Medically Reviewed by Ms. Priya Pandey
कोरोना वायरस से बचाव के लिए लगातार इम्यूनिटी बढ़ाने की सलाह दी जा रही है। वही कमजोर इम्यूनिटी से सर्दियों में भी कई तरह की बीमारियों से लोग ग्रसित हो सकते हैं। ऐसे में बीमारियों से दूर रहने के लिए इम्यूनिटी बढ़ाने की जरूरत होती है। लोग इम्यूनिटी बढ़ाने के लिए कई उपायों को प्रयोग में ला रहे हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञ इम्यूनिटी बढ़ाने के लिए दवाओं, विटामिन की गोलियों और सप्लीमेंट के उपयोग की जरूरत नहीं मानते है। उनके मुताबिक रोजाना पौष्टिक आहार से ही मानव शरीर की इम्यूनिटी आसानी से मजबूत हो सकती हैं। इस बारे में आहार और पोणण विशेषज्ञ का कहना है कि खाने के समय और तरीके का भी सेहत पर असर पड़ता है। प्रतिरक्षा को बढ़ाने के लिए कुछ चीजों के सेवन ही काफी है, हालांकि इनमें से कुछ चीजें खाली पेट ज्यादा फायदा करेंगी तो कुछ को खाने के बाद सेवन करना चाहिए। जानिए किन चीजों का सेवन से आपकी इम्यूनिटी हो सकती है मजबूत।
आज का हेल्थ टिप्स: इम्यूनिटी बढ़ाने के लिए इन तीन चीजों का करें सेवन, है फायदेमंद
इम्यूनिटी बढ़ाने के लिए खाएं आंवला
आंवले में भरपूर मात्रा में विटामिन सी होता है। विटामिन सी इम्यूनिटी को मजबूत करने में काफी सहायक हो सकता है। आंवले को एंटीऑक्सीडेंट से भी समृद्ध माना जाता है। आंवले के जूस का सेवन खाली पेट करने से आपको कई तरह के लाभ मिल सकते हैं। खाली पेट आंवला खाने या जूस पीने से स्वास्थ्य आंतरिक रूप से बेहतर बनता है। साथ ही त्वचा चमकदार और बाल भी स्वस्थ होते हैं।
शहद का सेवन
शहद भी प्रतिरक्षा को मजबूत करता है। खाली पेट गर्म पानी के साथ एक चम्मच शहद मिलाकर पीने से वजन घटता ही है। साथ ही त्वचा और इम्यूनिटी के लिए भी फायदेमंद होता है। आप चाहें तो विटामिन सी और स्वाद के लिए शहद पानी में नींबू का रस भी मिला सकते हैं। शहद, गर्म पानी और नींबू का ये मिश्रण एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर होता है, जिसका जीवाणुरोधी गुण प्रतिरक्षा के लिए बेहतर होता है।
लहसुन का सेवन
स्वास्थ्य के लिए लहसुन भी गुणकारी है। लहसुन में एंटीबायोटिक और एंटीबैक्टीरियल गुण होते हैं, जो संक्रमण से दूर रखने में मदद करता है। लहसुन के सेवन से ब्लड शुगर का स्तर नियंत्रित होता है। स्वस्थ हृदय और फेफड़ों से संबंधित अन्य समस्याओं में भी काफी कारगर हो सकता है। खाली पेट गर्म पानी के साथ लहसुन की एक-दो कलियों का रोजाना सेवन करने से बेहतर लाभ मिलता है।
नोट: यह लेख अनुभवी डायटिशियन (आहार विशेषज्ञ) प्रिया पांडेय के सुझावों के आधार पर तैयार किया गया है। उन्होंने कानपुर के सी.एस.जे.एम. विश्वविद्यालय से मानव पोषण में बी.एस.सी. किया है। उन्होंने कानपुर के आभा सुपर स्पेशलिटी अस्पताल में आहार विशेषज्ञ के रूप में काम किया है। उन्होंने जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज में पोषण व्याख्यान के विषय के प्रतिनिधि के रूप में भी भाग लिया है। उनका इस क्षेत्र में 8 वर्ष का लंबा अनुभव है।
अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।

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