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बाइस्कोप: ‘चक दे इंडिया’ की रिलीज को पूरे हुए 13 साल, ऐसे हुई यशराज में ‘आउटसाइडर्स’ की एंट्री

Mon, 10 Aug 2020 01:59 AM IST
Pankaj Shukla पंकज शुक्ल
Updated Mon, 10 Aug 2020 01:59 AM IST
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chak de india this day that year series by pankaj shukla 10 august 2007 bioscope shahrukh Aditya
चक दे इंडिया - फोटो : रोहित झा, अमर उजाला

एक जैसी कहानियों वाली बॉक्सिंग की फिल्मों 'साला खड़ूस', 'दंगल' और 'सुल्तान' से बहुत पहले मिथुन चक्रवर्ती को लेकर निर्देशक राज एन सिप्पी ने फिल्म बनाई थी 'बॉक्सर'। और, उससे भी पहले की जो शानदार स्पोर्ट्स फिल्म मुझे याद आती है वह है निर्देशक प्रकाश झा की फुटबॉल पर बनी फिल्म 'हिप हिप हुर्रे'। इधर हाल के बरसों में तो ढेर स्पोर्ट्स फिल्में बनी हैं, जैसे 'भाग मिल्खा भाग', 'गोल्ड', 'एम एस धोनी- द अनटोल्ड स्टोरी', 'मैरी कॉम' 'इकबाल' और थोड़ा और दूर तक निकल जाएं तो आमिर खान की 'लगान'। लेकिन आज के बाइस्कोप में जिस स्पोर्ट्स फिल्म का मैं जिक्र करने वाला हूं उसका नाम है, 'चक दे इंडिया'। पंजाबी फौजों की मुगल सेनाओं से लड़ाई के वक्त लगाया जाने वाला जयघोष है 'चक दे फट्टे'। नदियों पर बने लकड़ी के पुलों के पटरे उखाड़ लेने के लिए होने वाली ये पुकार बहुत ही लोमहर्षक होती रही है और उतना ही रोमांचित कर देने वाली फिल्म रही, 'चक दे इंडिया'।



chak de india this day that year series by pankaj shukla 10 august 2007 bioscope shahrukh Aditya
Chak De India - फोटो : file photo

अखबार से आया आइडिया
हिंदी सिनेमा की चार ट्रेंड सेटर फिल्में 'कंपनी', 'बंटी और बबली', 'खोसला का घोसला' और 'चक दे इंडिया' एक ही लेखक जयदीप साहनी ने लिखी हैं। जयदीप के खाते में हिंदी सिनेमा की दो बड़ी फ्लॉप फिल्में भी दर्ज हैं, 'आ जा नचले' और 'रॉकेट सिंह- सेल्समैन ऑफ द ईयर'। माधुरी की सेकेंड इनिंग्स की शुरुआत खराब करने वाली फिल्म मानी जाती है, 'आ जा नचले'। लेकिन, फिलहाल हम बात करते हैं 'चक दे इंडिया' की। जयदीप ने कहीं अखबार में एक छोटी सी खबर पढ़ी 2002 राष्ट्रमंडल खेलों में भारतीय महिला हॉकी टीम के गोल्ड मेडल जीतने की। इस खबर को तान कर उन्होंने फिल्म लिख तो ली लेकिन जब इसे लेकर वह टीम के कोच महाराज कृष्ण कौशिक के पास पहुंचे तो उन्होंने जयदीप को मीर रंजन नेगी से मिलने को कहा। नेगी पर 1982 एशियाई खेलों में पाकिस्तान के हाथों जानबूझकर हार जाने का आरोप लगा था। 2002 राष्ट्रमंडल खेलों में और उससे पहले 1998 एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक जीतने वाली भारतीय महिला हॉकी टीम के नेगी गोलकीपिंग कोच रहे।

जयदीप कहते हैं, 'मैं कई वर्षों से यह कहानी कहना चाहता था। जब 'बंटी और बबली' के बाद आदि (आदित्य चोपड़ा) ने मुझसे पूछा कि अब आगे मैं क्या करना चाहता हूं, मैंने उनको बताया कि मैं ये फिल्म करना चाहूंगा जो महिला खिलाड़ियों और शेष भारत के बीच एक तरह का पुल बना सकती है। मैं जैसे-जैसे अपने अनुभवों और अहसासो  के बारे में उनको सुनाता गया, वह मेरी बात पर सहमत होते चले गए। आदि ने यह भी कहा था कि अगर हम चीजों को सही ढंग से पेश कर पाए तो वाकई एक बेहतरीन फिल्म बनेगी।'

chak de india this day that year series by pankaj shukla 10 august 2007 bioscope shahrukh Aditya
chak de india

