इन दिनों हिंदी फिल्म संगीत उद्योग में खेमेबाजी का बहुत शोर है। नाम उछाले जा रहे हैं, टोपियां उछाली जा रही हैं और गिनाई जा रही हैं एक दूसरे के काम करने के तरीकों में मेहनतकश लोगों की बेकदरी की रवायतें। लेकिन, हिंदी सिनेमा हमेशा से ऐसा नहीं रहा। आज के बाइस्कोप का किस्सा सुनाने से पहले आपको बता देता हूं कि हिंदी फिल्मों के गाने रिकॉर्ड कैसे होते हैं? पहले गायक अपने हर गाने पर संगीतकारों के साथ घंटों बैठकर रियाज करता, धुन समझता और गाने को तैयार करता फिर पूरे ऑर्केस्ट्रा के साथ गाने की रिकॉर्डिंग होती थी। उसके बाद संगीतकारों ने गानों का म्यूजिक पहले ही तैयार करना शुरू कर दिया। फिल्में ज्यादा बनने लगीं, गायक व्यस्त रहने लगे तो संघर्षशील गायकों को बुलाकर गाने का एक ऐसा संस्करण तैयार किया जाने लगा, जिसे सुनकर असली गायक गाने की धुन और गाने का अंदाज समझता था और उसे गा देता था। संघर्षशील गायक के बनाए गाने के संस्करण को ‘स्क्रैच’ कहते हैं, और, पहले से तैयार गाने को फिर से नामचीन गायक की आवाज में रिकॉर्ड करने को ‘डबिंग’ कहते हैं। ‘स्क्रैच’ और ‘डबिंग’ का ये किस्सा बताना इसलिए जरूरी है क्योंकि एक स्क्रैच को डब करने से इंकार करके आशा भोसले ने एक नई उभरती गायिका को फिल्मफेयर पुरस्कार दिला दिया था। ये किस्सा है फिल्म सोहनी महिवाल का और सनी देओल, पूनम ढिल्लों की ये फिल्म ही हमारे आज के बाइस्कोप की फिल्म है।
बाइस्कोप: सनी देओल से पहले इन दो को ऑफर हुआ था महिवाल का रोल, आशा भोसले ने मौका दिया नई गायिका को
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हुआ यूं कि संगीतकार अनु मलिक को अपने करियर का ये पहला बड़ा मौका मिला था संगीत तैयार करने का। सोहनी महिवाल से पहले फिल्म एक जान हैं हम के लिए भी उनका संगीत हिट हुआ था और उससे पहले भी वो दो चार फिल्मों में संगीत दे चुके थे। लेकिन, सोहनी महिवाल भारत और रूस से बीच अलीबाबा औऱ चालीस चोर के बाद बनने जा रही दूसरी संयुक्त फिल्म थी। सनी देओल के करियर की फिल्म बेताब के बाद दूसरी फिल्म। सुपरस्टार राजेश खन्ना के घर की चारदीवारों के बंधन तोड़कर बाहर निकलीं डिंपल कपाड़िया की सनी देओल के साथ ये पहली फिल्म हो सकती थी, लेकिन तब वह रमेश सिप्पी की फिल्म सागर के लिए अपनी तारीखें दे चुकी थीं।
खैर, बात हम कर रहे थे स्क्रैच और डबिंग के किस्से की। फिल्म सोहनी महिवाल का एक सुपरहिट गाना है, सोनी चनाब दे किनारे…। आनंद बक्षी ने यूं लगता है कि जैसे अपना दिल उड़ेल दिया हो इस गाने में। अनु मलिक ने भी ये गाना इसकी पूरी पंजाबियत के साथ कंपोज करके अपने पिता सरदार मलिक का नाम रोशन किया। गाने की धुन तैयार होने के बाद आशा भोसले को जब मौका मिला तो वह आईं गाना रिकॉर्ड करने। गाने का मूड समझाने के लिए उन्हें इसका स्क्रैच सुनाया गया, इसे सुनकर ही आशा भोसले को ये गाना डब करना था। आशा ने जैसे ही गाने का मुखड़ा सुना, उन्होंने आंखें मूंद ली। पूरा गाना सुनने तक वह यूं ही बैठी रहीं। अनु मलिक परेशान। कहीं गलती तो नहीं हो गई। लेकिन, स्क्रैच सुनने के बाद आशा भोसले ने जो कहा उसकी मिसाल अभी और कई पीढ़ियों तक दी जाती रहेगी। उन्होंने कहा कि इस स्क्रैच को ही फिल्म के साउंडट्रैक में फाइनल सॉन्ग समझकर शामिल कर लो। इस गायिकी से बेहतर गाना बहुत मुश्किल है। स्क्रैच वाला गाना ही फिल्म में इस्तेमाल हुआ और इसी गाने के लिए उभरती गायिका अनुपमा देशपांडे को मिला उनके करियर का पहले बेस्ट फीमेल सिंगर फिल्मफेयर अवार्ड।
