अक्सर हिंदी फिल्मों में शहरी जीवन ही देखने को मिलता है। बड़े परदे पर ग्रामीण जीवन की कहानियां बहुत कम देखने को मिलती है। हालांकि, अभी तक कई फिल्में ग्रामीण पृष्ठभूमि को केंद्र में रखकर बनाई जा चुकी हैं। इनमें से कई तो इतनी शानदार है कि उन्हें कभी भी देखा जा सकता है। आज हम आपको ऐसी ही कुछ फिल्मों के बारे में बताने जा रहे हैं।
Bollywood Films: ग्रामीण पृष्ठभूमि पर बनी हैं ये हिंदी फिल्में, लीक से हटकर थी सभी की कहानी
'लगान' के रिलीज होने के तीन साल बाद ही आशुतोष गोवारिकर की एक और फिल्म 'स्वदेश' रिलीज हुई थी। यह फिल्म 17 दिसंबर, 2004 को रिलीज हुई थी।
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लगान
'लगान' फिल्म को आशुतोष गोवारिकर ने डायरेक्ट किया था। फिल्म की कहानी भी उन्होंने ही लिखी थी। फिल्म 2001 में रिलीज हुई थी। इसमें आमिर खान, ग्रेसी सिंह और रघुवीर यादव समेत कई कलाकारों ने मुख्य भूमिका निभाई थी। 'लगान' 'सर्वश्रेष्ठ विदेशी भाषा फिल्म' की श्रेणी में ऑस्कर के लिए नामांकित हुई थी और ऐसा करने वाली तीसरी भारतीय फिल्म थी। यह फिल्म क्रिकेट पर आधारित है, जिसमें ग्रामीण अंग्रेजों से लगान माफ कराने के लिए क्रिकेट खेलते हैं।
स्वदेश
'लगान' के रिलीज होने के तीन साल बाद ही आशुतोष गोवारिकर की एक और फिल्म 'स्वदेश' रिलीज हुई थी। यह फिल्म 17 दिसंबर, 2004 को रिलीज हुई थी। इसमें शाहरुख खान और गायत्री जोशी ने मुख्य भूमिका निभाई थी। फिल्म में शाहरुख खान ने नासा के प्रोजेक्ट मैनेजर का किरदार अदा किया था, जो गांव आने के बाद वहां के हालात से रुबरू होता है।
पीपली लाइव
'पीपली लाइव' 13 अगस्त 2010 को रिलीज हुई थी। यह फिल्म भी ग्रामीण पृष्ठभूमि पर बनीं सबसे कमाल की फिल्मों में से एक है। फिल्म किसान आत्महत्या पर आधारित है। इसमें दिखाया गया है कि कैसे चुनाव के दौरान पीपली गांव में मीडिया और नेताओं का डेरा जम जाता है, लेकिन किसान की परवाह किसी को नहीं होती।
लापता लेडीज
‘लापता लेडीज’ इसी साल मार्च महीने में रिलीज हुई थी। इसका निर्देशन किरण राव ने किया है। फिल्म में रवि किशन, स्पर्श श्रीवास्तव, नितांशी गोयल, प्रतिभा रांटा, सतेंद्र सोनी और दुर्गेश कुमार ने अभिनय किया है। फिल्म में गांव में ब्याही गई दो दुल्हनों की कहानी दिखाई गई है, जिनकी शादी के बाद ही गलती से अदला-बदली हो जाती है। इसके बाद फिल्म में लड़कियों के आत्मनिर्भर बनने और उनकी आजादी से जुड़े सवाल खड़े होते हैं।