अल कायदा ने उस दिन अमेरिका के आसमान में तबाही बरपा दी थी। वर्ल्ड ट्रेड सेंटर से टकराए दो अपहृत विमानों ने हजारों की जान ले ली और न जाने कितने घायल हुए। ये बात है 11 सितंबर 2001 की, उसी शाम मेरे हाथ में आया फिल्म निर्माता वाशू भगनानी के मुंबई दफ्तर का एक फैक्स, जिसमें उनकी महात्वाकांक्षी फिल्म ‘रहना है तेरे दिल में’ की न्यूजीलैंड में चल रही शूटिंग देखने का बुलावा शामिल था। ‘अमर उजाला’ की फिल्म पत्रिका ‘रंगायन’ के संपादन की जिम्मेदारी मैं उन दिनों संभाला करता था। प्रबंधन से अनुमति लेकर न्यूजीलैंड रवाना होने की तैयारी अगले 48 घंटे में पूरी करनी थी, जिसमें तत्काल में पासपोर्ट बनवाना, न्यूजीलैंड का वीजा हासिल करना और विदेश के सफर की तैयारियां सब शामिल। और, 13 सितंबर 2001 को हम लोग दिल्ली से न्यूजीलैंड के लिए उड़ लिए। पूरे देश से गिनती के पत्रकारों को ही इस शूटिंग को कवर करने के लिए बुलाया गया था और सबके लिए ये यात्रा यादगार रही। न्यूजीलैंड के शहर क्राइस्टचर्च में फिल्म की यूनिट से पत्रकारों की मुलाकात हुई। सबने वहां फिल्माए जा रहे दृश्यों और गानों की शूटिंग देखी और वापस भारत लौट आए।
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प्रोड्यूसर नंबर वन का सपना
फिल्म ‘रहना है तेरे दिल में’ हिंदी सिनेमा का एक ऐसा प्रयोग है, जिसे करने की हिम्मत वाशू भगनानी जैसे जिगर वाला फिल्म निर्माता ही कर सकता था। मसाला फिल्में बना बनाकर वाशू ने तब तक खूब पैसा कमा लिया था। टिप्स कैसेट कंपनी के लिए कैसेट्स का हार्डवेयर बनाते रहे वाशू भगनानी ने 1995 में फिल्म ‘कुली नंबर वन’ से फिल्म निर्माण में कदम रखा और बैक टू बैक पांच सुपर डुपर हिट फिल्में बनाईं। ‘कुली नंबर वन’ के बाद उनकी फिल्में जो हिट रहीं उनमें शामिल हैं, ‘हीरो नंबर वन’, ‘प्यार किया तो डरना क्या’, ‘बड़े मियां छोटे मियां’ और ‘बीवी नंबर वन’। इसके बाद वाशू ने अभिषेक बच्चन की फिल्म ‘तेरा जादू चल गया’ में कीर्ति रेड्डी को और फिल्म ‘मुझे कुछ कहना है’ में तुषार कपूर को करीना कपूर के साथ हिंदी सिनेमा में लॉन्च किया। ‘मुझे कुछ कहना है’ की कामयाबी ने वाशू को फिल्ममेकिंग में नए प्रयोग करने का हौसला दिया और उन्होंने एक साथ तीन फिल्मों का एलान कर दिया। ये फिल्में थीं, ‘रहना है तेरे दिल में’, ‘दीवानापन’ और ‘ओम जय जगदीश’। वाशू ने गलती बस यहां ये कर दी कि उन्होंने फिल्ममेकिंग के क्रिएटिव विभाग में भी दखल देना शुरू कर दिया, उन्हें लगा कि वह फिल्म बनाने का काम निर्देशक से बेहतर जानते हैं। निर्देशक को फिल्में बनाने के लिए दिशा निर्देश देने की शुरूआत उन्होंने वैसे तो फिल्म ‘तेरा जादू चल गया’ से ही कर दी थी, लेकिन ये सिलसिला फिल्म दर फिल्म साल दर साल आगे ही बढ़ता गया। जिसका नतीजा रहा फिल्मों ‘दीवानापन’ और ‘ओम जय जगदीश’ की नाकामी।
हैरिस जयराज के म्यूजिक की मस्ती
फिल्म ‘रहना है तेरे दिल में’ 19 अक्टूबर 2001 को रिलीज हुई तो उससे पहले इस फिल्म का म्यूजिक सुपरहिट हो चुका था। समीर के लिखे गानों को एक नए गीतकार हैरिस जयराज ने तमाम नई आवाजों के साथ ऐसा रचा था कि उस समय का हर युवा इन गानों का दीवाना हो चुका था। संगीत निर्देशक ए आर रहमान के साथ काम कर चुके हैरिस जयराज को वाशू भगनानी इसलिए इस फिल्म में लेकर आए थे क्योंकि उन्होंने इसकी मूल तमिल फिल्म ‘मिन्नाले’ का भी संगीत दिया था जिसकी रीमेक