आसमान में प्रकृति की आतिशबाजी देखना एक जबरदस्त और अद्भुत अनुभव होता है। यह अद्भुत नजारा 28-29 जुलाई की रात को आसमान में देखा जा सकता है। जब प्रति घंटे 15-20 उल्का पिंड और कुल मिलाकर 50 या उससे अधिक उल्का पिंडों की बारिश होगी। रात 12 से 1 बजे के बीच इस अनोखी खगोलीय घटना का लुत्फ नंगी आंखों से उठाया जा सकेगा।
आसमान में इस दिन दिखेगी मनमोहक आतिशबाजी, हर घंटे नजर आएंगे 15-20 उल्का पिंड
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वीर बहादुर सिंह नक्षत्रशाला के खगोलविद् अमर पाल सिंह ने बताया कि पृथ्वी अपने अक्ष पर घूमते हुए सूर्य का चक्कर लगाने के दौरान सोलर सिस्टम में मौजूद छोटे खगोल पिंडों के मलबे पृथ्वी के वायुमंडल में घुसने की कोशिश करते हैं। धरती के वायुमंडल में प्रवेश के दौरान ये घर्षण की वजह से जलने लगते हैं। जिस वजह से ये नजारा देखने लायक होता है।
उन्होंने बताया कि उस दिन चांद का आकार 66 फीसद होने कारण उल्का वृष्टि के नजारे को चंद्रमा के अस्त होने के बाद ही बखूबी देखा जा सकेगा। कोरोना महामारी के चलते प्रदूषण का स्तर भी घटा है, जिसके बाद आकाश में होने वाली ये खगोलीय घटनाएं और साफ नजर आने लगीं हैं।
इससे पहले अप्रैल के महीने में कई दिनों तक आकाश में उल्का पिंड की बारिश के नजारें देखने को मिले थे। बड़ी संख्या में लोगों ने आसमान में चमकदार रोशनी बिखेरने वाली इस उल्का वर्षा का आनंद लिया था।
सोलर सिस्टम के निर्माण के दौरान जो छोटे खगोलीय पिंड बड़े ग्रह बनने से बच गए थे, ये सभी ग्रह और धरती की तरह की सूर्य की परिक्रमा करते हैं। उन्हें विज्ञान की भाषा में उल्का पिंड या टूटता हुआ तारा कहा जाता है। ये लोहा, सिलिका, निक्किल, सिलिकेट से बने होते हैं। वायुमंडल के प्रवेश के बाद ये धरती से 80 किलोमीटर की दूरी पर धर्षण की वजह सेे जलने लगते हैं।