बॉलीवुड की मशहूर दिवंगत अभिनेत्री निरूपा रॉय की आज पुण्यतिथि है। फिल्मी दुनिया में मां और देवी का किरदार निभा कर मशहूर हुईं अभिनेत्री का वास्तविक नाम कोकिला बेन है। उन्होंने सत्तर और अस्सी के दशक में लगातार कई फिल्मों में अपनी शानदार अदाकारी से दर्शकों के बीच अपनी अमिट छाप छोड़ी है। निरूपा रॉय ने बॉलीवुड के दिग्गज अभिनेता अमिताभ बच्चन के साथ कई फिल्मों में नजर आई हैं, जिनमें उन्होंने अभिनेता की मां का किरदार निभाया। पर्दे पर मां का किरदार निभा कर ख्याति हासलि करने वाली अभिनेत्री की पंद्रह साल की उम्र में ही शादी हो गई थी।
Nirupa Roy: पर्दे पर अमिताभ बच्चन समेत कई सितारों की बनीं मां, महज 15 साल की उम्र में हो गई थी शादी
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शादी के बात पति संग आ गई थी मुंबई
04 जनवरी 1931 को गुजरात में जन्मी निरूपा रॉय ने महज चौथी कक्षा तक ही पढ़ाई की थी। बहुत कम उम्र में उनके पिता ने अभिनेत्री की शादी कमल रॉय से करा दी थी। उनके पति का सपना था कि वो अभिनेता बनें, इस वजह से वह साल 1945 में अपनी पत्नी के साथ मुंबई आ गए। इस दौरान वह लगातार ऑडिशन देते रहते। एक बार गुजराती फिल्म के ऑडिशन के लिए वह अपनी पत्नी को भी साथ लेकर चले गए और वहां से निरूपा रॉय के अभिनय करियर की शुरुआत हुई। अभिनेत्री का इस ऑडिशन में चयन हो गए और इसके बाद उन्होंने एक के बाद एक कई फिल्में कीं।
'हर हर महादेव' के बाद देवी की तरह मिलने लगा था सम्मान
निरूपा रॉय ने अपने अभिनय करियर की शुरुआत गुजराती फिल्म 'गणसुंदरी' से की। इसके बाद उन्होंने 'हर हर महादेव' में त्रिलोक कपूर के साथ पार्वती देवी की भूमिका निभाई। इस भूमिका के बाद उन्हें देवी की तरह सम्मान मिलने लगा और इस बीच उन्होंने कई अन्य पौराणिक किरदार भी निभाए। उनकी पहली हिंदी फिल्म साल 1949 में प्रदर्शित हुई 'हमारी मंजिल' थी। अभिनेत्री ने फिल्म 'मुनीम जी' से मां का किरदार निभाना शुरू किया। वह इस फिल्म में देवानंद की मां बनी थीं। 1953 में ‘दो बीघा जमीन’ से उनके लिए सफलता की नए अवसर खुल गए। अभिनेत्री को ज्यादातर भूमिकाएं मां के किरदार में ही मिलीं। साल 1975 में रिलीज हुई यश चोपड़ा की ‘दीवार’ में वह अमिताभ बच्चन और शशि कपूर की मां के किरदार में नजर आईं। ये फिल्म उनके करियर में एक मील का पत्थर साबित हुई।
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तीन बार मिला सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेत्री का पुरस्कार
निरूपा रॉय को मुख्य अभिनेत्री से ज्यादा अमिताभ बच्चन की मां के रोल से लोकप्रियता मिली। एक समय में वह बॉलीवुड की मां के रूप में पहचानी जाने लगीं। उन्हें पचास के दशक में देवी माना जाता था और फिर सत्तर और अस्सी के दशक में उन्होंने मां के इतने किरदार निभाए की, उन्हें मां की उपाधि दी जाने लगी। अभिनेत्री द्वारा निभाए गए मां के किरदारों को दर्शकों से काफी ज्यादा सराहना मिली। अभिनेत्री ने अपने करियर में 250 से ज्यादा फिल्मों में काम किया और उन्हें इस दौरान तीन बार सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेत्री का राष्ट्रीय पुरस्कार भी मिला। वह फिल्मों में ज्यादा दुखी और परेशानियों से घिरी मां की भूमिका में नजर आईं और कई बड़े अभिनेताओं की मां का किरदार निभाया।
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साल 2004 में दिल का दौरा पड़ने से हो गई थी मृत्यु
अभिनेत्री ने कई फिल्मों में मां का किरदार निभाया। 'दीवार' के बाद वह 'खून पसीना', 'इंकलाब', 'अमर अकबर एंथोनी', 'सुहाग', 'गिरफ्तार', 'मुकद्दर का सिकंदर', 'मर्द' और 'गंगा-यमुना-सरस्वती' आदि कई फिल्मों में मां के किरदार में नजर आईं। निरूपा रॉय ने अमिताभ बच्चन से लेकर शशि कपूर, जितेंद्र जैसे कई अभिनेताओं की मां का रोल निभाया। साल 1999 में आई फिल्म 'लाल बादशाह' में वह आखिरी बार मां के किरदार में दिखाई पड़ी। इस फिल्म में अमिताभ बच्चन और निरूपा रॉय दोनों आखिरी बार मां-बेटे के रोल में दिखे थे। साल 2004 में निरूपा रॉय को लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड से सम्मानित किया गया। 72 वर्ष की आयु में 13 अक्टूबर 2004 को दिल का दौरा पड़ने से उनकी मौत हो गई थी।
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