फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें

खलनायक को नायक बनाने की कोशिश करती है 'संजू', अब 'दाऊद' पर भी फिल्म बना लें हिरानी

Sat, 30 Jun 2018 04:20 PM IST
प्रकाश हिंदुस्तानी, अमर उजाला
प्रकाश हिंदुस्तानी, अमर उजाला Updated Sat, 30 Jun 2018 04:20 PM IST
विज्ञापन
movie review of film sanju by dr prakash hindustani
SANJU

हाथों की लकीरें भी गजब होती हैं - रहती तो मुट्ठी में हैं, पर काबू में नहीं रहती। यह संवाद सोच-समझकर संजू फिल्म में रखा गया होगा। परेश रावल और रणबीर कपूर की शानदार एक्टिंग के लिए यह फिल्म देखी जा सकती है। 47 साल की मनीषा कोइराला 58 साल के संजय दत्त की मां की भूमिका में हैं और अगर आपको यह देखना हो कि अगर आपके पास बेशुमार दौलत हो, तो कोई नशेड़ी, गंजेड़ी, भंगेड़ी, वेश्यावृत्ति का आदी, व्यभिचारी भी कहानी के बूते पर सहानुभूति खरीद सकता है।

movie review of film sanju by dr prakash hindustani
SANJU

संजू फिल्म इस बात की गवाह है कि अगर आपके पास बेशुमार दौलत हो, तो आप न केवल अपनी जीवनी लिखना-छपवा और बंटवा सकते है, बल्कि राजकुमार हिरानी से फिल्म भी बनवा सकते है। जो आदमी अपनी मां का न हुआ, बाप का न हुआ, बहन का न हुआ, दोस्त का न हुआ, प्रेमिका का न हुआ, पुरानी बीवियों ऋचा शर्मा और रिया पिल्लई का न हुआ, देश का नहीं हुआ, कैंसर से लड़ रही मां के अस्पताल के वार्ड में नशाखोरी करता रहा, खास दोस्त की होने वाली बीवी के साथ हमबिस्तर हो गया, वह आदमी भी इस नाम पर सहानुभूति बटोर लेता है कि उसकी जिंदगी कितने उतार-चढ़ाव से भरपूर है।
राजकुमार हिरानी के लिए अब दाऊद की कहानी पर फिल्म बनाना ही बाकी है, जिसके साथ भी इस अत्याचारी मुल्क भारत ने बहुत जुल्म किए और देश छोड़ने पर मजबूर कर दिया। पुलिस और रॉ तक उसके पीछे पड़ी है और वह बेचारा जैसे-तैसे क्रिकेट का सट्टा और दूसरे धंधे करके पापी पेट भर रहा है।

movie review of film sanju by dr prakash hindustani
sanju

राजकुमार हिरानी की यह फिल्म इसलिए अच्छी नहीं कही जा सकती कि इसमें ऐसे घृणित पात्र संजय दत्त के प्रति घृणा के बजाय सहानुभूति उभरने लगती है। असली सहानुभूति के पात्र तो उसके पिता, पूर्व मंत्री, सामाजिक कार्यकर्ता सुनील दत्त हैं। जिन्होंने हिरोशिमा से नागाशाकी तक और मुंबई से लेकर अमृतसर तक की शांति यात्राएं की थी, लेकिन जिन यात्राओं ने उन्हें जीते-जी मार डाला, वह थी उनके घर से 10 साल तक निरंतर कोर्ट, वकील और मीडिया से मिलने की जद्दोजहद।

विज्ञापन
विज्ञापन
movie review of film sanju by dr prakash hindustani
sanju

कोई व्यभिचारी व्यक्ति ही 300 से अधिक महिलाओं के साथ हमबिस्तर हो सकता है। वह कहता है कि इस आंकड़े में वेश्याओं के साथ हमबिस्तर होने का आंकड़ा शामिल नहीं है। दुनिया का कोई नशा ऐसा नहीं, जो उसने नहीं किया हो, लेकिन फिर भी वह महान है, क्योंकि फिल्म के निर्माता राजकुमार हिरानी है, जिन्होंने सुनील दत्त के आग्रह पर ही मुन्नाभाई एमबीबीएस बनाकर नशेड़ी संजय दत्त को सम्मान दिलवाया था।

विज्ञापन
movie review of film sanju by dr prakash hindustani
sanju

बेशक, इस फिल्म में कई मार्मिक दृश्य है। एक पिता का अपने बेटे के प्रति नरम रुख और उसे सही रास्ते पर लाने की जद्दोजहद। एक तरफ वह शख्स अपनी बीमार, कैंसर पीड़ित पत्नी के इलाज की समस्या से जूझ रहा है और दूसरी तरफ अपने इकलौते नशेड़ी पुत्र के इलाज की चुनौती से। हालात बदतर होने पर उसे अपना बंगला तक बेचना पड़ा। इस फिल्म में संजय दत्त की पहली और दूसरी पत्नी ऋचा और रिया का जिक्र तक नहीं है। ऋचा से जन्मी बेटी त्रिशला दत्त का भी जिक्र तक नहीं है। उनका क्या कोई संघर्ष नहीं था। फिर कैसी बॉयोपिक है यह? केवल मीठा-मीठा गप और कड़वा-कड़वा थू।

अगली फोटो गैलरी देखें
विज्ञापन
सबसे विश्वसनीय Hindi News वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें Entertainment News से जुड़ी ब्रेकिंग अपडेट। मनोरंजन जगत की अन्य खबरें जैसे Bollywood News, लाइव टीवी न्यूज़, लेटेस्ट Hollywood News और Movie Reviews आदि से संबंधित ब्रेकिंग न्यूज़।
 
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें अमर उजाला हिंदी न्यूज़ APP अपने मोबाइल पर।
Amar Ujala Android Hindi News APP Amar Ujala iOS Hindi News APP
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed