बेहतर अनुभव के लिए ऐप चुनें।
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें

Cyrus Mistry funeral: पारसी धर्म में आसमान को ऐसे सौंपते हैं शव, गिद्धों की वजह से बदल रही परंपरा

स्पेशल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: हिमांशु मिश्रा Updated Tue, 06 Sep 2022 03:35 PM IST
सार

कहा जाता है कि पारसी परंपरा में अंतिम संस्कार की प्रक्रिया काफी कठिन होती है। हिंदू धर्म में शव को अग्नि या जल को सौंपा जाता है, मुस्लिम और ईसाई समुदाय में शव को दफन कर दिया जाता है, लेकिन पारसी समुदाय में ऐसा नहीं होता है। पारसी लोग शव को आसमान को सौंप देते हैं, जिसे गिद्ध, चील, कौए खा जाते हैं। 

विज्ञापन
Cyrus Mistry funeral: In Parsi religion, the dead bodies are handed over to the sky, tradition is change
पारसी समुदाय में ऐसे होता है अंतिम संस्कार - फोटो : अमर उजाला
टाटा सन्स के पूर्व चेयरमैन सायरस मिस्त्री की रविवार को सड़क हादसे में मौत हो गई। सायरस पारसी समुदाय से आते हैं। लेकिन उनका अंतिम संस्कार पारसी परंपरा के अनुसार नहीं किया गया। कहा जाता है कि पारसी परंपरा में अंतिम संस्कार की प्रक्रिया काफी कठिन होती है। हिंदू धर्म में शव को अग्नि या जल को सौंपा जाता है, मुस्लिम और ईसाई समुदाय में शव को दफन कर दिया जाता है, लेकिन पारसी समुदाय में ऐसा नहीं होता है। पारसी लोग शव को आसमान को सौंप देते हैं, जिसे गिद्ध, चील, कौए खा जाते हैं। 


आखिर पारसी संप्रदाय में अंतिम संस्कार कैसे किया जाता है? मौजूदा दौर में इस संप्रदाय को अंतिम संस्कार से जुड़ी कौन सी चुनौतियों का सामना करना पड़ा है? सायरस मिस्त्री का अंतिम संस्कार के लिए परंपरा को क्यों बदला गया? आइए जानते हैं...
 
Trending Videos
Cyrus Mistry funeral: In Parsi religion, the dead bodies are handed over to the sky, tradition is change
टॉवर ऑफ साइलेंस - फोटो : अमर उजाला
आसमान को क्यों सौंप देते हैं शव? 
हिंदू धर्म में शव को अग्नि या जल को सौंपते हैं। मतलब शव को जलाया या जल में प्रवाहित कर दिया जाता है। कुछ जगहों पर शव को दफन करने की परंपरा भी है। वहीं, मुस्लिम व ईसाई धर्म में शव को धरती को सौंप दिया जाता है। मतलब दफन कर दिया जाता है। 

वहीं, पारसी संप्रदाय में अंतिम संस्कार बिल्कुल अलग होता है। पारसी लोग अग्नि को देवता मानते हैं। इसी तरह जल और धरती को भी पवित्र मानते हैं। जबकि शव को अपवित्र माना जाता है। ऐसे में उनका मानना है कि शव को जलाने, प्रवाहित करने या दफन करने से अग्नि, जल या धरती अपवित्र हो जाती है। ऐसा करने से ईश्वर की संरचना प्रदूषित होती है। इसलिए पारसी समुदाय में शव को आसमान को सौंप दिया जाता है। 
 
