पुलिस की लापरवाही से तीन साल में ही उजड़ गया मांग का सिंदूर, थाने में होती सुनवाई तो नहीं होती वारदात
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बता दें कि जिस तरह से रविवार को गगहा में सूचना देने के बाद भी पुलिस गांव में नहीं गई, समझौते में व्यस्त थी और फिर मां-बेटे की हत्या हो गई, कुछ वैसी ही लापरवाही झंगहा में भी सामने आई है। यहां पर भी तीन महीने पहले जिस अनिरुद्ध ने विवाद होने के बाद थाने में फरियाद की थी और पुलिस बातचीत कराकर समझौता करा दी, अब उसकी हत्या हो गई। परिवार और गांववालों का गुस्सा यही है कि पुलिस तभी कार्रवाई की होती तो शायद ऐसी घटना नहीं होती। इसी गुस्से की वजह से शव लेकर थाने पर प्रदर्शन किया गया।
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जानकारी के मुताबिक, अफसर लगातार पुलिस वालों को मामले की गंभीरता समझने की नसीहत दे रहे हैं मगर उनकी कार्यप्रणाली पर इसका कोई खास असर नहीं दिख रहा। जिले में तीन दिन के भीतर डबल मर्डर और फिर झंगहा में हत्या में पुलिस की यही लापरवाही सामने आई है जिसमें कार्रवाई ना करने की वजह से बड़ी वारदात हो गई। हालांकि नवागत एसएसपी जोगिंदर कुमार आने के बाद से इस पर विशेष जोर दे रहे हैं कि फरियाद सुनी जाए, मगर इसके पहले जो लापरवाही हुई है उसने कानून व्यवस्था को पटरी से उतार दिया है।
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तीन साल में ही उजड़ गया मांग का सिंदूर
तीन साल में ही प्रेमलता की मांग का सिंदूर उजड़ गया। रोते-रोते वह बेहोश हो जा रही हैं तो घरवाले उन्हें किसी तरह से संभाल रहे हैं। जिस समय अनिरुद्ध घर से निकला था उस वक्त पत्नी घर में किसी काम में व्यस्त थीं और उन्हें पति के घायल होने के बाद जानकारी मिली। उसे मलाल है कि आखिरी बार भी वह पति को नहीं देख पाई। क्योंकि घायल होने के बाद बाहर से ही उसे लेकर घरवाले लखनऊ जा रहे थे और रास्ते में ही मौत हो गई।
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जानकारी के मुताबिक, अनिरुद्ध की शादी इंद्रानगर की प्रेमलता से तीन साल पहले 31 मई 2017 को हुई थी। शादी के बाद वह करीब छह महीने तक विदेश भी रहा और फिर गांव लौटने के बाद खेती-बारी कर जीवन यापन करने लगा था मगर मामूली सी बात पर उसकी हत्या कर दी गई। उन्हें कोई औलाद नहीं थी। हालांकि गांव वालों का कहना है कि हत्या की वजह बाइक की गति नहीं बल्कि पुरानी रंजिश है, जिसे लेकर वारदात हुई। बाइक की गति को लेकर जबरन विवाद किया गया और फिर वारदात कर दी गई। अनिरुद्ध तीन भाइयों में बड़ा था।
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