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जानिए कैसे फूल सुधारेंगे लेह-लद्दाख के किसानों की आर्थिक स्थिति, आप भी कर सकते हैं यह काम
Wed, 18 Sep 2019 06:18 PM IST
Pranjal Dixit
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
Published by: Pranjal Dixit
Updated Wed, 18 Sep 2019 06:18 PM IST
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गुलाब
- फोटो : फाइल, अमर उजाला
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जम्मू-कश्मीर से धारा 370 हटने के बाद अलग केंद्रीय शासित प्रदेश बने लेह-लद्दाख के किसानों की आर्थिक स्थिति को फूल सुधारेंगे। लेह-लद्दाख में केसर सहित दमस्क गुलाब, कैमोमाइल, जंगली गेंदा, रोजमेरी, लैवेंडर और ड्रेकोसेफेलम फूलों की खेती होगी। वहां सीएसआईआर-आईएचबीटी पालमपुर सुगंधित फसलों की खेती करेगा। इन फूलों के लिए वहां की जमीन और जलवायु बेहतर पाई गई है।
कैमोमाइल
- फोटो : फाइल, अमर उजाला
लेह-लद्दाख में सुगंधित फूलों की खेती के लिए सीएसआईआर ने लेह और लद्दाख की फार्मर्स एंड प्रोड्यूसर्स कोऑपरेटिव लिमिटेड लद्दाख के साथ समझौता किया है। सिंचाई सुविधाओं से वंचित इस इलाके की उपयोगिता को बढ़ाने के लिए कार्य किया जा रहा है। इसी कड़ी में सीएसआईआर और सोसायटी ने यह फैसला लिया है।
जंगली गेंदा
- फोटो : फाइल, अमर उजाला
भारतीय उपमहाद्वीप के उतरी भाग में स्थित लद्दाख का क्षेत्र इस समय करीब 59.146 वर्ग किलोमीटर है। प्रयोग सफल रहा तो आने वाले दिनों में इन क्षेत्रों की तकदीर बदल जाएगी। खेती को बढ़ावा देने के लिए अगस्त माह में लेह के रणवीरपुरा गांव में जागरूकता और प्रशिक्षण किसानों को दिया जा चुका है। यह देख लेह और लद्दाख के किसानों ने सुगंधित फसलों के लिए अपनी इच्छा जाहिर की है।
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रोजमेरी
- फोटो : फाइल, अमर उजाला
लिहाजा, अब सीएसआईआर और लद्दाख फार्मर्स एंड प्रोड्यूसर्स कोऑपरेटिव लिमिटेड (एलएफपीसीएल) मिलकर इस काम को करेगी। वहीं किसानों को जंगली गेंदा, कैमोमाइल और केसर के बीज के साथ कृषि प्रौद्योगिकियों की पूरी जानकारी के पैकेज भी प्रदान किए गए। संस्थान के प्रधान वैज्ञानिक डॉ. राकेश कुमार ने बताया कि लेह और लद्दाख क्षेत्र उच्च मूल्य की सुगंधित फसलों की खेती के लिए उपयुक्त है।
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लैवेंडर
- फोटो : फाइल, अमर उजाला
5500 हेक्टेयर अतिरिक्त क्षेत्र लाने का निर्णय लिया
आईएचबीटी के निदेशक संजय कुमार ने बताया कि सुगंधित फसलों को बढ़ावा देने के लिए अरोमा मिशन कार्यक्रम के तहत 5500 हेक्टेयर अतिरिक्त क्षेत्र लाने का निर्णय लिया। सुगंधित पौधों के मूल्य संवर्धन के लिए प्रसंस्करण इकाई अनिवार्य है। लेह में इस सुविधा की स्थापना से लेह जिले के स्थानीय किसानों को लाभ होगा। सुगंधित फसलों से बनने निकलने वाले तेल का उपयोग, कृषि, खाद्य स्वाद, दवाओं और इत्र जैसी चीजों में होता है।
आईएचबीटी के निदेशक संजय कुमार ने बताया कि सुगंधित फसलों को बढ़ावा देने के लिए अरोमा मिशन कार्यक्रम के तहत 5500 हेक्टेयर अतिरिक्त क्षेत्र लाने का निर्णय लिया। सुगंधित पौधों के मूल्य संवर्धन के लिए प्रसंस्करण इकाई अनिवार्य है। लेह में इस सुविधा की स्थापना से लेह जिले के स्थानीय किसानों को लाभ होगा। सुगंधित फसलों से बनने निकलने वाले तेल का उपयोग, कृषि, खाद्य स्वाद, दवाओं और इत्र जैसी चीजों में होता है।