बॉलीवुड में यूं तो देह व्यापार पर सैकड़ों फिल्में बन चुकी हैं। दर्शकों के बीच हर फिल्म की अपनी एक अलग छाप है। इस कड़ी में डायरेक्टर तबरेज नूरानी की फिल्म 'लव सोनिया' को भी शामिल कर लिया जाए तो कोई नई बात नहीं होगी। निर्माता-निर्देशक तबरेज नूरानी ने "लव सोनिया" से पहली बार निर्देशन में कदम रखा है और साबित कर दिया है कि आगे आने वाले समय में उनकी गिनती बेहतरीन निर्देशकों में होने वाली है।
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Film Review: लव सोनिया देख भीतर तक हिल जाएंगे आप, जख्म कुरेदती है फिल्म
अपूर्वा राय, अमर उजाला
Updated Wed, 12 Sep 2018 12:24 PM IST
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फिल्म: लव सोनिया
बॉलीवुड में यूं तो देह व्यापार पर सैकड़ों फिल्में बन चुकी हैं। दर्शकों के बीच हर फिल्म की अपनी एक अलग छाप है। इस कड़ी में डायरेक्टर तबरेज नूरानी की फिल्म 'लव सोनिया' को भी शामिल कर लिया जाए तो कोई नई बात नहीं होगी। निर्माता-निर्देशक तबरेज नूरानी ने "लव सोनिया" से पहली बार निर्देशन में कदम रखा है और साबित कर दिया है कि आगे आने वाले समय में उनकी गिनती बेहतरीन निर्देशकों में होने वाली है।
बॉलीवुड में यूं तो देह व्यापार पर सैकड़ों फिल्में बन चुकी हैं। दर्शकों के बीच हर फिल्म की अपनी एक अलग छाप है। इस कड़ी में डायरेक्टर तबरेज नूरानी की फिल्म 'लव सोनिया' को भी शामिल कर लिया जाए तो कोई नई बात नहीं होगी। निर्माता-निर्देशक तबरेज नूरानी ने "लव सोनिया" से पहली बार निर्देशन में कदम रखा है और साबित कर दिया है कि आगे आने वाले समय में उनकी गिनती बेहतरीन निर्देशकों में होने वाली है।
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फिल्म एक ऐसी जगह से शुरू होती है जहां बारिश न होने के कारण किसान बेहाल और कर्ज के बोझ तले दबे हुए हैं। ऐसा ही एक किसान है प्रीती (रिया सिसोदिया) और सोनिया (मृणाल ठाकुर) का पिता शिवा (आदिल हुसैन)। दादा ठाकुर (अनुपम खेर) से लिए कर्ज में डूबा शिवा अपनी बेटी का सौदा ह्यूमन ट्रैफिकिंग के जरिए कर देते हैं। जब सोनिया को अपनी बहन का कोई पता नहीं चल पाता है जो वो घर छोड़कर चल पड़ती है अपनी बहन को वापस लाने। लेकिन बहन को वापस लाने में वो खुद जिस्म फरोशी के दलदल में बुरी तरह फंस जाती है।
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जिस वेश्यालय में उसे रखा जाता है उसका कर्ता-धर्ता फैज़ल (मनोज वाजपेयी) है। जो लड़कियों को वहां रखने के लिए हर तरह के टॉर्चर का इस्तेमाल करता है। इसी वैश्यालय में वह माधुरी (रिचा चड्ढा), रश्मि (फ्रेडा पिंटो) से मिलती है जो कि परिस्थितियों के चलते कभी इस धंधे में धकेली गई थीं। फिल्म का बाकी प्लॉट सिर्फ इसी के इर्द-गिर्द घूमता है कि इतने भयावह समय में भी कैसे सोनिया को उम्मीद की एक किरण नजर आती रहती है। फिर शुरु होती है फिल्म की असली कहानी। फिल्म में हर एक किरदार की अपनी पहचान है। लेकिन इन सभी के बीच क्या सोनिया और प्रीति कभी इस दलदल से निकल पाएंगी ? अंततः क्या होता है, उसे जानने के लिए फिल्म देखनी पड़ेगी
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क्यों देखें फिल्म
फिल्म के सभी स्टारकास्ट जैसे रिचा चड्ढा, फ्रीडा पिंटो, सई ताम्हणकर, राजकुमार राव, मनोज बाजपेयी, अनुपम खेर, आदिल हुसैन, डेमी मूर ने अपने- अपने किरदारों के हिसाब से बहुत बढ़िया अभिनय किया है।अनुपम खेर का फिल्म में बड़ा किरदार नहीं है लेकिन फिर भी वह अपने हिस्से के साथ पूरा न्याय करते हैं।फिल्म के डायरेक्शन और स्टोरी की तो तबरेज नूरानी ने बेहतरीन काम किया है। जिस तरह वैश्यालय के सीन्स को दिखाया गया है उससे आपके मन में सिर्फ और सिर्फ नफरत पैदा होगी।
फिल्म के सभी स्टारकास्ट जैसे रिचा चड्ढा, फ्रीडा पिंटो, सई ताम्हणकर, राजकुमार राव, मनोज बाजपेयी, अनुपम खेर, आदिल हुसैन, डेमी मूर ने अपने- अपने किरदारों के हिसाब से बहुत बढ़िया अभिनय किया है।अनुपम खेर का फिल्म में बड़ा किरदार नहीं है लेकिन फिर भी वह अपने हिस्से के साथ पूरा न्याय करते हैं।फिल्म के डायरेक्शन और स्टोरी की तो तबरेज नूरानी ने बेहतरीन काम किया है। जिस तरह वैश्यालय के सीन्स को दिखाया गया है उससे आपके मन में सिर्फ और सिर्फ नफरत पैदा होगी।
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मृणाल ठाकुर ने लव सोनिया से जबरदस्त और दमदार डेब्यू किया है। उनकी आंखे और एक्सप्रेशन बात करते हैं और इसी वजह से उनका किरदार आपके दिल में उतर जाता है।
कमजोर कड़ियां
फिल्म की कमजोर कड़ी शायद इसका 'A' सर्टिफिकेट है। जिसकी वजह से इसकी लिमिटेड ऑडियंस है। अगर आप सीरियस फिल्मों के शौकीन नहीं हैं तो ये फिल्म आपके लिए नहीं बनी।
कमजोर कड़ियां
फिल्म की कमजोर कड़ी शायद इसका 'A' सर्टिफिकेट है। जिसकी वजह से इसकी लिमिटेड ऑडियंस है। अगर आप सीरियस फिल्मों के शौकीन नहीं हैं तो ये फिल्म आपके लिए नहीं बनी।