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बाइस्कोप: जब मौत को झांसा देकर लौट आए अमिताभ बच्चन, इस फिल्म में फिल्माया गया असल जिंदगी का ये सीन

Fri, 26 Jun 2020 06:18 PM IST
Pankaj Shukla पंकज शुक्ल
Updated Fri, 26 Jun 2020 06:18 PM IST
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major saab movie in bioscope series by pankaj shukla 26 june 1998 amitabh bachchan ajay devgn sonali
मेजर साब - फोटो : अमर उजाला, मुंबई

अमिताभ बच्चन को बीबीसी ने पिछली सदी में एक ऑनलाइन पोल के जरिए बीती सदी का महानायक चुना। अमिताभ बच्चन का आभा मंडल है भी इस पदवी के लायक। ये और बात है कि इस तमगे को लेकर वह खुद गाहे बेगाहे चुटकी जरूर लेते रहते हैं। 21वीं सदी के अमिताभ ज्यादा परिपक्व, संतुलित प्रतिक्रिया देने वाले और अपने मिलने वालों को छोटी छोटी चीजों से खुश करने वाले बिग बी हैं। इंटरव्यू इन दिनों वह आमने सामने मिलकर नहीं देते। ये और बात है कि उनकी अपनी प्रोडक्शन कंपनी की बनाई फिल्म मेजर साब जब बॉक्स ऑफिस पर लड़खड़ाई थी तो उन्होंने खुद पत्रकारों को फोन किए, उनसे बातें की और फिल्म के खिलाफ हो रहे कथित दुष्प्रचार को रोकने के लिए मदद भी मांगी थी।



अमिताभ की अपनी कंपनी एबीसीएल (अमिताभ बच्चन कॉरपोरेशन लिमिटेड) की प्लानिंग के हिसाब से फिल्म मेजर साब ही उनकी पांच साल के लंबे ब्रेक के बाद रिलीज होने वाली ‘कमबैक’ फिल्म होनी थी लेकिन होनी ने उनकी कमबैक कराई एक फ्लॉप फिल्म मृत्युदाता से। इन दोनों फिल्मों के निर्माता भी अमिताभ बच्चन ही थे। ये वो समय था जब अमिताभ बच्चन की किस्मत शायद उनसे रूठी हुई थी, वो जो कुछ कर रहे थे, उसका परिणाम उल्टा हो रहा था और यही वह दौर है जब अमिताभ बच्चन को उनके किसी भरोसे के सलाहकार ने मिस वर्ल्ड प्रतियोगिता आयोजित कराने की सलाह दे दे दी थी। इस प्रतियोगिता के दो साल बाद रिलीज हुई फिल्म मेजर साब ही हमारे आज के बाइस्कोप की फिल्म है।

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मेजर साब - फोटो : अमर उजाला, मुंबई

फिल्म मेजर साब 26 जून 1998 को रिलीज हुई। रिलीज इसे हफ्ता भर और पहले होना था लेकिन सेना ने इसमें उनके किरदार की वेशभूषा पर आपत्ति जता दी थी सो मामला हफ्ता भर और लटक गया। हिंदी सिनेमा में किसी फिल्म की रिलीज से हफ्ता पंद्रह दिन पहले विवाद होने का सिलसिला भी इसी फिल्म से शुरू हुआ माना जाता है। फिल्म में अमिताभ बच्चन की दाढ़ी को लेकर हुआ विवाद फिल्म की शुरूआत में इस बाबत जोड़ी गई उनकी सफाई से दूर हुआ और किसी तरह फिल्म रिलीज को तैयार हुई। मुंबई में फिल्म की स्क्रीनिंग में होता यूं था कि कुछ दर्शक एकदम से जत्था बनाकर फिल्म के बीच से निकल लेते थे। दूसरों को लगता कि फिल्म बोर कर रही है। ऐसा तब और होता जब किसी स्पेशल स्क्रीनिंग में फिल्म समीक्षक या पत्रकार भी मौजूद होते। अमिताभ को लगा कि ये किसी साजिश के तहत हो रहा है।

