आतंकी घुसपैठ के लिहाज से अति संवेदनशील रूट एक बार फिर सक्रिय हो चुके हैं। खुफिया सूत्रों की मानें तो झज्जर कोटली में ढेर किए गए आतंकियों ने हीरानगर और सांबा सेक्टर की सीमा से घुसपैठ की थी। कठुआ और सांबा जिले की सीमा पर मौजूद बेई नाले से आतंकियों के घुसपैठ की आशंका जताई जा रही है। हालांकि आतंकियों को घुसपैठ के लिए इस रूट से दाखिल नहीं होना था और आतंकियों के गाइड ट्रक चालक और कंडक्टर दियालाचक में तरनाह के जरिए उनकी घुसपैठ का इंतजार कर रहे थे।
जम्मू-कश्मीर: फिर पुराने रूट पर सक्रिय हुए आतंकी, कठुआ और सांबा से जताई जा रही घुसपैठ की आशंका
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खुफिया सूत्रों की माने तो आतंकियों को भारतीय सीमा के भीतर घुसपैठ के बाद जरांईं इलाके से तरनाह नाले की ओर जाना था, लेकिन वे बेई नाले की ओर बढ़ते चले गए। आतंकियों को घाटी तक पहुंचाने की जिम्मेदारी लिए आए ट्रक चालक और कंडक्टर भी इसीलिए उनका दियालाचक में इंतजार करते रहे। इस बीच एक तरफ आतंकी कश्मीर में अपने आकाओं के संपर्क में थे, तो वहीं ट्रक चालक और कंडक्टर को भी वहीं से निर्देश मिल रहे थे। सूत्रों के अनुसार 11 और 12 सितंबर की मध्यरात्रि भारत-पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय सीमा से घुसपैठ के बाद बेई पहुंचे आतंकियों ने कश्मीर में संपर्क कर अपनी पोजीशन और लोकेशन की जानकारी दी। कश्मीर से ट्रक चालक और कंडक्टर को भी दियालाचक से सुबह चार बजे के लगभग बेई जाने के निर्देश मिल गए। इसके बाद सांबा जिले की हद में पड़ने वाले रेई गांव के नजदीक पेट्रोल पंप से आतंकी ट्रक में सवार हो गए।
आतंकियों को घाटी तक पहुंचाने की जिम्मेदारी लेने वाले ट्रक चालक और कंडक्टर दो दिन तक दियालाचक और आसपास के इलाकों में ही आतंकियों का इंतजार करते रहे। सूत्रों के अनुसार ट्रक में नौ सितंबर को ही माल लोड हो चुका था। ऐसे में ट्रक चालक को माल भरकर तुरंत लौट जाना चाहिए था, लेकिन वह माल भरने के बाद घाटी के बजाय दियालाचक पहुंचा और दो दिन तक इसी इलाके में रहा और आतंकियों का इंतजार करता रहा। आतंकियों की घुसपैठ की साजिश की भनक सुरक्षा एजेंसियों को भी नहीं लग पाई। जिस तरह से ट्रक ने इलाके में दो दिन तक इंतजार किया है, ऐसा अंदेशा जताया जा रहा है आतंकी पिछले दो दिन से घुसपैठ के लिए अंतरराष्ट्रीय सीमा के आसपास पहुंच चुके थे। झज्जर कोटली में जिन लोगों के घर में आतंकियों ने कुछ समय के लिए बुधवार रात शरण ली, वहां भी यही बताया था कि वे पिछले दो तीन दिन से भूखे हैं। ऐसे में इस बात का भी अंदेशा जताया जा रहा है कि आतंकियों का दल अंतरराष्ट्रीय सीमा के आसपास ही भटक रहा था।
इस बार जम्मू संभाग का कोई भी इलाका नहीं था निशाने पर
फिदायीन दस्ते के आतंकी इस बार जम्मू, कठुआ या फिर सांबा के किसी भी महत्वपूर्ण इमारत को निशाना नहीं बनाना चाहते थे। उनका लक्ष्य कश्मीर घाटी में पहुंचने का था। सूत्रों की माने तो कठुआ और सांबा जिला से लगती अंतरराष्ट्रीय सीमा से घुसपैठ के बाद आतंकी चाहते तो रास्ते में सुरक्षाबलों के किसी भी ठिकाने पर हमला कर सकते थे। जिस बेई नाले से आतंकियों की घुसपैठ को लेकर जानकारी सामने आ रही है और जिस पेट्रोल पंप के नजदीक से आतंकी ट्रक में सवार हुए, वहां से आईटीबीपी के ग्रुप सेंटर की दूरी मात्र एक किलोमीटर है। जिला सांबा और जम्मू के कई महत्वपूर्ण सुरक्षाबलों के ठिकानों से होकर आतंकी झज्जर कोटली के नजदीक ट्रैप हो गए।ी लग रहा है।