आपने फौजियों की परेड देखते समय यह जरूर ध्यान दिया होगा कि वे सभी एक जैसे तने शरीर और चुस्त चाल के साथ चलते हैं। लम्बे समय तक एक ही पोजीशन में खड़े रहने या बंदूक ताने रहने के बावजूद उनके पोस्चर पर कोई असर नहीं होता। इसका कारण होता है सही पोश्चर में रहने का अभ्यास। सही पोस्चर केवल आपके शरीर को दुरुस्त रखने में ही मदद नहीं करता, इससे आपके मन की स्थिति पर भी सकारात्मक असर पड़ता है। आजकल दिनचर्या और जीवनशैली के बदलने का असर उठने-बैठने के तरीकों पर भी पड़ा है। इससे कम उम्र में ही पोस्चर बिगड़ने की आशंका भी बढ़ने लगी है। एक अच्छे पोस्चर के लिए जरूरी है शुरुआत यानी बचपन से ही बैठने-खड़े होने के तरीकों पर ध्यान देना। खासकर जब बच्चे बैठें तो उनकी पीठ सीधी और तनी रहे। एक बार यह आदत होने पर हमेशा ही पोश्चर सही बनाए रखने में मदद मिलती है। बचपन में अगर प्रयास न किया हो तो युवावस्था में भी पोस्चर को सही बनाने की कोशिश की जा सकती है क्योंकि उम्र के बढ़ते जाने के साथ गलत पोस्चर न केवल आपकी आदत बन सकता है बल्कि शरीर उसी तरीके से ढल जाता है और फिर पोस्चर को चाहते हुए भी सुधारा नहीं जा सकता। इसलिए कोशिश करें कि कम उम्र में ही पोश्चर को सुधार लें। अगली स्लाइड्स में खराब पोस्चर के बारे में जानिए।
Health Tips: उठने- बैठने के ये गलत तरीके शरीर पर डालते हैं बुरा असर, सही पोस्चर के लिए अपनाएं ये उपाय
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इस तरह रखें ध्यान:
पोश्चर को सही करने के लिए आपको कुछ बातों का खास ध्यान रखना होगा। ये वे तरीके हैं जो बहुत जटिल भी नहीं हैं और आसानी से आप इन्हें जीवनशैली के साथ जोड़ सकते हैं। ऐसे कुछ तरीके या बातें जो पोस्चर को सही बनाए रखने में मदद कर सकती हैं, वे हैं-
-कंधे झुकाकर न बैठें। इस तरह से बैठने से आपकी रीढ़ की हड्डी पर दबाव पड़ता है। साथ इससे जुडी हड्डियों, मांसपेशियों, जोड़ों सभी पर अतिरिक्त तनाव आ जाता है। केवल रीढ़ ही नहीं कंधे झुकाकर या आगे की तरफ झुककर बैठने से फेफड़ों और आंतों के काम करने में भी बाधा आने लगती है। इतना ही नहीं, लंबे समय तक ऐसे बैठने से पाचन शक्ति के गड़बड़ाने और सांस लेने में दिक्कत होने जैसे लक्षण भी सामने आने लगते हैं जो आगे जाकर गंभीर समस्या भी खड़ी कर सकते हैं।
-दफ्तर में काम करते समय या पढाई करते समय टेबल पर झुककर बैठना या पीठ को कुर्सी से दूर रखकर बैठना भी तकलीफदायक हो सकता है। यह कमर और रीढ़ दोनों के लिए खतरनाक साबित हो सकता है। इसलिए अगर आपका काम लंबे समय तक बैठने वाला हो तो कुर्सी पर कुशन या तकिया लगाकर बैठें। ताकि आपकी पीठ सीढ़ी और तनी रहे। आप चाहें तो रीढ़ की हड्डी को सही सपोर्ट देने के लिए एक टॉवल को रोल करके भी रख सकते हैं। बैठते समय अपने घुटनों को भी समान ऊंचाई पर रखें। अगर आप पैर रखने के लिए किसी ऊँची सतह का उपयोग करते हैं तो यह सतह समतल और एक जैसी हो यह जरूरी है। पैरों को सतह पर सीधा और पूरी तरह जमीन से जुड़ा रखें। बार-बार टेबल की और झुकें नहीं।
-चाहे बात कर रहे हों, किचन का काम कर रहे हों या बस स्टॉप पर इंतजार कर रहे हों, सीधे खड़े रहने की आदत डालें। एक पैर पर खड़े रहना, किसी चीज से आधा टिककर खड़ा होना या एक हाथ पर वजन डालकर टेढ़ा खड़ा होना पूरे शरीर के संतुलन को गड़बड़ कर सकता है। अपने मन में यह कल्पना करें कि आप किसी दीवार के सहारे खड़े हैं, जैसे हाइट नापते समय किया जाता है। आपके कंधे पीछे की तरफ, सीधे और तने हुए हों, घुटने एकदम सीधे हों और पेट अंदर की तरफ हो तो यह सही पोश्चर होगा। सीधे खड़े रहने की आदत शरीर के लिए तो फायदेमंद होगी ही, इससे आप लंबे और दुबले भी दिखाई देंगे। साथ ही यह आपके आत्मविश्वास में भी इजाफा करेगी, यानी मानसिक स्तर पर भी इससे सकारात्मक बने रहने में मदद मिलेगी।
-लैपटॉप, टैबलेट्स या मोबाइल फोन का प्रयोग आज की जरूरत भी है। खासकर कोरोना के आने के बाद से डिजिटल दुनिया ने हमारे जीवन का बड़ा हिस्सा अपने नाम कर लिया है। ऐसे में जरूरी है कि पोस्चर सही बना रहे ताकि आगे जाकर शरीर को तकलीफ का सामना न करना पड़े। इन गैजेट्स का उपयोग करते समय हमेशा बीच-बीच में ब्रेक लेकर गर्दन सीढ़ी करें, स्ट्रेचिंग करें। फोन का उपयोग करते समय फोन को आंखों की ऊंचाई तक लाएं और अपनी आंखों को काम के हिसाब से घुमाएं, न कि सिर को। लंबे समय तक फोन को गलत पोश्चर के इस्तेमाल करने से रीढ़ की हड्डी और कंधे के जोड़ों पर दबाव पड़ता है जो मुश्किल खड़ी कर सकता है।