जॉन से सलमान से शाहरुख
फिल्म की स्क्रिप्ट जब बनकर तैयार हुई तो बताते हैं कि फिल्म में महिला हॉकी टीम के कोच के किरदार कबीर खान को निभाने के लिए सबसे पहले जॉन अब्राहम का नाम ही आदित्य चोपड़ा के दिमाग में आया। फिल्म 'धूम' में लोगों ने उन्हें पसंद भी खूब किया था लेकिन बात बनी नहीं। फिर बात शाहरुख खान पर आई, लेकिन शाहरुख ने पहली बार तो ये फिल्म इसलिए करने से मना कर दी क्योंकि उस वक्त वह करण जौहर की फिल्म 'कभी अलविदा न कहना' में व्यस्त थे। आदित्य चोपड़ा ने फिर इसके बाद सलमान खान से इस रोल के लिए बात की। सलमान खान फिल्म के लिए साइन भी हो गए लेकिन कहते हैं कि फिल्म के निर्देशक शिमित अमीन से सलमान खान की पटी नहीं। और, लौट के ये फिल्म फिर शाहरुख खान के पास ही आ गई।

शाहरुख खान ने की कड़ी मेहनत
शाहरुख खान पहली बार में ही ये फिल्म करना चाहते थे क्योंकि हॉकी उनका पसंदीदा खेल रहा है। फिल्म की रिलीज से पहले एक बातचीत में उन्होंने कहा, 'मुझे लगता है कि खेल के तौर पर हॉकी को बहुत ही शातिराना तरीके से हमारे देश में उपेक्षित कर दिया गया है। मैं कॉलेज में हॉकी खेलता था और सच पूछें तो मैं ठीक ठाक खेलने वाला खिलाड़ी था। कबीर खान का किरदार एक तरह से मेरे लिए अपने अतीत को फिर से जीने जैसा ही रहा।' शाहरुख खान ने कबीर खान के रोल में ढलने के लिए जबर्दस्त मेहनत की और ये परदे पर दिखता भी है।

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chak de india this day that year series by pankaj shukla 10 august 2007 bioscope shahrukh Aditya
चक दे इंडिया - फोटो : अमर उजाला, मुंबई

फिल्म ने शाहरुख को उनके करियर का सातवां फिल्मफेयर अवॉर्ड दिलाया। फिल्म को संपूर्ण मनोरंजन देने वाली सर्वश्रेष्ठ फिल्म का राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार भी मिला। साल 2007 में शाहरुख खान की अपनी होम प्रोडक्शन फिल्म 'ओम शांति ओम' ने भी खूब धमाल मचाया था। उस साल 'ओम शांति ओम' करीब 150 करोड़ रुपये की कमाई करके नंबर वन पर रही थी और 109 करोड़ रुपये की कमाई करके फिल्म 'चक दे इंडिया' रही थी तीसरे नंबर पर। इन दोनों के बीच जो फिल्म थी उसका नाम था, 'वेलकम'। फिल्म 'चक दे इंडिया' में शाहरुख खान की क्लाइमेक्स में बोली गई स्पीच 'सत्तर मिनट' खूब मशहूर हुई और साथ ही मशहूर हुआ फिल्म में शाहरुख खान का डॉयलॉग, 'हर टीम में बस एक ही गुंडा हो सकता है और इस टीम का गुंडा मैं हूं।'




