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BJP Plan: क्या वाकई देश में केवल भाजपा बचेगी, आखिर नड्डा ने क्यों कहा कि बाकी सभी पार्टियां खत्म हो जाएंगी?
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: हिमांशु मिश्रा
Updated Mon, 01 Aug 2022 10:55 PM IST
सार
भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा ने कहा कि अगर हम (भाजपा) अपनी विचारधारा पर चलते रहे तो देश से क्षेत्रीय पार्टियां खत्म हो जाएंगी। केवल भाजपा बचेगी।
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देश का सियासी नक्शा।
- फोटो : अमर उजाला
भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष जेपी नड्डा रविवार को बिहार में थे। यहां उन्होंने राज्य के सात जिलों के कार्यालय का शिलान्यास किया। इस दौरान नड्डा ने कुछ ऐसा बोल दिया, जिसने सियासी गलियारे में हलचल पैदा कर दी। बात भी कुछ ऐसी ही थी। नड्डा ने कहा कि अगर हम (भाजपा) अपनी विचारधारा पर चलते रहे तो देश से क्षेत्रीय पार्टियां खत्म हो जाएंगी। केवल भाजपा बचेगी।
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बीजेपी राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा
- फोटो : अमर उजाला
पहले जानिए नड्डा ने क्या-क्या कहा?
जेपी नड्डा ने कहा, 'भाजपा एक विचारधारा से प्रेरित है। हम एक विचारधारा पर आधारित पार्टी हैं। हम एक कैडर-आधारित पार्टी हैं और 'कार्यालयों' की एक बड़ी भूमिका है। भाजपा कार्यालय कार्यकर्ताओं के लिए एक बिजलीघर है। एक ऐसी जगह है जहां से करोड़ों कार्यकर्ता पैदा होंगे।'
भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा ने कहा, 'मैं बार-बार कहता हूं कि देखो अगर ये विचारधारा नहीं होती तो हम इतनी बड़ी लड़ाई नहीं लड़ सकते थे। सब लोग (अन्य राजनीतिक दल) मिट गए। समाप्त हो गए और जो नहीं हुए वो हो जाएंगे। रहेगी तो केवल बीजेपी ही रहेगी। भाजपा के विरोध में लड़ने वाली कोई राष्ट्रीय पार्टी बची नहीं। हमारी असली लड़ाई परिवारवाद और वंशवाद से है।’
नड्डा ने कहा, 'हम विचार से जुड़ी पार्टी हैं। मुझसे कई बार लोग कांग्रेस और बाकी पार्टियों के बारे में बताते हैं। मैं कहता हूं कर लेने दो कोशिश। हमारे बराबर खड़े होने के लिए इनको 40 साल लग जाएंगे। इनका कुछ नहीं होने वाला है। ये जितने कैंप लगाना चाहते हैं, लगा लें। इन्हें CAMP समझने में ही पूरा समय लग जाएंगे।'
जेपी नड्डा ने कहा, 'भाजपा एक विचारधारा से प्रेरित है। हम एक विचारधारा पर आधारित पार्टी हैं। हम एक कैडर-आधारित पार्टी हैं और 'कार्यालयों' की एक बड़ी भूमिका है। भाजपा कार्यालय कार्यकर्ताओं के लिए एक बिजलीघर है। एक ऐसी जगह है जहां से करोड़ों कार्यकर्ता पैदा होंगे।'
भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा ने कहा, 'मैं बार-बार कहता हूं कि देखो अगर ये विचारधारा नहीं होती तो हम इतनी बड़ी लड़ाई नहीं लड़ सकते थे। सब लोग (अन्य राजनीतिक दल) मिट गए। समाप्त हो गए और जो नहीं हुए वो हो जाएंगे। रहेगी तो केवल बीजेपी ही रहेगी। भाजपा के विरोध में लड़ने वाली कोई राष्ट्रीय पार्टी बची नहीं। हमारी असली लड़ाई परिवारवाद और वंशवाद से है।’
नड्डा ने कहा, 'हम विचार से जुड़ी पार्टी हैं। मुझसे कई बार लोग कांग्रेस और बाकी पार्टियों के बारे में बताते हैं। मैं कहता हूं कर लेने दो कोशिश। हमारे बराबर खड़े होने के लिए इनको 40 साल लग जाएंगे। इनका कुछ नहीं होने वाला है। ये जितने कैंप लगाना चाहते हैं, लगा लें। इन्हें CAMP समझने में ही पूरा समय लग जाएंगे।'
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भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. जेपी नड्डा, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह। (फाइल फोटो)
- फोटो : अमर उजाला
भाजपा का कैसे ग्राफ बढ़ा?