उन दिनों एशियन एज अखबार में काम करने वाले मोहम्मद वजीहुद्दीन अपने ब्लॉग में इस मामले का जिक्र करते हैं। फिल्म मेजर साब को लेकर ही उन्हें पहली बार अमिताभ बच्चन से बातचीत का मौका मिला। कहने को तो एशियन एज में तब अफसाना अहमद ही सिनेमा की समीक्षाएं और बड़े सितारों के इंटरव्यू करती थीं लेकिन अखबार के तब के संपादक एम जे अकबर ने बजाय अफसाना के वजीहुद्दीन की ड्यूटी अमिताभ का इंटरव्यू करने के लिए लगाई। इसी ब्लॉग में वजीहुद्दीन ने खुलासा किया कि अमिताभ अपनी फिल्म मेजर साब के खिलाफ चल रहे ‘षडयंत्रों’ से नाखुश थे और इसी वजह से उनका ये इंटरव्यू होना था। इंटरव्यू हुआ और अगले दिन पहले पन्ने पर छपा भी। इससे फिल्म को कितना फायदा हुआ, इसका अंदाजा तो अमिताभ बच्चन या उनकी फिल्म कंपनी को ही होगा, लेकिन ये तय था कि अखबार में छपे के असर का उन्हें अंदाजा था।


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मेजर साब - फोटो : अमर उजाला, मुंबई

अमिताभ बच्चन फिल्म के प्रोड्यूसर थे और इस बात का इल्म फिल्म में काम करने वाले कलाकारों और तकनीशियनों दोनों को था। फिल्म में उनकी पत्नी का किरदार करने वाली नफीसा अली ने पांच साल पहले अपनी एक ट्वीट में उन्हें महान निर्माता लिखा था। और, टीनू आनंद जिन्होंने इस फिल्म में पहली बार अपना असली नाम वेरिंदर राज आनंद इस्तेमाल किया था, उन्हें भी अच्छे से पता था कि फिल्म के निर्माता अमिताभ बच्चन हैं। इसके बावजूद टीनू आनंद ने फिल्म की शूटिंग के दौरान एक बार अमिताभ से ऊंची आवाज में बात की और नतीजा दुनिया के सामने हैं। टीनू ने मेजर साब के बाद सिर्फ एक फिल्म बनाई वह भी अभिनेता सुनील शेट्टी के साथ। इसके बाद से हर दूसरे तीसरे साल वह अपनी किसी पुरानी फिल्म का सीक्वेल का एलान करके सुर्खियां तो बटोर लेते हैं, फिल्म उनसे अब तक फिर कोई और बनने से रही।

अमिताभ बच्चन और टीनू आनंद का पहले पहले नाता बना था फिल्म कालिया से। टीनू इससे पहले शशि कपूर, ऋषि कपूर और नीतू सिंह को लेकर फिल्म दुनिया मेरी जेब में निर्देशित कर चुके थे और अपनी अगली फिल्म के लिए अमिताभ बच्चन के पीछे लगे हुए थे। अमिताभ बच्चन उन दिनों डॉन की शूटिंग कर रहे थे। टीनू खुद बताते हैं कि फिल्म कालिया सुनाने के लिए उन्हें अमिताभ बच्चन का कोई साल भर पीछा करना पड़ा। फिर एक दिन डॉन की शूटिंग के बीच उन्हें अमिताभ बच्चन का समय मिला।

टीनू आनंद ने पूरे आत्मविश्वास के साथ कालिया की कहानी सुनाई और कहानी खत्म करते ही पूछा कि कब शूटिंग शुरू कर सकते हैं। अमिताभ बच्चन ने हैरानी से कहा, लेकिन मैंने ये कब कहा कि मुझे कहानी पसंद है। टीनू ने तब अमिताभ का वो राज खोला जो कम लोगों को ही पता है। टीनू को साल भर के भीतर ये समझ आ गया था कि जब अमिताभ कहानी सुनते समय आसमान की तरफ देखें या अपने बालों में अंगुलियां फेरने लगें तो समझ लो कि फिल्म नहीं बनने वाली। टीनू ने ये बात बताई तो अमिताभ मुस्कुराए और उन्हें अजिताभ से मिलने के लिए कहकर अपनी उस दिन की शूटिंग में बिजी हो गए।

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मेजर साब - फोटो : अमर उजाला, मुंबई

टीनू आनंद के पिता इंदर राज आनंद मशहूर लेखक रहे हैं और अमिताभ के पिता हरिवंश राय बच्चन के मित्र भी। कालिया के सेट पर टीनू ने अमिताभ को अमित जी कहकर बुलाना शुरू किया तो खुद उन्होंने टीनू को बुलाकर इसके लिए क्लास लगाई और कहा कि घरेलू रिश्ते सेट पर आकर औपचारिकता में न बदलें तो ही बेहतर। इसके बाद से ही टीनू ने अमिताभ बच्चन को सार्वजनिक रूप से अमित कहना शुरू किया। लेकिन, इन्हीं टीनू ने फिल्म मेजर साब की शूटिंग के दौरान एक सीन अमिताभ बच्चन के कहने पर दोबारा शूट नहीं किया और यही बात अमिताभ को अच्छी नहीं लगी। मौके पर मौजूद लोग बताते हैं कि अमिताभ के दबाव डालने पर टीनू झल्ला पड़े थे और ये बात अमिताभ कभी नहीं भूले।

