अगर आपसे सवाल पूछा जाए कि ऐसा कौन सा अभिनेता है जो एक कतार में लगातार 10 फिल्में फ्लॉप देने के बाद भी सुपरस्टार बनने में कामयाब रहा, तो शायद आपका जवाब अमिताभ बच्चन ही होगा। लेकिन, उनके बाद ऐसा कारनामा कर दिखाने वाला एक शख्स हिंदी सिनेमा में और है। और, उसका नाम है सलमान खान। मामला चौंकाने वाला है लेकिन हम इस सार को आपको विस्तार से समझाते हैं। सलमान खान हिंदी सिनेमा में पहली बार नजर आए 1988 में रिलीज हुई फिल्म बीवी हो तो ऐसी में, और इसके अगले साल बतौर हीरो उनकी पहली फिल्म रिलीज हुई मैंने प्यार किया। फिल्म ब्लॉकबस्टर रही, इसके बाद रिलीज उनकी फिल्मों में बागी हिट, पत्थर के फूल हिट, कुर्बान फ्लॉप, साजन सुपरहिट, और बेवफा सनम सुपरहिट रहीं।
बाइस्कोप: वॉन्टेड नहीं इस फिल्म में पहली बार बनी सलमान की विनोद खन्ना संग जोड़ी, पहना वकील का चोला
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भप्पी सोनी फिल्म निश्चय के प्रोड्यूसर रहे। फिल्म को निर्देशित किया इस्माइल श्रॉफ ने। इस्माइल ने सिनेमा में अपना करियर दिग्गज निर्देशक भीम सिंह के असिस्टेंट के तौर पर शुरू किया और अमोल पालेकर के साथ फिल्म अगर इफ बनाकर अपना निर्देशन करियर शुरू किया। इस्माइल के करियर की दूसरी फिल्म थोड़ी सी बेवफाई सुपरहिट फिल्म थी। राजेश खन्ना, शबाना आजमी और पद्मिनी कोल्हापुरे स्टारर ये फिल्म 1980 में रिलीज हुई और अगले 24 साल इस्माइल श्रॉफ इसकी कमाई खाते रहे। थोड़ी सी बेवफाई के बाद उन्होंने अगले ही साल राजकुमार के साथ फिल्म बुलंदी बनाई, ये फिल्म भी हिट रही। राजकुमार के साथ इस्माइल श्रॉफ ने इसके बाद पुलिस पब्लिक भी बनाई। राजकुमार की आखिरी फिल्म गॉड एंड गन के निर्देशक भी इस्माइल ही हैं। पुलिस पब्लिक बनाने के बाद इस्माइल को एक कहानी एक युवा वकील की मिली औऱ इसके लिए उन्होंने सलमान खान को राजी कर लिया। किसी फिल्म में वकील का किरदार करने का सलमान खान का ये पहला मौका रहा।
फिल्म निश्चय में सलमान खान ने विनोद खन्ना के साथ पहली बार काम किया। फिल्म में दोनों भाइयों के किरदार में हैं। इस फिल्म में सलमान खान के बड़े भाई बने विनोद खन्ना ने बाद में साल 2009 में फिल्म वॉन्टेड में सलमान के पिता का किरदार निभाया। फिल्म दबंग और दबंग 2 में भी विनोद खन्ना ने सलमान खान के पिता का रोल किया। फिल्म निश्चय की कहानी में बड़ा भाई रवि जिस सेठ का नौकर होता है, वह उसके अपनी पत्नी के साथ नजदीकी रिश्तों पर शक करता है और उसके बलात्कार और हत्या के झूठे केस में फंसा देता है। सेठ की बीवी छोटे भाई रवि की मदद करना का वायदा करती है। जेल से छूटने के बाद रवि अपने छोटे भाई को ढूंढता है जिसे एक मशहूर वकील गुजराल ने गोद ले लिया था और अब उसे दुनिया वासुदेव गुजराल नामक वकील के नाम से जानती है। वासुदेव को जिस लड़की पायल से प्यार होता है वह उसी सेठ की बेटी है जिसने उसके बड़े भाई को जेल भिजवाया था। उधर, रवि अपने ही छोटे भाई को मारने की सुपारी ले लेता है। बाद में हालात करवट लेते हैं, सबको सब पता चलता है। मनोहर को अपने कर्मों की सजा मिलती है। छोटे भाई का भविष्य संवारने में बड़ा भाई कुर्बान हो जाता है।
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फिल्म निश्चय की कहानी उन दिनों की फिल्मों के हिसाब से खराब कहानी नहीं है लेकिन उस्ताद राइटर सचिन भौमिक से इसकी पटकथा में गड़बड़ हो गई। लोग कहते हैं कि निर्माता भप्पी सोनी की ज्यादा दखलअंदाजी से फिल्म की पहले पटकथा गड़बड़ाई फिर उसे बेहतर करने के चक्कर में डॉ. राही मासूम रजा के संवाद भी कमजोर पड़ गए। कहने वाले ये भी कहते हैं कि भप्पी सोनी ने फिल्म के लिए सिर्फ सचिन भौमिक और राही मासूम रजा के नाम इस्तेमाल किए, काम इन दोनों ने फिल्म के लिए किया ही नहीं और अपने सहायकों को इसके लिए लगा दिया। सचिन भौमिक और राही मासूम रजा दोनों का नाम आगे करके भप्पी सोनी ने सलमान खान को साइन किया था।
