कश्मीरी अर्थव्यवस्था की रीढ़ कहलाने वाले पर्यटन उद्योग को जबरदस्त झटका लगा है। पर्यटन व्यवसाय से जुड़े टैक्सी ऑपरेटर निराश हैं। उनका मानना है कि घाटी में हालात सामान्य होने और पर्यटकों की वापसी तक उनका व्यवसाय प्रभावित ही रहेगा। फिलहाल उन्हें अपना भविष्य धूमिल नजर आ रहा है।
कश्मीरः हालात का शिकार हुई शिकारा, लोग बोले...कैसे चलेगा घर-परिवार, देखिए तस्वीरें
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मालूम हो कि राज्य में अनुच्छेद 370 के प्रावधान हटाए जाने और राज्य को दो केंद्र शासित प्रदेशों में विभाजित करने के केंद्र सरकार के फैसले से पहले दो अगस्त को जम्मू-कश्मीर में प्रशासन ने अमरनाथ यात्रा को रोक दिया था और तीर्थ यात्रियों और पर्यटकों को कश्मीर घाटी छोड़ने के लिए कहा था। इसके साथ ही घाटी में सख्त पाबंदियां लागू कर दी गई थीं।
टैक्सी ऑपरेटर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष मो. अशरफ लोन कहते हैं,पर्यटन का मौसम समाप्त हो चुका है । पर्यटन व्यवसाय से जुड़े हम सभी लोग घबराए हुए हैं। भविष्य धूमिल दिखाई दे रहा है। हमें फिलहाल अगले वर्ष मार्च से पहले कोई उम्मीद नहीं दिखाई दे रही। जबकि इस बार उन्हें बेहतर व्यावसायिक सीजन की उम्मीद थी।
उन्होंने कहा कि स्टैंड पर मौजूद 200 टैक्सी ऑपरेटरों में से 85 फीसदी ने बैंकों से कर्ज ले रखा है। अब वह सभी मासिक किस्तों को लेकर चिंतित हैं। इन्हें 8000 से लेकर 20000 प्रतिमाह की किस्त चुकानी पड़ती है। उन्होंने कहा कि हम जानते हैं कि सोमवार को ईद के बाद स्थानीय निवासियों का आगमन भी बंद हो जाएगा। फिर हमें कोई काम नहीं मिलेगा।
दूसरी ओर जो लोग शनिवार को हवाई अड्डे पर उतरे वह घर पहुंचने के लिए टैक्सी चालकों को अतिरिक्त भुगतान के लिए भी तैयार थे। मॉरीशस से यहां पहुंचे एक छात्र ने बताया कि उसने लंबे समय के बाद अपने परिवार के साथ बकरीद का त्योहार मनाने के लिए महीनों पहले अपनी यात्रा की योजना बनाई थी। संचार माध्यम बंद होने के बाद वह काफी हताश है। कम से कम लैंड लाइन तो चालू रहनी चाहिए। श्रीनगर के सिविल लाइंस इलाके का निवासी उक्त युवक जल्द से जल्द अपने घर पहुंचना चाहता था।