त्याग और कर्म की अनूठी मिसाल जम्मू कश्मीर के कठुआ जिले में देखने को मिल रही है। आप सुरक्षित रहें, इसके लिए कई कोरोना योद्धा बीते डेढ़ महीने से अपनों से दूर, खुद की जान जोखिम में डालकर महामारी के खिलाफ जंग लड़ रहे हैं। ऐसी ही मिसाल नगरी परोल की तहसीलदार सुनिंद्रजीत कौर ने पेश की है।
मातृ दिवस विशेषः त्याग और कर्म की अनूठी मिसाल, कोरोना से जंग में कर रहीं 'ममता से समझौता'
डेढ़ माह में वह लखनपुर से लेकर कई क्वारंटीन सेंटर और तो और जिले में स्थापित कंट्रोल रूम में भी अपनी सेवाएं दे रही हैं। इस महामारी के बीच उनकी ड्यूटी ने उनके त्याग को और भी बड़ा कर दिया है। बीते डेढ़ माह से वह अपनी चार साल की बेटी सारा को भी गले नहीं लगा पाई हैं।
मूल रूप से कश्मीर के अनंतनाग जिले की रहने वाली सुनिंद्रजीत कौर की शादी जम्मू में हुई है, लेकिन अपनी ड्यूटी के लिए वह बेटी के साथ कठुआ में रहती हैं। सुनिंद्रजीत कौर ने बताया कि डेढ़ महीने में कई बार ऐसा हुआ है कि वह देर रात घर पहुंचती हैं। कई बार तो काम में सुबह हो जाती है। ऐसे में जब घर पहुंचती हैं तो बेटी सो रही होती है। कोरोना महामारी से निपटने के लिए किए जा रहे इंतजामों में उनकी ड्यूटी है लिहाजा वह घर में भी बेटी से दूरी बनाए रखती हैं। एक मां के लिए यह सबसे बड़ी चुनौती है, लेकिन इस समय देश को उनकी जरूरत है और वह अपना फर्ज पहले निभा रही हैं।
वहीं बैंक से सेवानिवृत्त हुई विमला देवी का कहना है कि उनका बेटा डॉ. संदीप डोगरा और बहू डॉ. अमन लोगों की सेवा में जुटे हुए हैं, यह सब देखकर मन को खुशी मिलती है, लेकिन चिंता भी बनी रहती है। इस समय कोरोना संकट में डॉक्टर और अन्य चिकित्सा स्टाफ के हवाले मानव जीवन है। उन्होंने बताया कि उनका बेटा और बहू जब ड्यूटी पर होते हैं, तो वह उनके दो बच्चों को संभालती हैं। उन्होंने बताया कि उनका बेटा और बहू अपनी ड्यूटी की वजह से कई-कई दिन अस्पतालों में व्यस्त रहते हैं और घर नहीं आते हैं।
कोविड साइकाइट्री अस्पताल की मेटरन मधु खजूरिया कोरोना मरीजों की देखभाल के बाद घर संभालने का काम भी कर रही हैं। वह कोविड के खिलाफ अपने बच्चों को प्रोत्साहित भी कर रही हैं। वह कहती हैं कि ड्यूटी देकर जब घर जाते हैं, तो पूरी गाइडलाइन का पालन करते हैं, ताकि परिवार को किसी तरह से कोरोना संक्रमण न मिले।