फिल्म 'ऐ वतन मेरे वतन' में स्वतंत्रता सेनानी उषा मेहता की भूमिका निभाने वाली अभिनेत्री सारा अली खान को लगता है कि देश में एक क्रांति की जरूरत फिर से हैं। अपनी दादी यानी शर्मिला टैगोर को पहली स्टार अभिनेत्री मानने वाली सारा अली खान को उनकी फिल्में खूब पसंद आती हैं। राजेश खन्ना और शर्मिला टैगोर की फिल्म ‘आराधना’ उनकी फेवरिट फिल्म है। सारा अली खान ने बहुत ज्यादा देशभक्ति फिल्में नहीं देखी हैं और उनकी सबसे पसंदीदा देशभक्ति फिल्म ‘रंग दे बसंती’ है। सारा अली खान से एक खास मुलाकात...
Sara Ali Khan Interview: डंके की चोट पर बोलीं सारा अली खान, देश को एक क्रांति की और जरूरत है
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फिल्म 'ऐ वतन मेरे वतन' का सबक आपके लिए क्या है?
मुझे लगता है कि इस फिल्म के जरिए मैने यह देखा, सीखा और समझा कि जो आपको उड़ने के लिए जो पंख चाहिए, वे आपके पास ही हैं, उन्हें बाहर ढूंढने की जरूरत नहीं है। एक महिला होने के नाते मैं इस बात को समझती हूं। हमें ये याद रखना होगा कि हम अपनी खुद की पहचान और आवाज हैं। अपने फैसले लेने का अधिकार एक महिला को खुद ही होना चाहिए है।
आपके लिए देशभक्ति के मायने क्या हैं ?
देश भक्ति ही हमें शक्ति देती है। हमारा जो अस्तित्व है, वह हमारे देश से ही है। देश ही हमारा पूरा परिवार होता है। हमारे देश से हमारी अपनी पहचान है। हमें सुरक्षा भी मिलती है। लेकिन, मेरे मन में इस बात का मलाल है कि हमारे देश में सिर्फ पुरुष स्वतंत्रता सेनानियों की बात होती है। महिलाओं की बात कोई नहीं करता। फिल्म ‘ऐ वतन मेरे वतन’ इसी कमी को पूरा करती है।
आपने देशभक्ति पर बनी कितनी फिल्में देखी हैं?
मैंने ज्यादा फिल्में तो नहीं देखी है। राकेश ओमप्रकाश मेहरा की फिल्म 'रंग दे बसंती' मुझे बहुत अच्छी लगी। यह फिल्म अपनी मान्यताओं के बारे में सोचने और उठ खड़े होने के बारे में है। और, हमें यह इशारा करती है कि शायद आज भी क्रांति की जरूरत है।
फिल्मों को लेकर आप अपनी दादी शर्मिला टैगोर से कितनी चर्चा करती हैं?
मेरी दादी को 'जरा हटके जरा बचके' और 'मर्डर मुबारक' बहुत अच्छी लगी। उनको यह अच्छा लगता है कि मैं अलग अलग चीजें करती हूं। वह खुद एक्टर हैं, उन्हें पता है कि जब आप अलग -अलग किरदार निभाते हैं तो बहुत मजा आता है।