श्रीनगर में रविवार को आतंकी हमले में सब इंस्पेक्टर अर्शीद अहमद शहीद हो गए। यह हमला घात लगाकर किया गया था। इसी तरह का हमला जून महीने में नौगाम में हुआ था। जिसमें एक आतंकी ने पुलिस इंस्पेक्टर परवेज अहमद डार पर पीछे से फायरिंग की थी। इन दोनों कायरना हमलों में आतंकियों ने पिस्टल का उपयोग किया।
हाइब्रिड आतंकी: पीठ पर गोलियां दाग हुआ फरार, इसी तरह हुई थी डार की हत्या, कैमरे में कैद हुई कायरता
कश्मीर में हाइब्रिड आतंकियों की मौजूदगी ने सुरक्षाबलों के कान खड़े कर दिए हैं। सुरक्षाबलों के लिए यह नई चुनौती है। स्लीपर सेल की तरह के ये पार्टटाइम आतंकी निहत्थों को निशाना बना रहे हैं। कश्मीर में हाल ही में हुईं नेताओं व पुलिसकर्मियों की हत्याओं में हाइब्रिड आतंकी शामिल थे। इन पार्टटाइम हाइब्रिड आतंकियों को ट्रैक करने में दिक्कतें आती हैं क्योंकि ये वारदात को अंजाम देने के बाद अपने सामान्य कामकाज में लग जाते हैं। लेकिन ऐसे हाइब्रिड आतंकियों पर अब पूरी निगरानी रखी जा रही है।
श्रीनगर समेत घाटी में पिछले कुछ सप्ताह में साफ्ट टारगेट को निशाना बनाने की घटनाओं में बढ़ोतरी हुई है। ये घटनाएं ऐसे पिस्तौल धारी युवकों की ओर से करवाई गई है जो सुरक्षा एजेंसियों की सूची में आतंकी के रूप में नहीं हैं। ऐसे आतंकियों को खोजना मुश्किल होता है।
सुरक्षा एजेंसियों से जुड़े सूत्रों ने बताया कि हाइब्रिड आतंकियों को हैंडलर्स की ओर से आतंकी घटनाओं को अंजाम देने के लिए स्टैंडबाय में रखा जाता है। वह दिए गए टास्क को पूरा करने के बाद नए टास्क का इंतजार करते हैं। इस बीच वह अपने सामान्य कामकाज को करने लगते हैं।
हाइब्रिड आतंकी वे हैं जो सुरक्षाबलों की सूची में नहीं है। स्लीपर सेल की तरह ही इन युवाओं को पार्टटाइम आतंकी बनाया गया है। लेकिन इन्हें बरगलाकर इस तरह का कट्टरपंथी बनाया जाता है कि हैंडलर की ओर से सौंपे गए टास्क के तहत हमले कर सकते हैं। इसके बाद वे अपने सामान्य कामकाज में जुट जाते हैं। इन्हें पहचानने में दिक्कतें आती हैं।
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