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One-Pot Cooking: एक बर्तन- स्वाद अनेक, जानें इस तरीके से भोजन पकाने के फायदे
लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: शिवानी अवस्थी
Updated Sat, 01 Jun 2024 04:41 PM IST
सार
वन पॉट कुकिंग कॉन्सेप्ट में भोजन तुरंत, सरलता से और एक ही बर्तन में तैयार किया जाता है। इसके पीछे ‘धोने के लिए कम बर्तन’ का कॉन्सेप्ट विशेष रूप से काम करता है।
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Cooking
- फोटो : Istock
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घर के बने खाने का अपना अलग ही महत्व होता है। लेकिन इस बात से भी इनकार नहीं किया जा सकता कि खाना पकाने के बाद बर्तन साफ करना सबसे उबाऊ और बोरियत भरा काम होता है। ऐसे में एक बार आपको ‘वन पॉट कुकिंग’ के बारे में जानना चाहिए और इसे आजमाना चाहिए।
सुबह-सुबह अमूमन हर घर में एक रेस-सी लगी रहती है। बच्चों को स्कूल भेजना, फिर खुद के और पति के लिए लंच बॉक्स पैक करना। ये सब आप जल्दी-जल्दी निपटा कर ऑफिस के लिए निकल गईं। रास्ते में जाते हुए ‘आज रात में क्या बनाऊ’ सोचकर आप सोशल मीडिया पर सर्च करती हैं और आपको स्क्रीन पर कई यूट्यूब चैनल अपनी रेसिपीज शेयर करते दिखने लगते हैं। स्क्रीन पर मिनटों में बनती इन रेसिपीज को देख आप सोचती हैं कि आज तो घर जाकर इसे जरूर ही बना लूंगी। लेकिन क्या सच में ऐसा हो पाता है? शायद नहीं!
आज जीवन दिनों-दिन फास्ट होता जा रहा है, जहां सुबह हड़बड़ी में काम पर निकलना और देर शाम वापस आना रूटीन बन गया है। वापस आकर अगर आप कुछ अच्छा बनाने के बारे में सोचती भी हैं तो आपकी यह सोच और व्यस्तता, दोनों का साथ बेमेल-सा दिखाई पड़ता है, क्योंकि सुबह तैयार होने और घर के बाकी कामों को करते-करते आपके पास समय ही नहीं बच पाता और शाम को वापस आने के बाद थकान आपको कुछ विशेष बनाने की इजाजत ही नहीं देती।
इसका नतीजा यह होता है कि आप मन मार कर या तो कुछ अटपटा-सा मंगवा लेती हैं या फिर ‘कुछ भी’ खाकर अपनी भूख मिटा लेती हैं। लेकिन इन सबके बीच अगर कोई चीज सबसे ज्यादा खोई हुई महसूस होती है तो वह है आपका स्वास्थ्य, जो कि कम पोषक तत्व मिलने और जंक फूड खाते चले जाने के कारण बिगड़ जाता है।
लेकिन कहते हैं कि ‘जहां चाह, वहां राह।’ शायद आज की इन परिस्थितियों को देखते हुए ही ‘वन पॉट कुकिंग’ की खोज हुई होगी। हमारे देश में वर्षों से बनती चली आ रही ‘खिचड़ी’ इसी अवधारणा का ही तो एक बेहतरीन उदाहरण है, जिसे आमतौर पर एक ही पतीले में तैयार किया जाता रहा है। वन पॉट कुकिंग कॉन्सेप्ट में भोजन तुरंत, सरलता से और एक ही बर्तन में तैयार किया जाता है। इसके पीछे ‘धोने के लिए कम बर्तन’ का कॉन्सेप्ट विशेष रूप से काम करता है।
एक समय था, जब वन-पॉट कुकिंग कुंवारे लोगों, कैंपस और घर से दूर रह रहे छात्रों के बीच विशेष रूप से लोकप्रिय थी। ऐसा इसलिए, क्योंकि छात्रों को स्वाद से ज्यादा सुविधा और स्वास्थ्य की जरूरत होती है। लेकिन आज इस अवधारणा को स्वाद, सेहत और सुविधा से जोड़ दिया गया है। ये तीनों ‘स’ मिलकर इसे एक संपूर्ण पाक विधा का रूप देते हैं, जिसकी वजह से यह आज तेजी से लोकप्रिय होती जा रही है।
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Khichdi
- फोटो : iStock
क्या है ‘वन पॉट कुकिंग’
यह सदियों पुराना कुकिंग स्टाइल लगभग सभी जातियों और संस्कृतियों में पाया जाता है। वन पॉट कुकिंग में बर्तन में डाली गई सभी सब्जियों के पोषक तत्व जैसे प्रोटीन और स्टार्च एक बर्तन में मिल जाते हैं। यह स्वाद और बनावट एक साथ मिलकर एक अनोखा स्वाद पैदा करते हैं, जो अक्सर अलग-अलग तत्वों की तुलना में अधिक स्वादिष्ट होता है।