ये और बात है कि मेजर साब निर्देशित करने के लिए टीनू आनंद को एक तरह से पुचकार कर तैयार किया गया था। मेजर साब की शूटिंग जब राष्ट्रीय रक्षा अकादमी, खड्गवासला, पुणे में चल रही थी तब अमिताभ की मेहुल कुमार निर्देशित फिल्म मृत्युदाता सिनेमाघरों तक पहुंच चुकी थी। अमिताभ बच्चन की कंपनी एबीसीएल की तब निर्माणाधीन 10 फिल्मों में से एक मेजर साब के निर्देशक टीनू आनंद शुरू से चाहते थे कि मेजर साब ही अमिताभ बच्चन की कम बैक फिल्म हो। मृत्युदाता के फ्लॉप होने का टीनू की मानसिक सेहत पर खासा असर हुआ जिसने उनके शारीरिक स्वास्थ्य पर भी असर डाला। फिल्म मेजर साब की शूटिंग के समय टीनू आनंद एक दो बार तो ऐसे वक्त भी बीमार पड़े जब शूटिंग टाली नहीं जा सकती थी। लोग बताते हैं कि ऐसे मौकों पर अमिताभ बच्चन के कहने पर अजय देवगन ने उन दृश्यों की कमान संभाली।


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मेजर साब - फोटो : अमर उजाला, मुंबई

फिल्म मेजर साब में अभिषेक बच्चन ने भी काम किया। लेकिन, उनका काम था कैमरे के पीछे रहकर प्रोडक्शन के काम में हाथ बंटाना। और, इस काम में भी वह एक बार लोचा कर बैठे थे। हुआ यूं था कि फिल्म मेजर साब का एक गाना ऑस्ट्रेलिया में शूट होना था और अजय देवगन को एयरपोर्ट से लाने से लेकर होटल में ठहराने तक की जिम्मेदारी अभिषेक बच्चन को सौंपी गई थी। पहले तो अभिषेक एयरपोर्ट से अजय देवगन को लाने वाली टैक्सी बुक करना भूल गए। किसी तरह टैक्सी से अजय देवगन होटल पहुंचे तो अभिषेक को पता चला कि उन्होंने अजय देवगन के लिए पहले से कमरा बुक नहीं किया है और अब होटल में कोई कमरा खाली नहीं है। लिहाजा, अभिषेक ने अपना कमरा अजय देवगन को दिया और खुद आकर होटल की लॉबी में सोए।

अजय देवगन के लिए भी फिल्म अनोखा अनुभव रही। पहली बार उन्हें आर्मी कैडेट की तरह अपने बाल कटवाने पड़े। फिल्म में उनकी और सोनाली बेंद्रे की जोड़ी कैमरे के सामने फिट लगे, इसके लिए कई बार वह ऊंचे सोल वाले जूते पहन लिया करते थे। सोनाली फिल्म में बेहद खूबसूरत लगीं। अमिताभ और अजय की केमिस्ट्री भी लोगों को बहुत पसंद आई, हालांकि दोनों पहली बार किसी फिल्म में साथ काम कर रहे थे। इस फिल्म के तुरंत बाद दोनों अजय के पिता वीरू देवगन की बतौर निर्देशक पहली फिल्म हिंदुस्तान की कसम में भी नजर आए। फिल्म मेजर साब की कहानी में एक रईस बाप के बेटे वीरेंद्र को मजबूरी में एनडीए में दाखिला लेना होता है और वह चाहता है कि किसी तरह उसे यहां से निकाल दिया जाए। मेजर जसबीर सिंह राणा ये ताड़ लेता है और उसके मंसूबे कामयाब नहीं होने देता। दिक्कतें वहां शुरू होती हैं जब वीरेंद्र को शंकर नाम के एक बदमाश की बहन निशा से प्यार हो जाता है। फिल्म में दोनों पर फिल्माया गया ये गाना उन दिनों बहुत लोकप्रिय हुआ।

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