विज्ञापन
विज्ञापन
Cyrus Mistry funeral: In Parsi religion, the dead bodies are handed over to the sky, tradition is change
टॉवर ऑफ साइलेंस - फोटो : अमर उजाला
फिर शव का क्या होता है?
अब आप सोच रहे होंगे कि आखिर पारसी लोग कैसे शव को आसमान को सौंपते हैं? दरअसल इसके लिए टावर ऑफ साइलेंस बनाया गया है। इसे दखमा भी कहा जाता है। ये एक बड़ा सा गोलाकार कढ़ाईनुमा कूप होता है। इसमें शव को सूरज की रोशनी में पारसी लोग ले जाकर छोड़ देते हैं। जिसे बाद में गिद्ध, चील, कौए खा जाते हैं। दुनियाभर में पारसी समुदाय से जुड़े लोगों की आबादी करीब डेढ़ लाख है। इनमें से ज्यादातर मुंबई में रहते हैं। यही कारण है कि मुंबई के बाहरी इलाके में टावर ऑफ साइलेंस बनाया गया है। 
 
Cyrus Mistry funeral: In Parsi religion, the dead bodies are handed over to the sky, tradition is change
सायरस मिस्त्री के अंतिम संस्कार के लिए कई लोग पहुंचे। - फोटो : अमर उजाला
सायरस मिस्त्री के लिए क्यों बदली परंपरा? 
दरअसल दखमा में रखे शव को ज्यादातर गिद्ध ही खाते हैं। पिछले कुछ सालों में गिद्धों की संख्या तेजी से घट गई है। अब ज्यादा गिद्ध नहीं दिखते हैं। पारसी समुदाय के लिए यही चिंता का सबब है। अब पारसी लोगों को इस पद्धति से अंतिम संस्कार करने में दिक्कत आ रही है। क्योंकि, शव को खाने के लिए गिद्ध नहीं पहुंचते तो यह सड़ जाता है। इसके चलते दूर-दूर तक बदबू फैल जाती है और बीमारी फैलने का भी डर होता है। 

कोरोनाकाल के दौरान भी ये मुद्दा उठा था। उस दौरान भी पारसी धर्म गुरु चाहते थे कि इसी पद्धति से शवों का अंतिम संस्कार किया जाए, लेकिन ये कोविड नियमों के अनुरूप नहीं था। विशेषज्ञों ने इसके लिए तर्क दिया कि इस तरह से संक्रमण फैलने का खतरा बढ़ जाएगा। पक्षियों में भी संक्रमण फैल सकता है। ऐसे में यह मामला सुप्रीम कोर्ट भी पहुंचा। अब बहुत पारसी समुदाय के बहुत से लोग विद्युत शवदाहगृह में अंतिम संस्कार करा रहे हैं। सायरस मिस्त्री का अंतिम संस्कार भी विद्युत शवदाहगृह में ही हुआ। 
 
विज्ञापन
Cyrus Mistry funeral: In Parsi religion, the dead bodies are handed over to the sky, tradition is change
सायरस मिस्त्री की कार हुई क्षतिग्रस्त - फोटो : सोशल मीडिया
सायरस मिस्त्री के साथ क्या हुआ था? 
सायरस मिस्त्री गुजरात के उदवाड़ा स्थित पारसी मंदिर ईरानशाह आतश बेहराम गए थे। वहां से रविवार को मुंबई लौटते वक्त उनकी मर्सिडीज कार महाराष्ट्र के पालघर जिले के सूर्या नदी पर बने एक पुलिया के पास डिवाइडर से टकरा गई। हादसे के वक्त कार में मिस्त्री समेत चार लोग बैठे थे। कार मुंबई की मशहूर स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. अनाहिता पंडोले चला रही थीं। हादसे में डॉ. पंडोले व उनके साथ आगे की सीट पर बैठे उनके पति डेरियस पंडोले गंभीर रूप से घायल हुए हैं। वहीं, पिछली सीट पर बैठे सायरस मिस्त्री और डेरियस के भाई जहांगीर पंडोले बैठे की हादसे के वक्त ही मौत हो गई। डॉ. अनाहिता पंडोले और उनके पति का इलाज चल रहा है। अनाहिता और उनके पति को कई फ्रैक्चर्स हुए हैं।
अगली फोटो गैलरी देखें
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

एप में पढ़ें

Followed