सोनी टीवी के रियलिटी शो ‘इंडियाज लाफ्टर चैंपियन’ में दिल्ली के रहने वाले रजत सूद विनर रहे। विनर की ट्रॉफी के साथ उन्हें 25 लाख का पुरस्कार भी मिला। रजत के पिता प्रदीप सूद दिल्ली दूरदर्शन में काम करते थे और उनकी मां मधु सूद दिल्ली में बिजली विभाग में काम करती हैं। परिवार में सबसे छोटे रजत सूद को घर पर प्यार और सपोर्ट दोनों खूब मिला। उनकी बड़ी बहन रितिका सूद जो पेश से शिक्षिका हैं, उन्होंने उनका खूब हौसला बढ़ाया और दूसरी बड़ी बहन पारुल ने भी उनको हर दिन बेहतर करने के खास गुर सिखाए। हालांकि, जब रजत ने कॉमेडी शो के प्रोफेशन में आने का पहले पहल मन बनाया तो उनके माता पिता इस फैसले से थोड़े चिंतित थे।
Rajat Sood: इंडियाज लाफ्टर चैंपियन रजत सूद से समझिए पॉमेडी फंडा, फिनाले में मम्मी को देख इसलिए छूटे पसीने
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स्टेज शो के दौरान लोग कसते थे तंज
रजत सूद बचपन से ही तुक बंदी, रैप और कविताएं लिखते आ रहे है। वह कहते है, 'लिखते लिखते मैने मंच पर परफॉर्म करना शुरू किया तो पहले लोग तंज कसते थे। मंच कैसा भी हो, मैं हंसता खेलता रहता था। लोग कहने लगे कि कविता में बहुत ही सभ्य तरीके से पेश आया जाता है। तुम यहां कॉमेडी कर रहे हो। फिर कॉमेडी वाले शो में जाने लगा तो लोग कहने लगे, यहां बहुत हंसी मजाक वाला माहौल है और तुम दिल तोड़ने वाली करते हो। तब मुझे महसूस हुआ कि जब मुझमें दोनों कला है तो दोनों कला को मिलाकर कुछ करना चाहिए।
कॉमेडी को दिया नया नाम पॉमेडी
शो के दौरान रजत सूद कविता करते तो कहीं न कहीं बातें हास्यापद हो जाती थीं और कॉमेडी शो के दौरान कुछ ऐसी सीरियस बातें हो जातीं जो लोगों को पसंद नहीं आती थीं। रजत सूद कहते हैं, 'मैने कविता और कॉमेडी को मिलाकर एक नई चीज शुरू की और उसका नाम ‘पॉमेडी’ दिया। इसे लोगों ने खूब पसंद किया। यह लोगों के लिए नया है, लेकिन लोग यह बहुत पसंद कर रहे हैं। जिस तरह से लोगों ने पसंद किया है, मुझे लगता है कि अब लोगों के जीवन का यह एक हिस्सा बन गया है।'
बचपन में स्टेज पर हिम्मत नहीं होती थी
बचपन में रजत सूद स्टेज पर लोगों को कॉमेडी करते देखते थे तो उन्हें भी लगता था कि कॉमेडी करनी चाहिए, लेकिन हिम्मत नहीं होती थी। वह कहते हैं, 'बचपन में जब लोगों को स्टेज पर कॉमेडी करते देखता था तो मुझे लगता था कि मुझे भी ऐसा ही करना है, लेकिन तब मेरे अंदर हिम्मत नहीं थी। लेकिन मेरी दिली ख्वाहिश थी कि मुझे कॉमेडी करना ही है। कॉलेज के दौरान जब मैने देखा कि लोग स्टेज पर ऐसा कुछ कर रहे हैं तब मेरे अंदर थोड़ी हिम्मत आई। मुझे लगा कि इसको प्रोफेशन बनाया जा सकता है।'
इंजीनियर से बन गए पॉमेडियन
रजत सूद ने दिल्ली के से इंजीनियरिंग की पढ़ाई की है। वह कहते है, 'किसी तरह से मैने इंजीनियरिंग पूरी की। चार साल इंजीनियरिंग कोर्स के दौरान मुझे काफी कुछ अलग अलग चीजें सीखने को मिलीं। उस दौरान के अनुभवों को मैं स्टेज कार्यक्रम के दौरान पेश करता था जिसे लोग पसंद करने लगे। स्कूल और कॉलेज में जिस बात के लिए मुझे डांट पड़ती थी, उसी को जब स्टेज पर परफार्म करता था तो लोग खुश होते थे। मुझे लगा कि इससे ही प्रोफेशन बनाना सही रहेगा।'