वैसे तो वन पॉट कुकिंग बहुत पुरानी पाक विधा है, जो कि आज सोशल साइट्स और टेलीविजन पर कुकिंग शोज की भरमार के कारण कहीं गुम-सी हो गई है। जापान से लेकर भारत, दक्षिण अफ्रीका से लेकर ब्राजील तक यानी दुनिया भर में एक पॉट में खाना बनाना सुविधाजनक माना जाता है। यह दृष्टिकोण स्वादिष्ट, पौष्टिक और सुविधापूर्ण व्यंजन बनाने के लिए उपयुक्त है।
वन पॉट कुकिंग आमतौर पर सरल और स्वादिष्ट होती है। इसकी उत्पत्ति स्टू और सूप बनाने से मानी जाती है। इसकी मूल अवधारणा यह थी कि जो कुछ भी उपलब्ध है, उसे अपने बर्तन में डाल दो और पूरे दिन आग पर पकाने के लिए छोड़ दो। इसे मुख्य तौर पर भोजन के दौरान खाया जाता था। इसका एक अन्य लाभ यह होता था कि इसी आग से पूरे दिन कमरा भी गरम किया जाता था, मगर अब के समय में इसमें खाना पकाने के विभिन्न चरणों के साथ विभिन्न सामग्रियों को भी जोड़ दिया गया है, जो सेहतमंद होने के साथ बनाने में भी आसान है। इसलिए आपको वन पॉट कुकिंग की खूबियों के बारे में भी पता होना चाहिए।
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किचन वास्तु
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वन पाॅट कुकिंग के फायदे
समय की बचत
वन पॉट कुकिंग के महत्वपूर्ण फायदों में से एक है, समय की बचत। चूंकि इस विधि में खाना बनाने के लिए एक ही बर्तन का उपयोग किया जाता है, जिस कारण अधिक बर्तनों का इस्तेमाल नहीं करना पड़ता और कम ही बर्तन गंदे होते हैं। साथ ही एक ही बर्तन में पूरा भोजन तैयार कर आप ढेर सारे व्यंजनों की तैयारी और सफाई करने में लगने वाला समय बचा सकती हैं।
वहीं, इस कुकिंग स्टाइल से खाना भी जल्दी बनता है। यह उन लोगों के लिए एक बेहतरीन उपाय है, जिनके पास कुकिंग के लिए समय बिल्कुल नहीं होता है या फिर जिन्हें ज्यादा बर्तन धोना पसंद नहीं। वहीं, आज की व्यस्त जीवन-शैली वालों के लिए स्वाद और सेहत से समझौता किए बिना वन पॉट कुकिंग एक अच्छा विकल्प हो सकती है।
आपकी थाली में पोषक तत्व
वन पॉट कुकिंग में चीजों को एक साथ मिलाकर पकाया जाता है। इससे सारी सामग्रियों का स्वाद, रस और रंग एक साथ खूबसूरती से घुल-मिल जाते हैं, जो खाने को एक अद्भुत स्वाद और रंग प्रदान करते हैं। इसके अलावा वन पॉट में बनने वाली चीजों में इस बात का विशेष ध्यान रखा जाता है कि उन में सभी पोषक तत्व मौजूद हों, जैसे कि प्रोटीन, विटामिन, कार्ब और फैट आिद, ताकि भोजन आपके लिए सेहतमंद ही साबित हो। जब ये पोषक तत्व आपकी थाली में एक साथ मिल जाते हैं तो आपकी सेहत के लिए फायदेमंद साबित होते हैं।
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masala khichdi
- फोटो : instagram
बढ़ता है स्वाद भी
वन पॉट कुकिंग के जरिए बन रहे भोजन में स्वाद आश्चर्यजनक रूप से बढ़ जाता है। ऐसा इसलिए, क्योंकि इसमें पक रहीं चीजें आपस में मिलकर खाने को एक अच्छा स्वाद और लुक देती हैं, जिससे संतुष्टि का अनुभव होता है। यह कुछ-कुछ हमारे खिचड़ी बनाने के कॉन्सेप्ट से मिलता-जुलता है।
जिस तरह भारतीय खिचड़ी में दाल, चावल और कई सब्जियां, मसाले वगैरह मिलाकर एक संपूर्ण फूड बनता है, ठीक उसी तरह वन पॉट कुकिंग में अलग-अलग तरह की चीजों को एक साथ मिलाकर एक संपूर्ण भोजन बनाया जाता है। रंग-बिरंगी सब्जियां, नट्स, अनाज और फ्रूट्स भोजन को अलग ही रंगत प्रदान करते हैं। साथ ही डाले गए मसाले और हर्ब्स खाने के स्वाद को बेहतर बनाते हैं।
वन पॉट कुकिंग में आज कई तरह के प्रयोग किए जा रहे हैं। अब यह केवल कुछ भी उबालकर पेट भरने तक ही सीमित नहीं रह गया है, बल्कि इस विधि द्वारा अनेक प्रकार के व्यंजन बनाए जा रहे हैं, जो कि स्वाद और सेहत से भरपूर होते हैं।