विनोद खन्ना को भी फिल्म निश्चय के लिए साइन करके भप्पी सोनी ने असली कमाल किया। दोनों के बीच फिल्म खून का कर्ज की शूटिंग के दौरान खूब झमेले हुए। टंटे इतने बढ़े कि भप्पी सोनी ने विनोद खन्ना पर कोर्ट केस कर दिया था। बताते हैं कि विनोद खन्ना उन दिनों व्यस्त थे और भप्पी सोनी की फिल्मों के लिए डेट्स नहीं दे पा रहे थे। भप्पी सोनी को लगा कि विनोद जानबूझकर उनकी उपेक्षा कर रहे हैं। उन्होंने इसी के बाद विनोद खन्ना पर आर्थिक नुकसान पहुंचाने का केस कर दिया था। लेकिन, पूरी इंडस्ट्री तब हैरान रह गई जब दोनों के बीच फिल्म निश्चय को लेकर सुलह हो गई।
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भप्पी सोनी ने विनोद खन्ना को सलमान खान की फिल्म का झुनझुना दिखाया और वह तुरंत मान गए। ये पूरा सेट अप बनाने के बाद करिश्मा कपूर को भी वह फिल्म के लिए ले आए। सलमान खान, करिश्मा कपूर, विनोद खन्ना की फिल्म, राइटर सचिन भौमिक, डॉयलॉग राइटर राही मासूम रजा! बस इन पांच नामों पर ही भप्पी सोनी खेल गए। उन्होंने फिल्म की शूटिंग शुरू करने से पहले ही इसे तमाम वितरण क्षेत्रों में बेच दिया और मोटी कमाई कर डाली। इस फिल्म ने भप्पी सोनी पर चढ़ा पिछला सारा कर्ज चुका दिया।
एक बार पैसा तिजोरी में पहुंच गया तो फिल्म निर्माता भप्पी सोनी ने पलटकर भी नहीं देखा कि फिल्म निश्चय कैसी बन रही है। उन्होंने तो क्या उनके लेखकों ने भी पैसा पाने के बाद फिल्म को तवज्जो नहीं दी। और, इस्माइल श्रॉफ को जब माजरा समझ आया तब तक बहुत देर हो चुकी थी। विनोद खन्ना और सलमान खान की पहली बार परदे पर बनी जोड़ी, पहली बार करिश्मा कपूर और सलमान खान का साथ आना भी फिल्म के कुछ काम नहीं आया। वैसे ये फिल्म लेकर भप्पी सोनी ने पहले जूही चावला के पास गए थे, लेकिन तब उनके पास सलमान खान की फिल्म के लिए डेट्स नहीं थी। फिल्म मैंने प्यार किया में सलमान खान के पिता बने राजीव वर्मा यहां करिश्मा कपूर के पिता बने और पहली बार अपने करियर में उन्होंने एक खलनायक का किरदार फिल्म निश्चय में निभाया।
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फिल्म में एक और लोचा हुआ। ये लोचा था फिल्म के संगीत का। भप्पी सोनी ने फिल्म के म्यूजिक के लिए ओ पी नैयर के नाम का इस्तेमाल किया। अपने समय के काबिल और चर्चित संगीतकार नैयर ने हिंदी सिनेमा में इसके पहले 1979 में फिल्म बिन मां के बच्चे के लिए संगीत दिया था। फिल्म निश्चय के प्रचार में उनके नाम का खूब जोर शोर से इस्तेमाल किया गया। लेकिन फिल्म के संगीत अधिकार खरीदने वाली कंपनी वीनस के मालिकों ने जब फिल्म के गाने सुने तो उन्होंने अपने सिर पीट लिए। कमर जलालाबादी के लिखे गीतों को ओ पी नैयर ने अपन चिर परिचित घोड़े की टापों वाली धुनों के साथ कंपोज तो कर लिया लेकिन मोहम्मद अजीज से लेकर कविता कृष्णमूर्ति और अमित कुमार तक किसी की समझ में नहीं आया कि उनसे क्या गवाया जा रहा है, वे यही समझते रहे कि ओ पी नैयर अपनी स्टाइल का कालजयी संगीत बना रहे है।
फिल्म निश्चय का संगीत इतना खराब बना कि वीनस कंपनी ने फिल्म के कैसेट की जो पहली खेप बाजार में उतारी, उसी को हाथ जोड़कर फिल्म के म्यूजिक से तौबा कर ली। और, फैक्ट्री में फिल्म के बन रहे बाकी कैसेट्स का काम भी बंद करा दिया। वीनस कंपनी चलाने वाले जैन भाइयों ने ये भी फैसला किया कि अब वह ऐसी किसी फिल्म का म्यूजिक नहीं खरीदेंगे जिसका संगीत ओ पी नैयर ने दिया हो। इस फिल्म के बाद ओ पी नैयर का करियर एक तरह से खत्म हो गया। इस्माइल श्रॉफ की फिल्म जिद के अलावा एक दो और फिल्मों में संगीत का काम मिलने के बाद लोगों ने ही ओ पी नैयर के पास फिल्म के म्यूजिक के लिए आना छोड़ दिया। इस्माइल श्रॉफ ने फिल्म निश्चय के बाद सलमान खान के साथ एक और फिल्म ये मझधार भी 1996 में बनाई जिसका स्क्रीनप्ले सलमान खान के पिता सलीम खान ने लिखा था, फिल्म ये भी फ्लॉप रही। आज के बाइस्कोप में इतना ही, कल बात करेंगे एक और ओल्डी गोल्डी की..। सिलसिला जारी है।
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(बाइस्कोप अमर उजाला डिजिटल का दैनिक कॉलम है जिसमें हम उस दिन रिलीज हुई किसी पुरानी फिल्म के बारे में चर्चा करते हैं।)