ऐसे हुई शिमित अमीन की यशराज फिल्म्स में एंट्री
जयदीप साहनी की तरह ही फिल्म के निर्देशक शिमित अमीन का भी किसी फिल्मी परिवार से ताल्लुक नहीं है। जयदीप बताते हैं, "शिमित और मैं तब से फ्रेंड हैं, जब मैं 'कंपनी' लिख रहा था और वह राम गोपाल वर्मा के ऑफिस में 'भूत' फिल्म की एडिटिंग कर रहे थे। लेकिन 'अब तक छप्पन' देखने के बाद यह आदि का ही भरोसा था कि शिमित को इस फिल्म का डायरेक्टर होना चाहिए। उस शुरुआती स्टेज पर बतौर प्रोड्यूसर और डायरेक्टर आदि व शिमित ने फिल्म में जो यकीन जाहिर किया, वह मेरे लिए बड़ा सुकून देने वाला था क्योंकि मुझे पता था कि मैं अपनी राइटिंग उन लोगों के हाथों में सौंप रहा हूं, जिन पर मुझे भरोसा है और जिनका मैं सम्मान करता हूं।"

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चक दे इंडिया - फोटो : अमर उजाला, मुंबई

चक दे गर्ल्स
फिल्म 'चक दे इंडिया' के लिए जिन 16 अभिनेत्रियों का चयन किया गया वे सब सामूहिक रूप से 'चक दे गर्ल्स' के नाम से मशहूर रही हैं और अब भी इन्हें इसी नाम से पुकारा जाता है। इसी साल मार्च के महीने में इनमें से कुछ अभिनेत्रियां करिश्मा कपूर की पहली वेब सीरीज 'मेंटलहुड' की स्क्रीनिंग पर दिखी तो लोगों में इतने साल बाद भी इनके साथ सेल्फी खिंचाने का दिलचस्प क्रेज दिखा। फिल्म में जो 16 अभिनेत्रियां परदे पर खिलाड़ियों के तौर पर दिखाई दीं, उनमें शामिल हैं, विद्या मालवडे, अनाइता नायर, तान्या अबरोल, शिल्पा शुक्ला, आर्या मेनन, शुभी मेहता, चित्रांशी रावत, किमी लालडावला, मैसोचॉन जिमिक, सैंडिया फुरटाडो, निकोला सिक्वेरा, सागरिका घाटगे, किंम्बरली मिरांडा, सीमा आजमी, रेनिया मैस्करहनस और निशा नायर। इनमें से चित्रांशी, सैंडिया और रेनिया का चयन तो सिर्फ इसीलिए हुआ कि वे हॉकी बढ़िया खेल लेती थीं। स्क्रीन अवार्ड्स में इन सारी लड़कियों को चक दे गर्ल्स के तौर पर मंच पर बुलाया गया और सबको सामूहिक रूप से बेस्ट सपोर्टिंग एक्ट्रेसेस का पुरस्कार दिया गया। फिल्म में दिखाया गया है कि सागरिका घाटगे के किरदार का एक क्रिकेटर के साथ अफेयर चल रहा है और निजी जिंदगी में सागरिका ने क्रिकेटर जहीर खान से ही शादी की है।



कांदिवली से चर्चगेट, चार महीने रोजाना
फिल्म 'चक दे इंडिया' के लिए सेलेक्ट हो जाने के बाद इन सारी लड़कियों को एक साथ रखा गया और वहां से रोजाना सुबह चार बजे उठकर इन लोगों को चर्चगेट रेलवे स्टेशन के पास स्थित स्टेडियम में प्रैक्टिस करने जाना होता था। ये सिलसिला लगातार चार महीने चला। हर रोज दिन भर ट्रेनिंग होती। स्क्रिप्ट रीडिंग होती और इन लोगों को देर शाम ही फुर्सत मिल पाती थी। इस ट्रेनिंग के दौरान नेगी और कौशिक ने भी खूब मेहनत की। नेगी ने तो फिल्म की तैयारियों के लिए दिन रात एक कर दिया। फिल्म रिलीज होने के बाद सबसे ज्यादा शोहरत भी उन्हीं के हिस्से में आई, हालांकि मुंबई एयरपोर्ट पर कस्टम विभाग में तैनाती के दौरान बाद में उन पर संगीन आरोप भी लगे। फिल्म के बड़े हिस्से की शूटिंग ऑस्ट्रेलिया में हुई और वहां भारतीय खिलाड़ियों के साथ खेलने के लिए करीब 50 महिला हॉकी खिलाड़ी और जुटाए गए। शूटिंग के दौरान स्टेडियम में मौजूद रहने के लिए करीब हजार लोगों की भीड़ भी किराए पर बुलाई गई थी।

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