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Dussehra 2022: रावण के 10 सिर इन बुराईयों के हैं प्रतीक, जानें लंकानरेश के दशानन बनने की कहानी

लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: शिवानी अवस्थी Updated Wed, 05 Oct 2022 07:40 AM IST
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Dussehra 2022 Know Ravana 10 Heads Secrets and Significance of Dashanan Ravan on Vijayadashami
रावण के 10 सिर का रहस्य - फोटो : amar ujala

Dussehra 2022: भगवान श्रीराम ने लंका के राजा रावण से युद्ध लड़ा और उसे पराजित करके असत्य पर सत्य की जीत का संदेश दिया। रावण को महाज्ञानी, महा शक्तिशाली माना जाता है। रावण स्वयं में एक महान व्यक्तित्व था। भले ही प्रभु श्रीराम ने रावण का वध किया हो लेकिन कहा जाता है कि खुद रावण चाहते थे कि उनके कुल का उद्धार भगवान विष्णु के अवतार प्रभु श्रीराम करें। मोक्ष की प्राप्ति के लिए ही उन्होंने माता सीता का हरण किया। श्री राम की सेना से युद्ध किया और एक एक कर अपने परिवार के सभी लोगों को राम जी से लड़ने के लिए भेजा और अंत में स्वयं श्रीराम का सामना करते हुए मोक्ष की प्राप्ति की। रावण से जुड़ी कई कथाएं और रहस्य है, जो बहुत रोचक हैं। इस बार 5 अक्टूबर 2022 को दशहरा मनाया जा रहा है। दशहरा यानी विजयादशमी के दिन ही भगवान विष्णु के अवतार श्री राम ने रावण का वध किया था। रावण को दशानन भी कहते हैं क्योंकि उनके दस सिर हुआ करते थे। रावण देव नहीं थे और न दानव थे, तो एक मनुष्य के दस सिर कैसे हो सकते हैं? विजयदशमी के मौके पर जानिए रावण दशानन कैसे बने और क्या है रावण के दस सिरों का रहस्य।

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दशहरा 2022 - फोटो : istock

रावण के दस सिरों का रहस्य

रावण के दस सिर की चर्चा रामचरित मानस में आती है। हालांकि कुछ लोग मानते हैं कि रावण के दस सिर नहीं थे। रावण मायावी थे, जो दस सिरों का भ्रम बनाते थे। हालांकि रामचरित मानस समेत कई ग्रंथों के मुताबिक, रावण के दस सिर 6 शास्त्रों और 4 वेदों के प्रतीक हैं। इसीलिए उन्हें एक महान विद्वान और अपने समय का सबसे बुद्धिमान व्यक्ति बताया गया है। मान्यता है कि रावण 65 प्रकार के ज्ञान और हथियारों की सभी कलाओं में निपुण थे। इसके अलावा रावण के 10 सिरों को दस बुराइयों का प्रतीक भी माना जाता है।

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रावण - फोटो : social media

रावण के दस सिर की कथा  

लंकापति रावण भगवान शिव जी के परम भक्त थे। मान्यता है कि रावण ने भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए तपस्या की। लेकिन उनकी कठोर तपस्या के बाद भी भगवान शिव प्रसन्न नहीं हुए और रावण को दर्शन नहीं दिए। इसपर रावण ने अपना सिर काट कर शिवजी को अर्पण कर दिया। लेकिन उनका सिर फिर से जुड़ गया। उन्होंने फिर से अपना सिर काटा लेकिन फिर से रावण का सिर जुड़ गया। एक-एक करके रावण ने दस बार अपना सिर धड़ से अलग कर दिया और सिर दस बार जुड़ गया।


उनकी तपस्या को देखकर शिवजी प्रसन्न हो गए और रावण को वरदान दिया कि उनका वध तब तक नहीं हो सकता, जब तक कोई नाभि पर प्रहार न करे। इसके साथ ही शिवजी ने रावण को दस सिरों का भी वरदान दिया। इस तरह रावण के दस सिर हो गए और उनका नाम दशानन पड़ गया।

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रावण के दस सिर भ्रम - फोटो : iStock

रावण के दस सिर भ्रम

लंका के राजा रावण के दस सिर होने की कई अन्य कहानियां भी प्रचलित हैं। कहा जाता है कि रावण के दस सिर नहीं थे, बल्कि दस सिर होने का भ्रम पैदा किया गया था।

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रावण - फोटो : अमर उजाला

रावण के दस सिर हैं बुराइयों के प्रतीक

रावण के 10 सिर को बुराइयों का प्रतीक भी मानते हैं। दस सिर का अर्थ है, काम, क्रोध, लोभ, मोह, घमंड, ईर्ष्या, मन, ज्ञान, चित्त और अहंकार।

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