थी ‘रहना है तेरे दिल में’। पहले वाशू सिर्फ तमिल फिल्म की कहानी और हीरो आर माधवन को ही इस हिंदी रीमेक में लेना चाहते थे लेकिन, फिर संयोग ऐसा बना कि मूल फिल्म के निर्देशक गौतम मेनन भी हिंदी रीमेक में आ गए। वह आए तो पीछे पीछे हैरिस भी आ गए। गौतम और माधवन की जोड़ी ने ‘मिन्नाले’ में जो कमाल दिखाया था, उसे हिंदी रीमेक में गौतम ने कुछ फेरबदल के साथ पेश किया। हैरिस जयराज का मूल फिल्म के लिए बना गाना जो माधवन और रीमा सेन पर ‘मिन्नाले’ में फिल्माया गया था, वह गाना हू ब हू उसी धुन के साथ उसी गायिका यानी बॉम्बे जयश्री की आवाज में ‘रहना है तेरे दिल में’ भी सुनाई दिया। इस गाने के लिए जयश्री को साउथ का फिल्मफेयर पुरस्कार भी मिला था।
प्रेम का असली त्याग
फिल्म ‘रहना है तेरे दिल में’ जब रिलीज हुई तो इसके साथ सबसे बड़ी दिक्कत जो हुई है वह थी इसके दो साल पहले रिलीज हुई सलमान खान और ऐश्वर्या राय की फिल्म ‘हम दिल दे चुके सनम’। दोनों फिल्मों की कहानी का मूल भाव एक ही है। नायिका से एक नायक प्रेम करता है और उससे मजबूरी में उसे दूर जाना होता है। दूसरा नायक भी नायिका को चाहता है और इन दोनों की शादी भी तय हो जाती है। ‘हम दिल दे चुके सनम’ में वनराज अपनी शादी नंदिनी से होने के बाद उसे समीर से मिलाने निकल पड़ता है और फिल्म का एक लंबा भाग इन्हीं कोशिशों पर है। ‘रहना है तेरे दिल में’ की कहानी में मैडी और सैम का बाकायदा मुकाबला पूरी फिल्म में चलता रहता है। रीना के साथ मैडी अपनी पहचान बदलकर पांच दिन गुजारता है और फिर कहानी में सैम आ जाता है। सैम को लगता है कि मैडी की प्रेमिका रही रीना से शादी कर वह मैडी से जीत जाएगा, लेकिन प्रेम त्याग का नाम है, पाने का नहीं, ये फिल्म के क्लाइमेक्स में फिर साबित होता है। रीना और मैडी मिल जाते हैं, सैम कहानी में फिर लौटकर आने का वादा करके विदा हो जाता है। तब से इस फिल्म के प्रशंसक इस कहानी के सीक्वेल के इंतजार में हैं। किसी फिल्म के लिए उसके प्रशंसकों का किया गया ये सबसे लंबा इंतजार भी माना जाता है।
सबसे ज्यादा कवर वर्जन वाली फिल्म
फिल्म ‘रहना है तेरे दिल में’ की शूटिंग देहरादून, दिल्ली, गुड़गांव, मुंबई के अलावा न्यूजीलैंड और दक्षिण अफ्रीका में हुई है। फिल्म का हाइप अपनी मेकिंग के दिनों में इतना था कि फिल्म की टीम ने भी मेकिंग के दौरान कॉंन्टीन्यूटी और दूसरी तमाम दिक्कतों की तरफ ध्यान कम ही दिया है। ‘हम सारे हैं मुंबईया’ गाने में सीएनजी ऑटो रिक्शा दिल्ली की नंबर प्लेट लगाए दिखते हैं। पहले न्यूजीलैंड और फिर दक्षिण अफ्रीका के समुद्र तटों को भी फिल्म में मुंबई के समुद्रतट बनाकर पेश कर दिया गया है। कॉस्ट्यूम की कॉन्टीन्यूटी भी कहीं कहीं गड़बड़ है। लेकिन, इतनी सारी दिक्कतों के बाद भी इस फिल्म को रिलीज के वक्त भले उतना प्यार न मिला हो जितनी की उम्मीद इसके सितारों और इसके निर्माताओं ने रिलीज के वक्त की होगी, लेकिन रिलीज के बाद जब ये फिल्म पहली बार टेलीविजन पर आई तो इसका रुतबा हिंदी सिनेमा की सबसे लोकप्रिय प्रेम कहानियों जैसा हो गया और इसका म्यूजिक तो ऐसा हिट हुआ कि तब से 19 साल बाद भी इसके गानों के कवर वर्जन बन रहे हैं। ये कवर वर्जन तमाम मशहूर गायक और दूसरे कलाकार तक बना रहे हैं। अभी कोरोना संक्रमण के दौरान लॉकडाउन में जिस एक फिल्म के सबसे ज्यादा कवर वर्जन बने हैं, वो ये ही फिल्म है, ‘रहना है तेरे दिल में’।