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और, सिर्फ अनुपमा देशपांडे ही क्यों ये फिल्म तो इसके हीरो, हीरोइन और यहां तक कि इसकी सीनियर हीरोइन तक के लिए किस्मत का ऐसा ही खेल रही। इस सोहनी महिवाल पर बात करने से पहले आपको थोड़ा और पहले की एक और इसी नाम की फिल्म की बात बता देते हैं। ये फिल्म बननी थी उस समय के सुपरस्टार राजेश खन्ना के साथ। बी आर चोपड़ा उन दिनों पंजाब पहुंचे हुए थे अपनी फिल्म कर्म की शूटिंग करने। वहीं उनको सोहनी महिवाल पर पंजाबी में एक फिल्म बनाने का आइडिया आया। राजेश खन्ना से उन्होंने जिक्र किया तो वह भी चहक उठे। रूमानियत के राजकुमार को ऐसी ही एक कहानी बेसब्री से इंतजार भी था। फिर फोन गया नीतू सिंह के पास तो वह भी झट से तैयार हो गईं। बी आऱ चोपड़ा ने वहीं आनन फानन अगले दो तीन दिन में फिल्म सोहनी महिवाल बनाने का एलान कर दिया। फिल्म का मुहूर्त शॉट भी उन्होंने पंजाब के तब के मुख्यमंत्री ज्ञानी जैल सिंह को मुख्य अतिथि बनाकर शूट कर लिया। फिर चोपड़ा साब बंबई लौटे। अपनी फिल्म कर्म की रिलीज में लग गए। फिल्म जैसी वह सोच रहे थे, वैसी चली नहीं। इसी के बाद बी आर चोपड़ा ने राजेश खन्ना के साथ बनने वाली सोहनी महिवाल का किस्सा भी वहीं खत्म कर दिया।
राजेश खन्ना की सोहनी महिवाल का किस्सा खत्म भले हो गया हो, पर हमारे आज के बाइस्कोप की फिल्म सोहनी महिवाल का किस्सा अभी जारी है। पहले बात कर लेते हैं महिवाल की। फिल्म की कहानी परदेस से सोहनी की बस्ती में आए महिवाल की कहानी है जो वहीं बस जाता है। दोनों में प्रेम होता है। दोनों करीब आते हैं। और, जमाना नाराज होता है। सोहनी की शादी कहीं और कर दी जाती है, लेकिन दोनों का प्रेम इसके बाद भी कम नहीं होता। बंदिशें पाकर प्यार और जवां होता है, ये कहावत है। फिल्म में दोनों इसे साकार करते नजर आते हैं। निर्देशक उमेश मेहरा ने इस फिल्म को हिंदी में निर्देशित किया और रूसी भाषा में इसे निर्देशित करने का जिम्मा संभाला था लतीफ फैजीयेव ने।
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फिल्म में महिवाल का किरदार पहले पहल कुमार गौरव को ऑफर हुआ। कुमार गौरव की लव स्टोरी रिलीज हो चुकी थी और उनके करियर की कमान उन दिनों उनके पिता और जुबली कुमार के नाम से मशहूर रहे राजेंद्र कुमार के हाथों में थी। इंडो रशियन प्रोजेक्ट देख राजेंद्र कुमार ने उमेश मेहरा से खासी मोटी रकम मांग ली। और, कुमार गौरव के हाथ से फिल्म निकल गई। इसके बाद उमेश मेहरा ने राज कपूर के बेटे राजीव कपूर को फिल्म में लेने का मन बनाया लेकिन वह राम तेरी गंगा मैली के लिए अपनी तमाम तारीखें दे चुके थे। फिल्म का जिक्र इसके बाद धर्मेंद्र के सामने हुआ तो उन्होंने महिवाल के किरदार के लिए सनी देओल को लेने के बात कही।
