रूप से बहुत ही उन्नत फिल्म है। शुरू के दृश्यों में ही चाहे वह टुकटुक के किरदार का परदे पर पहली बार आना हो, राया का स्पिरिट स्टोन तक पहुंचने के दौरान पानी का सीढ़ियों पर ऊपर की तरफ चढ़ना हो, रेगिस्तान के दृश्य हों या फिर सिसू का इतराना, इठलाना, हर दृश्य दर्शकों को फंतासी की एक अलग दुनिया में स्थानांतरित करने में कामयाब है।। फिल्म का पार्श्वसंगीत इसकी कहानी का मजबूत सहारा है और एनीमेशन टीम ने किरदारों को मानवीय बनाने में बहुत मेहनत की है। खासतौर से किरदारों के आसपास के वातावरण, दृश्यों के भीतर की लाइटिंग और किरदारों के आसपास कैमरे की प्लेसिंग यूं की गई है जैसे फिल्म असल कलाकारों के साथ ही बनी हो।

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