ये समझने के लिए हमने वरिष्ठ पत्रकार संजय मिश्र से बात की। उन्होंने कहा, 'मौजूदा समय देश के 19 राज्यों में भाजपा सत्ता में है। इन राज्यों में देश की करीब 59% फीसदी आबादी रहती है। वहीं, कांग्रेस की सरकार अब चार राज्यों तक ही सिमटकर रह गई है। इन चार राज्यों में देश की करीब 16 फीसदी आबादी रहती है।'
आगे उन्होंने कहा, 'मई 2014 में नरेंद्र मोदी भारत के प्रधानमंत्री बने। मोदी के सत्ता में आने के वक्त देश के सात राज्यों में भाजपा और उसके सहयोगियों की सरकारें थीं। इनमें पांच राज्यों में भाजपा के मुख्यमंत्री थे। वहीं, बिहार और पंजाब में उसकी सहयोगी पार्टी सरकार चला रही थी। इन दो राज्यों में देश की 11 फीसदी से ज्यादा आबादी रहती है। बाकी पांच राज्यों छत्तसीगढ़, गोवा, गुजरात, मध्य प्रदेश और राजस्थान में भाजपा के मुख्यमंत्री थे। इन राज्यों में देश की 19 फीसदी आबादी रहती है। यानी, जब मोदी सत्ता में आए उस वक्त करीब 30 फीसदी आबादी पर भाजपा और उसकी सहयोगी सरकारें चल रही थीं।'
ये समझने के लिए हमने वरिष्ठ पत्रकार संजय मिश्र से बात की। उन्होंने कहा, 'मौजूदा समय देश के 19 राज्यों में भाजपा सत्ता में है। इन राज्यों में देश की करीब 59% फीसदी आबादी रहती है। वहीं, कांग्रेस की सरकार अब चार राज्यों तक ही सिमटकर रह गई है। इन चार राज्यों में देश की करीब 16 फीसदी आबादी रहती है।'
आगे उन्होंने कहा, 'मई 2014 में नरेंद्र मोदी भारत के प्रधानमंत्री बने। मोदी के सत्ता में आने के वक्त देश के सात राज्यों में भाजपा और उसके सहयोगियों की सरकारें थीं। इनमें पांच राज्यों में भाजपा के मुख्यमंत्री थे। वहीं, बिहार और पंजाब में उसकी सहयोगी पार्टी सरकार चला रही थी। इन दो राज्यों में देश की 11 फीसदी से ज्यादा आबादी रहती है। बाकी पांच राज्यों छत्तसीगढ़, गोवा, गुजरात, मध्य प्रदेश और राजस्थान में भाजपा के मुख्यमंत्री थे। इन राज्यों में देश की 19 फीसदी आबादी रहती है। यानी, जब मोदी सत्ता में आए उस वक्त करीब 30 फीसदी आबादी पर भाजपा और उसकी सहयोगी सरकारें चल रही थीं।'
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का स्वागत करते राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. जेपी नड्डा, गृहमंत्री अमित शाह और रक्षामंत्री राजनाथ सिंह।
- फोटो : अमर उजाला
2014 में क्या स्थिति थी?
