किस्सा थोड़ा पुराना है लेकिन यहां बताना जरूरी है। मध्यप्रदेश के जबलपुर में एक फिल्म की शूटिंग के दौरान एकाएक किसी ऐसे बंदे की जरूरत आन पड़ी जिसे हिंदी आती हो। पता चला पी एल श्रीवास्तव नाम का लड़का है जो लिखने पढ़ने में तेज है। उसे बुलाया गया। लोगों को उसका काम पसंद आया और वह फिल्म यूनिट के साथ बंबई चला आया है। ये बात है सन 1930 के आसपास की। बाद में इस लड़के ने अपने सरनेम से श्रीवास्तव उड़ाया है और बन गया पी एल संतोषी। वही पी एल संतोषी जिन्होंने हिंदी सिनेमा को दिया 1946 में फिल्म ‘हम एक हैं’ में दिया एक नया सितारा, देव आनंद। देव आनंद की ही बनाई फिल्म ‘मैं सोलह बरस की’ हमारे आज के बाइस्कोप की फिल्म है, लेकिन इस फिल्म से डेब्यू करने वाले सितारों और इस फिल्म को बनाने की वजह पर बात करने से पहले थोड़ी सी बात पी एल संतोषी की और कर लेते हैं।
बाइस्कोप: गोल्डन जुबली की यात्रा पर निकले देव आनंद, वैंकूवर में किया इस लड़की को हीरोइन बनाने का एलान
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पी एस संतोषी का बंबई में कामकाज सेट हो गया तो वह दक्षिण भारत भी सिनेमा के ही काम से जाने लगे । वहां चेन्नई में उनका एक खूबसूरत महिला से इश्क हुआ। पहले से शादीशुदा संतोषी ने एक और शादी कर ली। इस शादी से जो बेटा हुआ उसका नाम है, राजकुमार संतोषी। राजकुमार संतोषी ने अपने पिता से बहुत कुछ सीखा लेकिन उनको अब भी ये दर्द सालता है कि अपने पिता के आखिरी दिनों में वह उनकी कोई सेवा नहीं कर पाए। मजबूरी में ठाणे रहने चले गए पी एल संतोषी का निधन बहुत ही कष्टदायक स्थिति में के ई एस अस्पताल में हुआ। लेकिन, उनके बनाए हीरो देव आनंद ने एक सबक अपने पहले डायरेक्टर से ये सीखा कि जब जीवन का बसंत हो तो बरसात के दिनों के लिए भरपूर अनाज बचाकर जरूर रख लेना चाहिए। देव आनंद ने यही सिनेमा में भी किया, उन्होंने अपने कामयाबी के दिनों में अभिनय और निर्देशन से इतना पैसा कमाया कि आखिर में फिर वह फिल्में सिर्फ अपना शौक पूरा करने के लिए बनाते रहे। फिल्म चले ना चले, इसकी फिक्र उन्होंने की ही नहीं।
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आज के बाइस्कोप की फिल्म ‘मैं सोलह बरस की’ कहानी भी ऐसी ही है। आपको शायद जानकर यकीन न हो लेकिन देव आनंद ने अपने आखिरी दिनों में अपने हर परिचित को बुला बुलाकर कुछ न कुछ यादगार के तौर पर कुछ न कुछ देना शुरू किया था। वह चाहते थे कि उनके चाहने वाले उनकी कोई न कोई निशानी अपने पास जरूर रखें और आने वाली नस्लों को बताएं कि उन्होंने कितने सदाबहार इंसान के साथ यादें संजोई हैं। जी हां, देव आनंद सदाबहार इंसान पहले थे, नामचीन अभिनेता, निर्माता और निर्देशक उसके बाद में। ना जाने कितने चेहरों को उन्होंने बड़े परदे पर मौका दिया। उनकी नजर पारखी लंबे समय तक रही। वह भीड़ में भी हीरा पहचान लेते थे।
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ये बात 1995 की है। देव आनंद ने सिनेमा में अपने पचास साल पूरे होने का जश्न पूरी दुनिया घूम कर मनाने का फैसला किया। वो मुंबई से निकले तो फिर हर उस जगह गए जहां उनके दीवाने रहते थे। कुछ लोगों से उन्होंने फोन पर पहले से ही बात भी कर रख थी तो जहां भी वह जाते वहां तुरत फुरत एक छोटा मोटा कार्यक्रम तैयार हो जाता। कोई उनके बोले गए संवाद सुनाता तो कोई उनकी नकल उतारता। 1923 में पैदा हुए देव आनंद 1995 में 72 साल के होने के बावजूद पूरी तरह सक्रिय थे और बिना किसी के सहारे के चलते फिरते थे और अकेले ही सैर पर भी निकल जाते थे। तो इस स्वर्ण जयंती यात्रा के दौरान वह कनाडा, अमेरिका और भी तमाम देशों में घूमे और इसी दौरान वैंकूवर के फ्रेजरव्यू बैंक्वेट ह़ॉल में एक कमाल हो गया।
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हुआ यूं कि देव आनंद के तमाम चाहने वालों ने उनके खैरमकदम के लिए वहां एक पार्टी रखी थी और एक लड़की ने वहां देव आनंद की फिल्मों के हिट गानों पर ऐसा डांस किया कि लोग हैरान रह गए। उसका नाचना बंद हुआ तो लोग देर तक खड़े होकर तालियां बजाते रहे और लोगो को देख देव आनंद से भी रहा नहीं गया। वह खड़े हुए, इशारे से बच्ची को अपने पास बुलाया और वहीं सबके सामने एलान कर दिया कि वह उसे अपनी अगली फिल्म की हीरोइन बना रहे हैं।
‘मैं सोलह बरस की’ तब तक न कहानी तय थी, न बाकी कोई स्टार कास्ट। देव आनंद ने इससे पहले एक बहुत ही खूब खराबे वाली फिल्म ‘गैंगस्टर’ बनाई थी और एक फिल्म ‘रिटर्न ऑफ ज्वैल थीफ’ वह बना रहे थे। तो उन्होंने तय किया कि इसके बाद जो फिल्म इस नई लड़की के साथ वह बनाएंगे, उसमें नफरत, अदावत और बगावत की कोई जगह न होगी, वह फिल्म बस प्यार मोहब्बत की बातें करेगी। सुरीले तराने सुनाएगी और लोगों को एक बदलती रंगत का एहसास कराएगी। देव आनंद ने अभिनेत्री तनूजा से बात की। नवकेतन में उनकी ये तीन दशक बाद की वापसी की फिल्म बनी। तमाम सीनियर सितारे भी वह इस फिल्म में ले आए, मसलन ए के हंगल, सत्येन कप्पू, शशिकला, उर्मिला भट्ट आदि। लेकिन, हीरो? फिल्म की जो हीरोइन देव आनंद ने वैंकूवर में तलाशी उसका नाम था, नीरू बाजवा और हीरो का मौका इस फिल्म में मिला जस अरोरा को।
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