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मनीष हत्याकांड: एसआईटी के सामने हेड कांस्टेबल बोला- मैं गाड़ी चला रहा था, बेगुनाह हूं
अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर।
Published by: vivek shukla
Updated Thu, 14 Oct 2021 11:18 AM IST
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मनीष गुप्ता हत्याकांड का आरोपी आरोपी हेड कांस्टेबल कमलेश सिंह यादव।
- फोटो : अमर उजाला।
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कारोबारी मनीष की मौत मामले में बुधवार को पकड़े गए पांचवें आरोपी कमलेश सिंह यादव से एसआईटी कानपुर ने रामगढ़ताल थाने में करीब चार घंटे तक पूछताछ की। इस दौरान पूछे गए ज्यादातर सवालों के जवाब में उसने कहा कि मैं गाड़ी चला रहा था, मुझे कुछ भी नहीं मालूम, बेगुनाह हूं। होटल के अंदर विवाद के सवाल पर उसका कहना था कि वह सरकारी गाड़ी को चला रहा था और होटल के अंदर नहीं गया था। सभी के बाहर आने पर गाड़ी लेकर मानसी अस्पताल गया, जहां से मेडिकल भी गया। मेडिकल कॉलेज पहुंचने में हुई देरी के सवाल पर आरोपी कमलेश ने बताया कि जाम की वजह से देरी हुई हालांकि, रात में जाम के सवाल पर पहले चुप्पी साध ली, फिर वही जवाब दोहराया।
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मनीष गुप्ता की फाइल फोटो
- फोटो : अमर उजाला
मनीष को लावारिस बताने वाले दरोगा अजय कुमार हटाए गए
मनीष गुप्ता को बीआरडी मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराने के लिए दो पर्ची कटवाने के मामले में रामगढ़ताल थाने के दरोगा अजय कुमार पर गाज गिरी है। एसएसपी डॉ. विपिन ताडा ने दरोगा को रामगढ़ताल से हटाकर गीडा भेज दिया है।
मनीष गुप्ता को बीआरडी मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराने के लिए दो पर्ची कटवाने के मामले में रामगढ़ताल थाने के दरोगा अजय कुमार पर गाज गिरी है। एसएसपी डॉ. विपिन ताडा ने दरोगा को रामगढ़ताल से हटाकर गीडा भेज दिया है।
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मनीष गुप्ता हत्याकांड के मामले में जांच करती एसआईटी।
- फोटो : अमर उजाला।
जानकारी के मुताबिक, मनीष गुप्ता को पहले अज्ञात बताकर बीआरडी मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया था। पांच मिनट बाद ही दूसरी पर्ची कटवाई गई और मनीष का नाम लिखा गया। एसआईटी की छानबीन में यह बदमाशी पकड़ी गई थी। छानबीन से ही पता चला कि मनीष को दरोगा अजय कुमार ने मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया था। इसी दौरान यह खेल हुआ। इसी का नतीजा रहा कि एसएसपी ने अजय कुमार को थाने से हटा दिया है।
मृतक कारोबारी मनीष गुप्ता।
- फोटो : अमर उजाला।
बड़ी बदमाशी की छोटी सजा
मौत के बाद जिस तरह से कारोबारी मनीष को दुर्घटना में मृत दिखाने के लिए रामगढ़ थाने के तत्कालीन इंस्पेक्टर जेएन सिंह ने साजिश रची थी। घटनाक्रम में जाएं तो दरोगा अजय कुमार भी उसके एक किरदार हैं। सब कुछ जानते हुए, उन्होंने मेडिकल कॉलेज में मनीष को भर्ती कराने के लिए अज्ञात में पर्ची कटवाई थी, फिर एसआईटी ने इन्हें क्यों बख्श दिया? यह भी बड़ा सवाल है।
मौत के बाद जिस तरह से कारोबारी मनीष को दुर्घटना में मृत दिखाने के लिए रामगढ़ थाने के तत्कालीन इंस्पेक्टर जेएन सिंह ने साजिश रची थी। घटनाक्रम में जाएं तो दरोगा अजय कुमार भी उसके एक किरदार हैं। सब कुछ जानते हुए, उन्होंने मेडिकल कॉलेज में मनीष को भर्ती कराने के लिए अज्ञात में पर्ची कटवाई थी, फिर एसआईटी ने इन्हें क्यों बख्श दिया? यह भी बड़ा सवाल है।
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मनीष गुप्ता हत्याकांड के आरोपी इंस्पेक्टर व दरोगा।
- फोटो : अमर उजाला।
आखिर जेएन सिंह और चार अन्य पुलिसकर्मी, हत्या और इसी साजिश के आरोप के चलते ही तो जेल में हैं, फिर अजय कुमार को केवल चौकी इंचार्ज के पद से हटाने भर की सजा क्यों दी गई?

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