कई खूबियों से भरपूर
वन पॉट कुकिंग का एक सबसे बड़ा फायदा यह होता है कि यह बहुमुखी होता है, यानी इसमें विविध प्रकार के व्यंजनों को एक साथ बनाया जा सकता है। वन पॉट कुकिंग में आपको अलग-अलग चीजों और स्वाद के साथ प्रयोग करने के ढेरों अवसर मिलते हैं। आप इसमें वेज, नॉनवेज, सी-फूड या कुछ भी बना सकती हैं, जो आपकी आहार को संपूर्णता प्रदान करते हैं।
आप चाहें तो कोई भी परंपरागत व्यंजन, जैसे कि बिरयानी भी बनाकर खा सकती हैं। सब कुछ आपके हाथ में है। बस सामग्रियों को एक साथ मिलाइए और अपनी मनपसंद डिश में प्रयोग करते हुए संपूर्ण भोजन की शक्ल दे दीजिए। साथ ही वन पॉट कुकिंग में खाने की बर्बादी भी कम होती है।
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Khichdi
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सब कुछ बजट में
वन पॉट कुकिंग आपके बजट के लिए भी अच्छा है। इस कुकिंग स्टाइल में उन्हीं चीजों का प्रयोग करते हैं, जिन्हें आसानी से खरीदा जा सकता है। इस स्टाइल से बना खाना स्वादिष्ट होता है, इसलिए अतिरिक्त रूप से बचता भी नहीं है। वहीं, प्रायः लोग इस स्टाइल से उतना ही खाना बनाते हैं, जितने की जरूरत होती है। जब आप विभिन्न सब्जियों, दालों और अनाजों को मिलाकर कोई डिश बनाती हैं तो आमतौर पर अकेले पकाए जाने की तुलना में सारी चीजें कम ही लगती हैं, जिससे बजट के बिगड़ने की चिंता भी नहीं रहती।
ये बातें भी खास
वन पॉट कुकिंग के लिए उपयोग में आने वाला बर्तन बड़ा और गहरा होना चाहिए, ताकि सभी चीजों को उसमें आराम से डाला और पकाया जा सके। आप पकाने के लिए चाहे जो भी बर्तन चुनें, लेकिन यह सुनिश्चित करें कि उसमें से खाना पकते समय बाहर न निकले और अच्छी तरह से पक भी जाए। एक अन्य बात का ध्यान रखें कि बर्तन की तली में खाना पकने में अधिक समय लगता है। इसलिए पकाते समय पहले उन चीजों की लेयरिंग करें, जो पकने में ज्यादा समय लेती हैं। उसके बाद उन चीजों की लेयर बनाएं, जो जल्दी पक जाती हैं। इस तरह हर एक चीज को एक के ऊपर एक लेयरिंग कर सजाएं, ताकि कोई भी चीज न तो बहुत ज्यादा पके और न ही कच्ची रह जाए।
अपनी व्यस्त जीवन-शैली के कारण भले ही आप हर दिन अपनी मेज रंग-बिरंगी डिशेज से न भर पाएं, लेकिन वन पॉट कुकिंग के जरिये एक संपूर्ण और शानदार भोजन तो बना ही सकती हैं, जो कुकिंग करने के शौक के साथ ही आपकी सेहत को भी बनाए रखेगा।
आसान और सेहतमंद तरीका
आहार विशेषज्ञ अंशु चौहान बताती हैं, आजकल की व्यस्त लाइफस्टाइल में ऐसे खाने का विशेष महत्व है, जो समय की बचत के साथ-साथ पोषक तत्वों से भी भरपूर हो। वन पॉट कुकिंग भी ऐसी ही एक विधि है। इस विधि में बिरयानी/खिचड़ी जैसे कई व्यंजन शामिल होते हैं, जो कि कई तरह के पोषक तत्वों से भरपूर होते हैं। यह आहार स्वास्थ्य के लिए एक संतुलित आहार भी है।
वन पॉट कुकिंग में एक ही बर्तन में पूरा खाना बनता है। इस तरह भोजन को बनाना सुविधाजनक होता है, साथ ही सब चीजों को सही ताप पर अच्छी तरह से पकाया जाता है। वहीं इसके बाद धोने के लिए बर्तन भी कम होते हैं। ऐसा देखा जाता है कि जो लोग सप्ताह में पांच बार घर का बना खाना खाते हैं, उनमें स्वस्थ बीएमआई यानी शरीर द्रव्यमान सूचकांक ठीक रहता है, साथ ही कम कोलेस्ट्रॉल, उच्च रक्तचाप और मेटाबॉलिक डिसऑर्डर की भी कम संभावनाएं रहती हैं, जिससे शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य में महत्वपूर्ण सुधार होता है। इस प्रकार यह खाना पकाने का एक आसान, स्वास्थ्यवर्धक और कम बजट वाला तरीका है, जो कि बाहर के खाने से कई गुना हेल्दी और साफ-सुथरे तरीके से बना होता है।
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