मिश्र बताते हैं, '2014 में जब नरेंद्र मोदी सत्ता में आए उस वक्त देश के 14 राज्यों में कांग्रेस और उसके सहयोगी पार्टियों की सरकार थी। कांग्रेस शासित इन राज्यों में देश की 27 फीसदी से ज्यादा आबादी रहती है। इन राज्यों में महाराष्ट्र और कर्नाटक जैसे दो बड़े राज्य शामिल थे। 2014 में सात राज्यों में भाजपा और उसके सहयोगियों की सरकार थी। चार साल बाद मार्च 2018 में 21 राज्यों में भाजपा और उसके सहयोगियों की सरकार थी। इन राज्यों में देश की करीब 71 फीसदी आबादी रहती है। ये वो दौर था जब भाजपा शासन आबादी के लिहाज से पीक पर था। वहीं, चार राज्यों में कांग्रेस की सरकार थी। इन राज्यों की सात फीसदी आबादी रहती है।'
मिश्र बताते हैं, '2014 में जब नरेंद्र मोदी सत्ता में आए उस वक्त देश के 14 राज्यों में कांग्रेस और उसके सहयोगी पार्टियों की सरकार थी। कांग्रेस शासित इन राज्यों में देश की 27 फीसदी से ज्यादा आबादी रहती है। इन राज्यों में महाराष्ट्र और कर्नाटक जैसे दो बड़े राज्य शामिल थे। 2014 में सात राज्यों में भाजपा और उसके सहयोगियों की सरकार थी। चार साल बाद मार्च 2018 में 21 राज्यों में भाजपा और उसके सहयोगियों की सरकार थी। इन राज्यों में देश की करीब 71 फीसदी आबादी रहती है। ये वो दौर था जब भाजपा शासन आबादी के लिहाज से पीक पर था। वहीं, चार राज्यों में कांग्रेस की सरकार थी। इन राज्यों की सात फीसदी आबादी रहती है।'
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गृहमंत्री अमित शाह, भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी।
- फोटो : अमर उजाला
अभी कई राज्यों में चुनाव होने हैं
संजय आगे कहते हैं, 'भाजपा का ग्राफ देखकर ये कहा जा सकता है कि अभी भाजपा काफी मजबूती से आगे बढ़ेगी। 2023 में नौ राज्यों में विधानसभा चुनाव होने हैं। इनमें मेघालय, नगालैंड, त्रिपुरा, कर्नाटक, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, मिजोरम, राजस्थान और तेलंगाना शामिल हैं। अभी कर्नाटक, त्रिपुरा, मध्य प्रदेश में भाजपा की सरकार है। इसके अलावा मेघालय, नगालैंड में भाजपा गठबंधन के साथ सरकार में है। छत्तीसगढ़ और राजस्थान में कांग्रेस जबकि तेलंगाना में टीआरएस की सरकार है। 2024 में लोकसभा और सात राज्यों के विधानसभा चुनाव भी होंगे। इनमें सिक्किम, आंध्र प्रदेश, अरुणाचल प्रदेश, ओडिशा, हरियाणा, महाराष्ट्र, झारखंड शामिल हैं। अभी हरियाणा, अरुणाचल प्रदेश, सिक्किम और महाराष्ट्र में भाजपा सत्ता में है। ओडिशा में बीजद, आंध्र प्रदेश में वाईएसआरसीपी की वाली सरकार है। इन राज्यों में भाजपा के सामने बड़ी चुनौती यह है कि जहां वह सरकार में है, उसे कायम रखना और जहां वह विपक्ष में है, वहां जीत हासिल करना।'
संजय आगे कहते हैं, 'भाजपा का ग्राफ देखकर ये कहा जा सकता है कि अभी भाजपा काफी मजबूती से आगे बढ़ेगी। 2023 में नौ राज्यों में विधानसभा चुनाव होने हैं। इनमें मेघालय, नगालैंड, त्रिपुरा, कर्नाटक, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, मिजोरम, राजस्थान और तेलंगाना शामिल हैं। अभी कर्नाटक, त्रिपुरा, मध्य प्रदेश में भाजपा की सरकार है। इसके अलावा मेघालय, नगालैंड में भाजपा गठबंधन के साथ सरकार में है। छत्तीसगढ़ और राजस्थान में कांग्रेस जबकि तेलंगाना में टीआरएस की सरकार है। 2024 में लोकसभा और सात राज्यों के विधानसभा चुनाव भी होंगे। इनमें सिक्किम, आंध्र प्रदेश, अरुणाचल प्रदेश, ओडिशा, हरियाणा, महाराष्ट्र, झारखंड शामिल हैं। अभी हरियाणा, अरुणाचल प्रदेश, सिक्किम और महाराष्ट्र में भाजपा सत्ता में है। ओडिशा में बीजद, आंध्र प्रदेश में वाईएसआरसीपी की वाली सरकार है। इन राज्यों में भाजपा के सामने बड़ी चुनौती यह है कि जहां वह सरकार में है, उसे कायम रखना और जहां वह विपक्ष में है, वहां जीत हासिल करना।'
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