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Shukla Paksh with Pankaj Shukla Panchayat Season 3 Jitnedra Kumar Chandan Roy Deepak Kumar Mishra Prime Video
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Video Interview Panchayat 3: सचिवजी की ‘पंचायत’ का लौकी कनेक्शन, और क्या हुआ जब ‘जीतू सर’ को नहीं मिली नौकरी
पहले जनवरी में हल्ला मचा। फिर चर्चा हुई कि मार्च का मुहूर्त है। और, अब मई में जाकर अमेजन प्राइम वीडियो की सीरीज ‘पंचायत’ का तीसरा सीजन रिलीज होने जा रहा है। इस सीरीज में सचिव जी बने जितेंद्र कुमार, विकास शुक्ला बने चंदन रॉय और सीरीज के निर्देशक दीपक कुमार मिश्रा ने कहानी में लौकी की महत्ता से लेकर ग्रामीण विकास जैसे मुद्दों पर ‘अमर उजाला’ के सलाहकार संपादक पंकज शुक्ल से बात की। सीरीज के हीरो जितेंद्र कुमार से कुछ सवालों के जवाब यहां पढ़ें और वीडियो का लिंक क्लिक करके देखें पूरा इंटरव्यू...
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पंचायत 3
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
जितेंद्र, इस बार बहुत देर कर दी सचिवजी ने आते आते..?
दो साल तो लग ही जाते हैं किसी वेब सीरीज का नया सीजन बनाने में। पहला सीजन 2020 में आया, दूसरा 2022 में और तीसरा अब। क्या है, इसके लेखन में थोड़ा समय लगता है ताकि इसको अच्छे से बना सकें।
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पंचायत 3
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
आईआईटी की पढ़ाई के बाद क्या कैंपस प्लेसमेंट में काम नहीं बना था?
हां, मेरा कैंपस प्लेसमेंट में चयन नहीं हो पाया था, तो मैं एक्टर बन गया। पिताजी की चिंता इस बात की थी कि पता नहीं इसको एक्टिंग आती भी है या ऐसे ही बोल रहा है। मैं सौभाग्यशाली अभिनेता हूं कि ऐसे समय में आया जब ओटीटी का विकास हो रहा है। मैंने मुंबई आते ही छोटे छोटे वीडियो बनाए थे जो लोगों को पसंद आए। परिवार को भी लगा कि हां, इसको करने देते हैं।
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पंचायत 3
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
फिल्मजगत में आते ही पहले दिन से पैसा मिलना शुरू नहीं हो जाता, साल दो साल तो लोग मुफ्त में ही काम कराते हैं। ऐसे में प्लान बी कितना काम आता है?
किसी के पास प्लान बी हो तो बहुत अच्छी बात है। लेकिन, मुझे लगता नहीं प्लान बी होना भी चाहिए। मेरा मानना है जो भी करो सौ फीसदी लगन के साथ करो। लगातार प्रयास करते रहने से किस्मत बदलने लगती है। मेहनत का फल जरूर मिलता है. ये मेरा मानना है। हां, जीवनयापन के लिए मैं हफ्ते में एक दिन कोचिंग में पढ़ाता था, ये सच है।
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पंचायत 3
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
अब भौतिकी या रसायन शास्त्र का कोई विद्यार्थी पाठ्यक्रम की कोई समस्या लेकर ‘जीतू सर’ के पास आए तो हल कर लेंगे?
नहीं, बहुत कठिन है अब तो। ऐसे सवाल देख भी लें तो समझ भी नहीं आता कि एक समय में हम सब ये कर चुके हैं। बहुत मेहनत का काम है। और, उतनी मेहनत मैं शायद अब न कर पाऊं।
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