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Mulk Review: हर मुसलमान का मतलब पाकिस्तान नहीं, यही मैसेज देती है 'मुल्क'
Thu, 02 Aug 2018 11:29 AM IST
विजय जैन
विजय जैन
Updated Thu, 02 Aug 2018 11:29 AM IST
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निर्माता-निर्देशक: अनुभव सिन्हा
स्टार कास्ट: ऋषि कपूर, तापसी पन्नू,आशुतोष राणा आदि।
'पिंक' के क्लाईमेक्स में जिस तरह अमिताभ बच्चन ने 'नो मतलब नो' के माध्यम से पूरी फिल्म को एक शब्द में समेट दिया था, उसी तरह 'मुल्क' भी क्लाईमेक्स के दौरान कहे गए उन दो शब्दों वो और हम पर टिकी है। जज कहते हैं, जिस दिन संसद में पूजा और मंदिर में भाषण बंद हो जाएंगे, उस दिन सब सही हो जाएगा और जिस दिन कोई तुम्हे घर आकर वो और हम की बात करे तो कलेंडर देख लेना, कहीं चुनाव नजदीक तो नहीं।
जबरदस्त संवादों से सजी फिल्म 'मुल्क' दरअसल एक मुस्लिम परिवार की कहानी है, जिसमें डायरेक्टर अनुभव सिन्हा ने बारीकी से ख्याल रखा है कि हिंदू मुसलमान जैसे संवेदनशील मुद्दे पर बनी इस फिल्म में विवाद खड़ा न हो जाए।
तुम बिन, तुम बिन 2 जैसी लव स्टोरी बेसड फिल्में देने वाले डायरेक्टर अनुभव सिन्हा ने जब रावन, गुलाब गैंग बनाई तभी लगा था कि वे लीक से हटकर फिल्में बनाने में विश्वास करते हैं। हिंदू और मुसलमानों पर बनी सैकड़ों फिल्मों में से 'मुल्क' बिलकुल अलग हटकर बनाई गई फिल्म है, जिसमें एक्टर ऋषि कपूर के साथ तापसी पन्नू, प्रतीक बब्बर, नीना गुप्ता, रजत कपूर, आशुतोष राणा जैसे कई बड़े कलाकार मौजूद हैं। फिल्म के मुख्य कलाकार ऋषि कपूर हैं जो आतंकवादी गतिविधियों में लिप्त लड़के के ताया का रोल कर रहे हैं। आशुतोष राणा और तापसी पन्नू वकील के रोल में हैं।
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क्या हर मुस्लिम पाकिस्तानी है?
क्या हर मुस्लिम पाकिस्तानी होता है। क्या किसी भी मुस्लिम शख्स को देखकर सबसे पहले दिमाग में पाकिस्तान का नाम आता है। उनके भारतीय दोस्त उन्हें पाकिस्तान का नाम लेकर चिढ़ाते हैं। फिल्म मुल्क में भी इन्हीं बातों को जज के सामने रखा जाएगा कि क्या भारतीय मुसलमानों के साथ ऐसा किया जाना सही है। क्या उन्हें देश के लिए प्यार दिखाने के लिए अलग से कुछ करने की जरूरत महसूस होनी चाहिए। फिल्म की कहानी किसी पॉलीटिकल नेता या राजनीतिक मुद्दे पर आधारित नहीं है। कहानी वही है जो इस समाज में हर रोज हो रहा है। सिर्फ वही दिखाया गया है जो हो रहा है। समाधान किसी को नहीं मालूम।
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फिल्म की कहानी
फिल्म की कहानी बनारस की गलियों से शुरू हुई फिल्म की कहानी लखनऊ तक पहुंचती है। ऋषि कपूर (मुराद अली) पेशे से वकील बने हैं। गआतंकी बकी भूमिका निभा रहे हैं। फिल्म में ऋषि कपूर एक ऐसे बाप का रोल निभा रहे हैं जिनके छोटे भाई बिलाल मोहम्मद (मनोज पहवा) का बेटा शाहिद मोहम्मद (प्रतीक बब्बर) आतंकी गतिविधियों में शामिल था। जांच के नाम पर पुलिस बिलाल मोहम्मद को हिरासत में ले लेती है और गिरफ्तारी डालते ही मामला कोर्ट पहुंच जाता है। अदालत में पूरे परिवार को मुसलमान होने के नाते आतंकवादी ठहराने का प्रयास किया जाता है। पहले ऋषि कपूर इंसाफ के लिए लड़ते हैं, लेकिन बाद में जब हिम्मत हार जाते हैं तो तापसी पन्नू के जरिए वे अदालत में समाज के खिलाफ लड़ाई लड़ते हैं।
कहा जा रहा है कि प्रतीक बब्बर का रोल सैफुल्ला की जिंदगी से प्रेरित है। आतंकी सैफुल्ला को पुलिस ने साल 2017 में लखनऊ के ठाकुरगंज एनकाउंटर में मार गिराया था। सैफुल्ला मूलतः कानपुर का रहने वाला था। वह आतंकी संगठन आईएसआईएस से काफी प्रभावित था। हालांकि इसकी पुष्टि नहीं की गई है।
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फिल्म रिव्यू
अनुभव सिन्हा ने फिल्म को बेहतरीन डायरेक्ट किया है। ऋषि कपूर मुस्लिम के किरदार में जबदस्त दिखे हैं। अब तक तापसी को हम सभी ने किसी ग्लैमरस (जुड़वा 2), रॉव एजेंट (नाम शबा ना) या फिर घर में रहने वाली एक इंडिपेंडेंट लड़की (पिंक) के किरदार में देखा है। इस फिल्म में वह घर की बहू के साथ वकील की भूमिका में भी नजर आती हैं। तापसी ने अपने वकील वाले किरदार को काफी खूबसूरती से निभाया है। शुरू में बेहद स्लो शुरुआत कर तापसी अचानक से फार्म में आई, जोकि बेहतरीन है। आशुतोष राणा कोर्ट रूम में तापसी पन्नू पर जरूर भारी पड़े।
'मेरे मुल्क के लिए मेरा प्यार साबित करो' और 'मेरे घर में मेरा स्वागत करने का हक उन्हें किसने दिया', फिल्म के ऐसे जबरदस्त डायलॉग भी दर्शकों के दिलों को जीतने में कामयाब होंगे। हिंदु-मुस्लिम,देशद्रोह और जिहाद जैसे भारी शब्द भी सुनने को मिलते हैं। चूंकि फिल्म हिंदु-मुस्लिम जैसे गंभीर विषय पर आधारित है तो इसलिए फिल्म शुरुआत से लेकर अंत तक आपको सेक्युलरिजम का पाठ भी पढ़ाती है। आखिरी में जज के तौर पर नजर आते एक्टर कुमुद मिश्रा भी जिहाद और आतंकवाद के परिभाषा को बताने में कामयाब रहते हैं।
फिल्म आपको बांधे रखती है और कहीं भी बोर नहीं करती है। अंत में ये फिल्म आपको भावुक कर सकती है। फिल्म में भावुक उतार-चढ़ाव वाले दृश्य भी हैं जिसमें सरताज को उनके पड़ोसी पाकिस्तान और आतंकी ओसामा बिन लादेन का समर्थक बताने लगते हैं। उनके घर पर पत्थर फेंके जाते हैं। निर्देशक अनुभव सिन्हा खुद इंटरव्यू में खुलासा कर चुके हैं कि मुल्क किसी एक घटना पर आधारित नहीं है, इसमें कई घटनाएं शामिल हैं। इनके अंश फिल्म में दिखेंगे।
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