सनी देओल को महिवाल का किरदार पसंद आया और उन्होंने हां भी कर दी। लेकिन सोहनी के किरदार में पूनम ढिल्लों से हां करना इतना आसान नहीं रहा फिल्म के निर्देशक के लिए। उमेश मेहरा ने दरअसल जब फिल्म की कहानी पूनम को सुनाई तो नरेशन में वह कुछ सीन सुनाना भूल गए। पूनम को लगा कि ये फिल्म तो पूरी तरह महिवाल के किरदार पर है, सोहनी का तो कुछ है ही नहीं। तो उमेश मेहरा ने उन्हें फिर से समझाया, मनाया और तैयार किया इस किरदार के लिए। फिल्म का बड़ा हिस्सा रूस में शूट हुआ है।
इस फिल्म की शूटिंग के लिए सनी देओल और पूनम ढिल्लों रूस में थे और यहां भारत में सनी देओल की पहली फिल्म बेताब रिलीज हो गई। ये उन दिनों की बात है जब न इंटरनेट होता था और न ही मोबाइल। ले देकर लैंडलाइन टेलीफोन हुआ करते थे और उन पर भी विदेश बात करना आसान न था। रूस तब तक अविभावित रूस ही था और वहां की सरकार थी भी बहुत सख्त। सनी देओल तमाम ट्रंक कॉल बुक करते कि पता करें फिल्म का हाल क्या है, पर पूरा पूरा दिन हो जाता पर बंबई बात नहीं हो पाती।
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फिल्म में एक अहम किरदार जीनत अमान का भी है। भोपाल रियासत से ताल्लुक रखने वाले मशहूर राइटर अमानुल्लाह खान की बेटी जीनत की मां मराठी थीं। अमानुल्लाह खान मुगले आजम और पाकीजा जैसी फिल्मों की राइटिंग टीम का हिस्सा रहे और क्रेडिट्स में अपना नाम अमान ही देते थे। ये अमान सरनेम जीनत ने वहीं से लिया। सोहनी महिवाल में उनका रोल तो नहीं था लेकिन भारत और रूस के संयुक्त उपक्रम के तौर पर बनी फिल्म अलीबाबा और 40 चोर रूस में सुपरहिट रही थी और जीनत अमान के उस फिल्म के किरदार को लोगों ने वहां खूब पसंद किया था। तो माना ये गया कि जीनत अमान अगर फिल्म में होंगी तो रूस में फिल्म को देखने खूब ज्यादा लोग आएंगे। ये वो वक्त था जब जीनत अमान और अभिनेता संजय खान के रिश्ते काफी खराब हो चुके थे। कहा ये भी जाता है कि दोनों के बीच हुए एक झगड़े में ही जीनत की आंख पर चोट लगी और उनका चेहरा बिगड़ गया। सोहनी महिवाल की शूटिंग पर जीनत की मुलाकात उभरते कलाकार मजहर खान से हुई। दोनों का लंबा प्रेम प्रसंग चला और दूसरी मुसीबतों से बचने के लिए जीनत अमान ने मजहर खान से शादी कर ली।
सोहनी महिवाल फिल्म में शम्मी कपूर, प्राण और तनूजा कहानी के अहम किरदारों में नजर आए। जीनत अमान ने फिर एक बार दर्शकों के दिल लूटे और नफरत का कोटा पूरा किया गुलशन ग्रोवर ने। तकनीकी रूप से फिल्म बहुत उम्दा रही। फिल्म सनी देओल की पहली फिल्म बेताब के तुरंत बाद रिलीज हुई सोहनी महिवाल को दर्शक बहुत चाव से देखने भी गए लेकिन लोगों को जैसा सनी देओल चाहिए था, वैसा नहीं मिल पाया। साल 1984 सनी देओल के करियर का काफी अहम साल रहा। सोहनी महिवाल ठीक ठाक चली और इसके बाद आई फिल्म सन्नी फ्लॉप हो गई। नासिर हुसैन की बनाई फिल्म मंजिल मंजिल भी फ्लॉप रही लेकिन इसी फिल्म में सनी देओल को अपनी एक खास मंजिल डिंपल कपाड़िया का साथ मिल गया। सनी देओल को भी समझ आया कि रोमांटिक हीरो की इमेज अभी उनके लिए ठीक नहीं है। डिंपल ने भी उनके भीतर जोश भरा और दोनों ने अदाकारी का नया कमाल दिखाया अगले साल रिलीज हुई फिल्म अर्जुन में। आज के बाइस्कोप में इतना ही, कल बात करेंगे एक और ओल्डी गोल्डी की..। सिलसिला जारी है।
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(बाइस्कोप अमर उजाला डिजिटल का दैनिक कॉलम है जिसमें हम उस दिन रिलीज हुई किसी पुरानी फिल्म के बारे में चर्चा करते हैं।)